MP News: मध्यप्रदेश में कार्यवाहक पदोन्नति पर संकट, 15 हजार पुलिसकर्मियों पर डिमोशन का खतरा; ACR और रिकॉर्ड के आधार पर होगा फैसला
भोपाल। MP में कार्यवाहक पदोन्नति के आधार पर लंबे समय से उच्च पदों पर जिम्मेदारी संभाल रहे पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। प्रदेश में नए पदोन्नति नियम लागू होने के बाद अब नियमित प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके साथ ही ऐसे कर्मचारियों की समीक्षा भी की जा रही है, जो पिछले कई वर्षों से कार्यवाहक प्रभार के तहत ऊंचे पदों पर काम कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, प्रदेश के करीब 15 हजार पुलिस अधिकारी और कर्मचारी इस प्रक्रिया से प्रभावित हो सकते हैं। यदि वे नियमित पदोन्नति के लिए निर्धारित मापदंडों में पात्र नहीं पाए जाते हैं, तो उनका कार्यवाहक प्रभार समाप्त कर उन्हें उनके मूल पद पर वापस भेजा जा सकता है।
पदोन्नति नियम लागू होने के बाद शुरू हुई प्रक्रिया
MP पदोन्नति नियम-2025 लागू होने के बाद विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसी प्रक्रिया के तहत पुलिस विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों की पात्रता की जांच की जा रही है।
जांच के दौरान कर्मचारियों की सेवा अवधि, वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR), विभागीय कार्रवाई, निलंबन रिकॉर्ड और न्यायालय में लंबित मामलों की जानकारी देखी जा रही है।
जो कर्मचारी निर्धारित मापदंडों को पूरा नहीं करेंगे, उनका कार्यवाहक पद समाप्त किया जा सकता है और उन्हें पुराने पद पर वापस भेजने की कार्रवाई की जाएगी।
पांढुर्णा से शुरू हुई कार्रवाई
कार्यवाहक पदोन्नति समाप्त करने की प्रक्रिया की शुरुआत पांढुर्णा जिले से हो चुकी है। यहां पुलिस अधीक्षक कार्यालय की ओर से कार्यवाहक प्रधान आरक्षक के रूप में तैनात 32 पुलिसकर्मियों का प्रभार समाप्त करने के आदेश जारी किए गए हैं।
इन कर्मचारियों को वापस उनके मूल पद कॉन्स्टेबल के रूप में पदस्थ किया गया है। इसे प्रदेश में कार्यवाहक पदोन्नति की समीक्षा के बाद हुई पहली बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।
इस कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग में कार्यवाहक पद पर काम कर रहे अन्य कर्मचारियों में भी चिंता बढ़ गई है।
कॉन्स्टेबल से डीएसपी स्तर तक असर
MP में वर्ष 2016 से नियमित पदोन्नति की प्रक्रिया प्रभावित थी। प्रमोशन नहीं होने के कारण कर्मचारियों को लंबे समय तक पदोन्नति का लाभ नहीं मिल पा रहा था।
इसके बाद वर्ष 2021 से पुलिस मुख्यालय की ओर से कॉन्स्टेबल से लेकर इंस्पेक्टर स्तर तक कार्यवाहक पदोन्नति देने की व्यवस्था शुरू की गई। इसके तहत कई कर्मचारियों को उच्च पद की जिम्मेदारी, रैंक और वर्दी के साथ काम करने का अवसर मिला।
वर्तमान में कॉन्स्टेबल से लेकर डीएसपी स्तर तक हजारों पुलिसकर्मी कार्यवाहक पदों पर सेवाएं दे रहे हैं। अब नियमित पदोन्नति प्रक्रिया शुरू होने के बाद इन सभी की पात्रता की समीक्षा की जा रही है।
ACR और विभागीय रिकॉर्ड बनेगा आधार
नियमित पदोन्नति के लिए कर्मचारियों की पिछले पांच वर्षों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR) को महत्वपूर्ण आधार बनाया जा रहा है।
इसके अलावा किसी कर्मचारी के खिलाफ विभागीय दंड की कार्रवाई, निलंबन या न्यायालय में लंबित प्रकरण होने की स्थिति में भी उसकी पात्रता प्रभावित हो सकती है।
सूत्रों के अनुसार, जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद करीब एक हजार अधिकारी और कर्मचारी नियमित पदोन्नति के लिए अपात्र पाए जा सकते हैं।
यदि ऐसा होता है तो इन कर्मचारियों को कार्यवाहक पद से हटाकर मूल पद पर भेजा जा सकता है।
पुलिस विभाग में बढ़ी बेचैनी
कार्यवाहक पदोन्नति समाप्त होने की संभावना को लेकर पुलिस विभाग के कर्मचारियों में चिंता का माहौल है। कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने कई वर्षों तक उच्च पद की जिम्मेदारियां निभाई हैं और विभागीय कार्यों को पूरी क्षमता के साथ पूरा किया है।
कई कर्मचारियों का मानना है कि नियमित पदोन्नति में देरी का कारण उनकी ओर से नहीं था, इसलिए कार्यवाहक पद समाप्त करने से पहले मानवीय पहलुओं को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
वहीं विभाग का कहना है कि पदोन्नति नियमों के अनुसार ही पूरी प्रक्रिया की जा रही है और पात्र कर्मचारियों को ही नियमित पदोन्नति का लाभ मिलेगा।
सरकार और विभाग की नजर प्रक्रिया पर
पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर पुलिस मुख्यालय और सरकार की ओर से लगातार निगरानी की जा रही है। विभाग का उद्देश्य है कि लंबे समय से रुकी हुई पदोन्नति प्रक्रिया को नियमों के अनुसार पूरा किया जाए।
आने वाले दिनों में डीपीसी की बैठकों के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी कि कितने कर्मचारियों को नियमित पदोन्नति मिलती है और कितने कार्यवाहक पद से हटाए जाते हैं।
फिलहाल मध्यप्रदेश पुलिस के हजारों कर्मचारियों की नजर इस प्रक्रिया पर टिकी हुई है। कार्यवाहक पदोन्नति पर निर्भर कर्मचारियों के लिए आने वाले फैसले उनके करियर की दिशा तय कर सकते हैं।
