कुंथलगिरि सिद्ध क्षेत्र में 13 दिवसीय सल्लेखना पूर्ण कर रविवार रात्रि 11:34 बजे प्राप्त किया समाधिमरण
इंदौर | राजेश जैन दद्दू
भारत वर्षीय जैन समाज के लिए अत्यंत हृदय-विदारक किंतु गौरवपूर्ण सूचना है कि परम पूज्य क्षपक मुनि श्री वर्धमानसागर जी महाराज ने महाराष्ट्र स्थित पावन तीर्थ कुंथलगिरि सिद्ध क्षेत्र में आचार्य विद्यासागर जी महाराज के संसघ सानिध्य में सल्लेखना 13 दिवस की दुर्लभ सल्लेखना को पूर्ण कर, सभी प्रकार रसों का भी आजीवन त्याग करते हुए दिनांक 05 जुलाई रविवार 2026, रात्रि 11:34 बजे समाधिमरण को प्राप्त किया। धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि पूज्य गुरुदेव ने अपना संपूर्ण जीवन संयम, तपस्या, स्वाध्याय और आत्म-कल्याण को समर्पित कर दिया। सल्लेखना के माध्यम से उन्होंने हमें सिखाया कि देह से मोह का त्याग ही वास्तविक वीतरागता है।
हमारी और से तथा समस्त इंदौर नगर जैन समाज की ओर से पूज्य मुनिश्री के श्रीचरणों में कोटि-कोटि वंदन, नमोस्तु नमोस्तु। आपके द्वारा दी गई धर्म, करुणा, क्षमा और अपरिग्रह की प्रेरणा को हम हृदय में धारण करते हैं।आपने जिस प्रकार देह को साधना का माध्यम बनाया, उसी प्रकार हम भी अपने जीवन में संयम, समता और धर्मभाव को दृढ़ करने का संकल्प लेते हैं।
भारत वर्षीय जैन समाज के साथ इंदौर की धर्म नगरी भी शोकाकुल है, परंतु गर्वित भी है कि ऐसे महान संत ने धर्म की ज्योति को और प्रज्वलित करते हुए नमोस्तु शासन जयवंत किया।
इंदौर समाज के वरिष्ठ समाजसेवी डॉ जैनेन्द्र जैन, महावीर ट्रस्ट के अध्यक्ष अमित कासलीवाल, सांसद के अध्यक्ष आनंद नवीन गोधा, हंसमुख गांधी टीके वेद, मयंक जैन एवं फेडरेशन की राष्ट्रीय शिरोमणि संरक्षिका श्रीमती पुष्पा कासलीवाल, महिला परिषद् संभागीय अध्यक्ष श्रीमती मुक्ता जैन, श्रीमती रेखा जैन श्रीफल आदि ने अपनी विनयांजलि देते। समाविष्ट क्षपक मुनि श्री वर्धमानसागर जी महाराज के श्रीचरणों में शत-शत नमन करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की
