मारुति नंदन आश्रम देवगढ़ में श्रद्धा और सेवा का अद्भुत संगम : बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का जन्मोत्सव वृक्षारोपण,
रिपोर्ट : कौशिक पंडित कुशाग्र, समाचार सेवा
स्थान : मनावर, जिला धार (मध्य प्रदेश)
भक्ति, सेवा और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संगम बना जन्मोत्सव
मनावर तहसील के अंतर्गत आने वाले देवगढ़ स्थित मारुति नंदन आश्रम में शनिवार को Bageshwar Baba Dhirendra Krishna Shastri का जन्मोत्सव अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर उनके अनुयायियों एवं स्थानीय श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। जन्मोत्सव को केवल उत्सव तक सीमित न रखते हुए इसे समाजहित, प्रकृति संरक्षण और आध्यात्मिक जागरूकता से जोड़ने का प्रयास किया गया।
सुबह से ही आश्रम परिसर में श्रद्धालुओं का आगमन प्रारंभ हो गया था। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीहनुमान के दर्शन कर पूजा-अर्चना की तथा पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और राष्ट्र व समाज के कल्याण हेतु विशेष प्रार्थनाएं कीं। पूरे दिन आश्रम परिसर में भक्ति और आध्यात्मिकता का वातावरण बना रहा।
वृक्षारोपण कर दिया पर्यावरण संरक्षण का सशक्त संदेश
जन्मोत्सव के अवसर पर सबसे पहले पर्यावरण संरक्षण को समर्पित वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने इस अवसर को केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रखा बल्कि प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए विभिन्न प्रकार के पौधे रोपे।
इस दौरान त्रिवेणी के पौधों का विशेष रूप से रोपण किया गया। त्रिवेणी में परंपरागत रूप से पीपल, बरगद और नीम जैसे पौधों का धार्मिक एवं पर्यावरणीय महत्व माना जाता है। इन वृक्षों को भारतीय संस्कृति में जीवनदायिनी और पवित्र माना गया है। इनके साथ-साथ आम, जामुन, अमरूद सहित कई प्रकार के फलदार पौधे भी लगाए गए, ताकि आने वाले समय में यह क्षेत्र हरियाली से समृद्ध हो सके तथा पक्षियों और वन्य जीवों के लिए भी अनुकूल वातावरण तैयार हो।
श्रद्धालुओं ने संकल्प लिया कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी नियमित देखभाल, सिंचाई और संरक्षण भी सुनिश्चित किया जाएगा। उपस्थित लोगों ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है और प्रत्येक नागरिक को अपने जीवन में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए।
धार्मिक आस्था के साथ समाज को मिला सकारात्मक संदेश
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि धार्मिक आयोजन तभी सार्थक होते हैं जब वे समाज को सकारात्मक दिशा प्रदान करें। आज पर्यावरण प्रदूषण, जल संकट और जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर चुनौतियां पूरे विश्व के सामने हैं। ऐसे समय में यदि धार्मिक अवसरों को वृक्षारोपण जैसे जनहितकारी कार्यों से जोड़ा जाए तो समाज में व्यापक जागरूकता उत्पन्न की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति सदैव प्रकृति पूजन की परंपरा को महत्व देती आई है। वृक्षों को देवतुल्य माना गया है और उनके संरक्षण को पुण्य कार्य बताया गया है। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए जन्मोत्सव पर पौधारोपण का आयोजन किया गया, जिससे लोगों को प्रकृति संरक्षण का संदेश मिल सके।
रात्रि में हुआ भव्य सुंदरकांड पाठ
दिनभर चले विभिन्न कार्यक्रमों के बाद रात्रि के समय मारुति नंदन मंदिर परिसर में भव्य सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया गया। मंदिर परिसर को आकर्षक विद्युत सज्जा एवं फूलों से सजाया गया था। सुंदरकांड पाठ प्रारंभ होने से पहले भगवान श्रीहनुमान का विशेष पूजन-अर्चन किया गया तथा दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
सुंदरकांड के सामूहिक पाठ में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। पूरे वातावरण में श्रीराम और श्रीहनुमान के जयघोष गूंजते रहे। सुंदरकांड के प्रत्येक दोहे और चौपाई के साथ श्रद्धालु भक्ति में सराबोर दिखाई दिए। महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों तथा बच्चों ने भी पूरे उत्साह के साथ कार्यक्रम में भाग लिया।
भजन-कीर्तन एवं सुंदरकांड के पाठ के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीहनुमान से सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और आरोग्यता की कामना की। कार्यक्रम के अंत में सामूहिक आरती की गई, जिसमें उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धार्मिक वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया।

Bageshwar Baba Dhirendra Krishna Shastri की दीर्घायु और राष्ट्र कल्याण की गई प्रार्थना
सुंदरकांड पाठ के दौरान विशेष रूप से बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं निरंतर लोककल्याणकारी कार्यों के लिए ईश्वर से प्रार्थना की गई।
श्रद्धालुओं ने कहा कि पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अपने धार्मिक प्रवचनों एवं सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार के माध्यम से समाज में आध्यात्मिक जागरूकता उत्पन्न कर रहे हैं। उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए भक्तों ने उनके स्वस्थ एवं दीर्घ जीवन की कामना की ताकि वे इसी प्रकार समाज और राष्ट्र की सेवा करते रहें।
भक्ति और सेवा से ओतप्रोत रहा पूरा आयोजन
पूरे आयोजन के दौरान अनुशासन, सेवा और सहयोग की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी। आश्रम के स्वयंसेवकों ने कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से संचालित किया। श्रद्धालुओं के बैठने, पेयजल, प्रसाद वितरण तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखा गया।
कार्यक्रम में आए सभी श्रद्धालुओं का आत्मीय स्वागत किया गया। वातावरण पूरी तरह धार्मिक, शांत एवं भक्तिमय बना रहा। आश्रम परिसर में दिनभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहा और सभी ने इस आयोजन को सफल बनाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई।
युवाओं ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
आयोजन की विशेषता यह रही कि इसमें बड़ी संख्या में युवाओं ने बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई। युवाओं ने वृक्षारोपण अभियान में सक्रिय सहयोग किया तथा पौधों की सुरक्षा एवं नियमित देखभाल का संकल्प भी लिया।
इसके अतिरिक्त सुंदरकांड पाठ की तैयारियों, मंदिर सजावट, श्रद्धालुओं के स्वागत, पार्किंग व्यवस्था, साफ-सफाई तथा प्रसाद वितरण जैसी व्यवस्थाओं में भी युवाओं की भूमिका सराहनीय रही। इससे यह संदेश भी मिला कि धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में युवा पीढ़ी की भागीदारी समाज के लिए प्रेरणादायक है।
संत समाज और श्रद्धालुओं की रही गरिमामयी उपस्थिति
इस अवसर पर क्षेत्र के संत समाज, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। सभी ने मिलकर धार्मिक आयोजन को सफल बनाया और समाज में एकता, सद्भाव एवं सेवा का संदेश दिया।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं। जब विभिन्न वर्गों के लोग एक मंच पर आकर धार्मिक, सामाजिक एवं पर्यावरणीय कार्यों में भाग लेते हैं तो समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
इन श्रद्धालुओं ने निभाई प्रमुख भूमिका
इस आयोजन को सफल बनाने में देवगढ़ क्षेत्र के अनेक श्रद्धालुओं एवं कार्यकर्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इनमें प्रमुख रूप से पंडित चेतन गंगाधर शर्मा, मुकेश पाटीदार, रमेश सागरीय, मुकेश मंडलोई, महेश मंडलोई, वासुदेव, विट्ठल पाटीदार, अंबाराम पाटीदार, बद्रीलाल पाटीदार सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
सुंदरकांड टीम से घनश्याम पाटीदार, सुरेश पाटीदार, राहुल पाटीदार, संगम पाटीदार, अनिल तथा रघुनाथ भाई ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जन अभियान परिषद से सावन जाट सहित संत समाज एवं क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक भी आयोजन में शामिल हुए।
सामूहिक सहभागिता बनी आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता
पूरे कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह रही कि इसमें किसी एक व्यक्ति या संस्था की नहीं बल्कि पूरे समाज की सहभागिता देखने को मिली। सभी श्रद्धालुओं ने मिलकर आयोजन को सफल बनाया और यह संदेश दिया कि धार्मिक आयोजन तभी सफल माने जाते हैं जब उनमें समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता हो।
वृक्षारोपण से लेकर सुंदरकांड पाठ और प्रसाद वितरण तक प्रत्येक कार्य सामूहिक सहयोग और समर्पण की भावना से संपन्न हुआ। इससे समाज में एकता, भाईचारा और सेवा भाव को नई मजबूती मिली।
धर्म, प्रकृति और समाज सेवा का प्रेरणादायी उदाहरण
मारुति नंदन आश्रम देवगढ़ में आयोजित यह जन्मोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह धर्म, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रेरणादायी उदाहरण बनकर सामने आया। एक ओर जहां श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीहनुमान की भक्ति में सुंदरकांड का पाठ कर आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त की, वहीं दूसरी ओर वृक्षारोपण कर आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित भविष्य का संकल्प भी लिया।
आयोजन ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि धार्मिक आस्था के साथ यदि समाज सेवा और पर्यावरण संरक्षण को जोड़ा जाए तो ऐसे कार्यक्रम समाज के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होते हैं। श्रद्धालुओं ने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में भी इसी प्रकार के धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे, जिनसे समाज में सकारात्मक चेतना, नैतिक मूल्यों और प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूकता का विस्तार होगा।
रिपोर्ट : कौशिक पंडित कुशाग्र
दैनिक स्वराज वाणी
मनावर, जिला धार (मध्य प्रदेश)
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