गणाचार्य श्री 108 विरागसागर जी महाराज समाधि दिवस पर Indore में श्रद्धांजलि अर्पित की गई। वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. जैनेन्द्र जैन एवं धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने उनके संयम, साधना, गुरु-भक्ति और वात्सल्यपूर्ण जीवन को याद करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
गणाचार्य श्री 108 विरागसागर जी महाराज समाधि दिवस: भावपूर्ण श्रद्धांजलि, प्रेरणादायी जीवन को शत-शत नमन
Indore।
गणाचार्य श्री 108 विरागसागर जी महाराज समाधि दिवस के पावन अवसर पर श्रमण संस्कृति के महा महिम, आचार्य के आचार्य, पूज्य गणाचार्य श्री 108 विरागसागर जी महाराज को श्रद्धापूर्वक शत-शत नमन एवं कोटिशः वंदन अर्पित किया गया। उनके समाधि दिवस पर जैन समाज ने उनके त्याग, तप, संयम, साधना और गुरु-भक्ति से ओत-प्रोत जीवन को स्मरण करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
गणाचार्य श्री 108 विरागसागर जी महाराज समाधि दिवस पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
आज भी श्रद्धालुओं के लिए यह विश्वास करना कठिन प्रतीत होता है कि पूज्य गणाचार्य श्री 108 विरागसागर जी महाराज देह रूप में हमारे बीच नहीं हैं। उनका समाधि दिवस श्रद्धा, भक्ति एवं आत्मचिंतन का दिवस है। इस अवसर पर समाज के अनेक गणमान्य नागरिकों एवं श्रद्धालुओं ने उनके श्रीचरणों में विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।
इंदौर चातुर्मास की यादें आज भी हैं जीवंत
वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. जैनेन्द्र जैन ने कहा कि Indore नगर में संघ के चातुर्मास के दौरान पूज्य गणाचार्य श्री का वात्सल्यपूर्ण सान्निध्य आज भी समाज की स्मृतियों में जीवंत है। उनकी सरलता, सहजता, करुणा और स्नेहिल व्यवहार ने हर श्रद्धालु के हृदय पर अमिट छाप छोड़ी। इंदौर जैन समाज तथा छत्रपति नगर समाज आज भी उनके आशीर्वाद को अपनी सबसे बड़ी आध्यात्मिक पूंजी मानता है।
4 जुलाई 2023 की वह पीड़ादायक सुबह आज भी नहीं भूले श्रद्धालु
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि 4 जुलाई 2023 की प्रातः लगभग 2:30 बजे फोन के माध्यम से यह हृदय विदारक समाचार प्राप्त हुआ कि पूज्य गणाचार्य श्री 108 विरागसागर जी महाराज ने सल्लेखनापूर्वक समाधि धारण कर अपनी देह का परित्याग कर दिया है।उन्होंने कहा कि कुछ क्षणों तक तो इस समाचार पर विश्वास ही नहीं हुआ। पूरे समाज में शोक की लहर दौड़ गई और हर श्रद्धालु की आंखें नम हो गईं।
संयम, साधना और गुरु-भक्ति की सजीव प्रतिमूर्ति थे गणाचार्य श्री
डॉ. जैनेन्द्र जैन ने कहा कि गणाचार्य श्री 108 विरागसागर जी महाराज केवल एक महान संत ही नहीं थे, बल्कि वे संयम, साधना, तप, करुणा, वात्सल्य, गुरु-भक्ति और आत्मकल्याण की साक्षात प्रतिमूर्ति थे।उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन जैन धर्म के आदर्शों के अनुरूप व्यतीत किया। उनका प्रत्येक प्रवचन समाज को आत्मचिंतन, अहिंसा, क्षमा और आत्मकल्याण की ओर प्रेरित करता था।
हजारों आत्माओं को धर्ममार्ग पर किया प्रेरित
पूज्य गणाचार्य श्री ने अपने तप, त्याग और आध्यात्मिक साधना के माध्यम से असंख्य लोगों को धर्ममार्ग पर अग्रसर किया। उन्होंने सैकड़ों भव्य आत्माओं को दीक्षा देकर आध्यात्मिक जीवन की ओर प्रेरित किया।उनकी प्रेरणा से समाज में अनेक साधु-संतों का निर्माण हुआ, जिन्होंने आज भी जैन धर्म की परंपरा को आगे बढ़ाने का कार्य किया है।
पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जैसे महान संत समाज को दिए
समाज के लोगों ने कहा कि पूज्य गणाचार्य श्री 108 विरागसागर जी महाराज की सबसे बड़ी आध्यात्मिक उपलब्धियों में से एक यह रही कि उन्होंने समाज को पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज जैसे महान संत प्रदान किए, जो आज भी धर्म, संयम और आत्मकल्याण का संदेश जन-जन तक पहुंचा रहे हैं।
मोक्षमार्ग पर चलने की प्रेरणा
समाधि दिवस पर श्रद्धालुओं ने प्रार्थना की कि पूज्य गणाचार्य श्री द्वारा बताए गए संयम, साधना, तप और आत्मकल्याण के मार्ग पर चलकर प्रत्येक व्यक्ति अपना जीवन सफल बनाए तथा मोक्षमार्ग को प्रशस्त करे।
विनम्र श्रद्धासुमन
पूज्य गणाचार्य श्री 108 विरागसागर जी महाराज के श्रीचरणों में विनम्र श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए समाज ने कहा—“श्रमण संस्कृति के महा महिम, आचार्य के आचार्य, पूज्य गणाचार्य श्री 108 विरागसागर जी महाराज को समाधि दिवस पर शत-शत नमन, कोटिशः वंदन। उनका त्याग, तप, संयम और आध्यात्मिक जीवन सदैव समाज को प्रेरित करता रहेगा।”


