श्रुत पंचमी महापर्व आरकेपुरम दिगंबर जैन मंदिर Kota में प.पू. मुनि प्रणीत सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में भव्य आयोजन हुआ। 151 अर्घ्य, श्रुत स्कंध विधान, भक्तामर आराधना एवं धर्म प्रभावना ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
श्रुत पंचमी महापर्व आरकेपुरम दिगंबर जैन मंदिर Kota में हर्षोल्लास के साथ संपन्न
श्रुत पंचमी महापर्व का भव्य आयोजन
श्रुत पंचमी महापर्व आरकेपुरम दिगंबर जैन मंदिर Kota में शुक्रवार को अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं हर्षोल्लास के वातावरण में मनाया गया। परम पूज्य मुनि चिन्मय सागर जी महाराज (जंगल वाले बाबा) की मंगल प्रेरणा से निर्मित आरके पुरम स्थित मुनिसुव्रतनाथ दिगंबर जैन त्रिकाल चौबीसी मंदिर में आयोजित इस महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।यह आयोजन प. पू. मुनि प्रणीत सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में संपन्न हुआ, जिससे पूरे मंदिर परिसर में आध्यात्मिक ऊर्जा और धर्ममय वातावरण का संचार हुआ।
108 ऋद्धि मंत्रों के साथ अभिषेक एवं शांतिधारा
मंदिर समिति अध्यक्ष अंकित जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रातःकाल 108 ऋद्धि मंत्रों के साथ मूलनायक भगवान का अभिषेक किया गया। इसके पश्चात विश्व शांति, मानव कल्याण और सुख-समृद्धि की मंगल कामना के साथ शांतिधारा संपन्न हुई।श्रद्धालुओं ने भगवान के चरणों में नमन कर धर्म लाभ प्राप्त किया तथा पूरे वातावरण में भक्ति और श्रद्धा का अनुपम संगम देखने को मिला।
151 अर्घ्यों के साथ संगीतमय श्रुत पूजन
अभिषेक एवं शांतिधारा के पश्चात संगीतमय श्रुत पूजन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जैन धर्म के पूर्वाचार्यों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए 151 अर्घ्य समर्पित किए गए।श्रुत पंचमी का यह पर्व जैन आगम साहित्य एवं ज्ञान परंपरा के प्रति सम्मान व्यक्त करने का विशेष अवसर माना जाता है। श्रद्धालुओं ने भावपूर्वक पूजन कर धर्म आराधना की।
श्रुत स्कंध विधान में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
मंदिर समिति के कार्याध्यक्ष प्रकाश जैन ने बताया कि मध्याह्न में श्रुत स्कंध विधान का आयोजन किया गया। संगीत की सुमधुर धुनों के बीच संपन्न हुए इस विधान में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।पूजन, विधान और धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान श्रद्धालुओं की आस्था एवं समर्पण स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। पूरे आयोजन में अनुशासन एवं धार्मिक गरिमा का विशेष ध्यान रखा गया।
भक्तामर आराधना बनी विशेष आकर्षण
संयोजक पदम जैन ने बताया कि सायंकालीन सत्र में 48 पुण्यार्जक परिवारों द्वारा 48 ऋद्धि मंत्रों एवं 48 दीपकों के साथ स्वस्तिक आकार में संगीतमय भक्तामर आराधना की गई।यह आयोजन महोत्सव का प्रमुख आकर्षण रहा। दीपों की मनोहारी सज्जा, मंत्रोच्चार एवं भक्तिमय संगीत ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान की। उपस्थित श्रद्धालुओं ने इसे अत्यंत प्रेरणादायक और अविस्मरणीय आयोजन बताया।
20 दिनों से चल रहा मुनिसंघ का प्रवास
राष्ट्र गौरव पारस जैन “पार्श्वमणि” ने बताया कि प. पू. मुनि प्रणीत सागर महाराज एवं क्षुल्लक 105 विधेय सागर जी महाराज का पिछले 20 दिनों से आरके पुरम में प्रवास चल रहा है।मुनिसंघ के सानिध्य में निरंतर धर्म प्रभावना, प्रवचन, आराधना एवं आध्यात्मिक गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं, जिससे क्षेत्र में धार्मिक चेतना का विस्तार हो रहा है।
धर्म प्रभावना से भक्तों में उत्साह
श्रुत पंचमी महापर्व के इस भव्य आयोजन ने श्रद्धालुओं को धर्म, ज्ञान और साधना के महत्व से पुनः जोड़ने का कार्य किया। आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे और सभी ने धर्म आराधना कर पुण्य अर्जित किया।मुनिसंघ के सानिध्य में चल रही धर्म प्रभावना से श्रद्धालुओं में उत्साह का वातावरण बना हुआ है तथा आगामी दिनों में भी विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
