PM मोदी और Canada के प्रधानमंत्री Mark Carney की मुलाकात: व्यापार, रक्षा और ऊर्जा सहयोग पर बड़ा फोकस
G7 समिट के दौरान हुई अहम द्विपक्षीय बैठक
फ्रांस के एवियॉन में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई। इस मुलाकात में दोनों देशों ने अपने संबंधों को और मजबूत करने के लिए कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। खासकर रक्षा, व्यापार, ऊर्जा और तकनीकी सहयोग को नई दिशा देने पर दोनों नेताओं ने सहमति जताई।
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक और रणनीतिक साझेदारियों का महत्व तेजी से बढ़ रहा है। भारत और कनाडा दोनों ही देश अपने द्विपक्षीय संबंधों को नए स्तर पर ले जाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।
FTA और CEPA वार्ता को 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) और व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) रहा। दोनों नेताओं ने सहमति जताई कि इन वार्ताओं को वर्ष 2026 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा जाएगा।
इस समझौते के लागू होने से दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और सेवा क्षेत्र में बड़ा विस्तार होने की संभावना है। इससे न केवल आर्थिक सहयोग बढ़ेगा बल्कि रोजगार और तकनीकी साझेदारी को भी नई गति मिलेगी।
एक साल में चौथी मुलाकात, रिश्तों में मजबूती का संकेत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस मुलाकात को लेकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह एक साल से भी कम समय में उनकी चौथी मुलाकात है, जो भारत और कनाडा के बीच मजबूत होते संबंधों को दर्शाता है।
उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच कई क्षेत्रों में लगातार प्रगति हो रही है और भविष्य में यह साझेदारी और अधिक मजबूत होगी। यह बयान दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास और सहयोग को दर्शाता है।
विदेश मंत्रालय का आधिकारिक बयान
भारत के विदेश मंत्रालय ने भी इस बैठक को लेकर एक आधिकारिक बयान जारी किया। मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने व्यापार, ऊर्जा, नवाचार, शिक्षा और लोगों के बीच आपसी आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा की।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि CEPA वार्ता में अब तक हुई प्रगति पर दोनों पक्षों ने संतोष व्यक्त किया और इसे समयबद्ध तरीके से पूरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति
बैठक में यह भी तय किया गया कि भारत और कनाडा भविष्य में रक्षा उत्पादन, नवीकरणीय ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज और परमाणु ऊर्जा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करेंगे।
कनाडा के पास यूरेनियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों का बड़ा भंडार है, जबकि भारत तेजी से बढ़ती ऊर्जा जरूरतों के कारण इन संसाधनों का महत्वपूर्ण उपभोक्ता है। ऐसे में दोनों देशों के बीच यह सहयोग बेहद अहम माना जा रहा है।
पहले हुए समझौतों का भी उल्लेख
कनाडा के प्रधानमंत्री के हालिया भारत दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच यूरेनियम और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति को लेकर अहम समझौते हुए थे। इसके अलावा नवीकरणीय ऊर्जा, शिक्षा और तकनीकी सहयोग पर भी सहमति बनी थी।
दोनों देशों ने छोटे और मॉड्यूलर परमाणु रिएक्टर जैसे उभरते क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने का फैसला किया था, जो भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
भारत-कनाडा संबंधों में सुधार की दिशा
वर्ष 2023 में भारत और कनाडा के संबंधों में तनाव आ गया था, जब तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत की संभावित भूमिका का आरोप लगाया था। इस घटना के बाद दोनों देशों के संबंधों में गंभीर गिरावट देखी गई थी।
हालांकि, पिछले वर्ष मार्क कार्नी के प्रधानमंत्री बनने के बाद दोनों देशों ने संबंधों को सुधारने की दिशा में कदम बढ़ाए। लगातार संवाद और उच्च स्तरीय बैठकों के जरिए दोनों देशों के रिश्तों में सुधार देखा जा रहा है।
कूटनीतिक संतुलन और वैश्विक रणनीति
यह बैठक केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसे वैश्विक कूटनीति के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत वर्तमान में अपनी विदेश नीति में विविधीकरण और रणनीतिक साझेदारियों को मजबूत करने पर जोर दे रहा है।
वहीं कनाडा भी एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भारत को एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में देख रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच सहयोग का विस्तार वैश्विक संतुलन के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
निष्कर्ष
G7 शिखर सम्मेलन के दौरान हुई यह बैठक भारत और कनाडा के संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ती है। व्यापार, ऊर्जा और रक्षा जैसे क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग दोनों देशों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।
यदि FTA और CEPA वार्ताएं तय समय पर पूरी होती हैं, तो आने वाले वर्षों में भारत और कनाडा के बीच आर्थिक संबंध और भी मजबूत हो सकते हैं और यह साझेदारी वैश्विक मंच पर एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकती है।
