NCR में 1 अक्टूबर 2026 से लागू होगी ‘नो PUCC, नो फ्यूल’ नीति, बिना प्रदूषण प्रमाणपत्र वाले वाहनों को नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल
वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार का बड़ा कदम
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने एक महत्वपूर्ण और सख्त निर्णय लिया है। सरकार ने घोषणा की है कि 1 अक्टूबर 2026 से NCR के अंतर्गत आने वाले जिलों में ऐसे वाहनों को पेट्रोल और डीजल नहीं दिया जाएगा, जिनके पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (Pollution Under Control Certificate – PUCC) नहीं होगा। सरकार का मानना है कि इस कदम से वाहनों से होने वाले प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी आएगी और क्षेत्र की वायु गुणवत्ता में सुधार होगा।
यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब NCR क्षेत्र देश के सबसे अधिक प्रदूषित क्षेत्रों में शामिल है। हर वर्ष सर्दियों के मौसम में प्रदूषण का स्तर खतरनाक श्रेणी तक पहुंच जाता है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। सरकार ने वर्ष 2026 में वायु प्रदूषण के स्तर को 20 से 35 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य निर्धारित किया है और उसी दिशा में यह नई नीति लागू की जा रही है।
‘नो PUCC, नो फ्यूल’ नीति का उद्देश्य
सरकार द्वारा लागू की जा रही ‘नो PUCC, नो फ्यूल’ नीति का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सड़क पर चलने वाले सभी वाहन निर्धारित प्रदूषण मानकों का पालन करें। वर्तमान में बड़ी संख्या में ऐसे वाहन संचालित हो रहे हैं जिनके पास वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र नहीं है। ऐसे वाहन सामान्यतः अधिक धुआं छोड़ते हैं और वायु प्रदूषण बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
नई व्यवस्था के तहत यदि किसी वाहन चालक के पास वैध PUCC नहीं होगा तो उसे पेट्रोल पंप से ईंधन नहीं मिलेगा। इससे वाहन मालिकों को नियमित रूप से अपने वाहनों की प्रदूषण जांच कराने के लिए प्रेरित किया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि इस नीति से वाहन उत्सर्जन में कमी आएगी और वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में सुधार होगा।
उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में लिया गया फैसला
मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में वायु गुणवत्ता सुधार के लिए विभिन्न उपायों पर चर्चा की गई। बैठक में परिवहन, पर्यावरण, नगर विकास, औद्योगिक विकास और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों का विश्लेषण किया गया और पाया गया कि वाहनों से निकलने वाला धुआं NCR क्षेत्र में प्रदूषण का एक प्रमुख कारण है। इसी को ध्यान में रखते हुए बिना वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र वाले वाहनों को ईंधन न देने का निर्णय लिया गया।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें और निर्धारित समयसीमा के भीतर आवश्यक तैयारियां पूरी करें।
1041 पेट्रोल पंपों पर लगाए जाएंगे ANPR कैमरे
नई नीति को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए सरकार तकनीकी सहायता का भी उपयोग करेगी। इसके तहत NCR क्षेत्र के 1,041 पेट्रोल पंपों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे लगाए जाएंगे।
ये कैमरे वाहनों की नंबर प्लेट को स्वतः स्कैन करेंगे और संबंधित डाटाबेस से जानकारी प्राप्त करेंगे। इसके माध्यम से यह पता लगाया जाएगा कि वाहन के पास वैध PUCC है या नहीं। यदि वाहन का प्रदूषण प्रमाणपत्र समाप्त हो चुका है या उपलब्ध नहीं है, तो सिस्टम के माध्यम से इसकी जानकारी पेट्रोल पंप संचालक को मिल जाएगी और ऐसे वाहन को ईंधन देने से रोका जा सकेगा।
सरकार का मानना है कि तकनीक के उपयोग से नियमों का पालन अधिक प्रभावी तरीके से कराया जा सकेगा तथा मानव हस्तक्षेप की आवश्यकता भी कम होगी।
वायु प्रदूषण कम करने के लिए विभागों को विशेष निर्देश
मुख्य सचिव ने समीक्षा बैठक के दौरान सभी संबंधित विभागों को प्रदूषण नियंत्रण के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि केवल सरकारी प्रयासों से ही प्रदूषण की समस्या का समाधान संभव नहीं है, बल्कि इसमें नागरिकों की भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
उन्होंने अधिकारियों को व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए ताकि लोग प्रदूषण नियंत्रण के महत्व को समझें और अपने वाहनों की नियमित जांच कराएं। साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया कि लोगों को PUCC प्राप्त करने में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों की विस्तृत समीक्षा
समीक्षा बैठक में केवल वाहन प्रदूषण ही नहीं बल्कि अन्य स्रोतों से होने वाले प्रदूषण की भी विस्तृत समीक्षा की गई। अधिकारियों ने औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले उत्सर्जन, निर्माण एवं विध्वंस कार्यों से उत्पन्न धूल, सड़कों पर जमा धूल, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, हरित क्षेत्र विस्तार तथा पराली जलाने जैसी समस्याओं पर चर्चा की।
विशेषज्ञों का मानना है कि NCR में प्रदूषण एक बहुआयामी समस्या है, इसलिए इसके समाधान के लिए भी बहुस्तरीय रणनीति की आवश्यकता है। इसी कारण सरकार विभिन्न विभागों के माध्यम से अलग-अलग क्षेत्रों में लक्षित कार्रवाई करने की योजना बना रही है।
पुराने और प्रदूषणकारी वाहनों पर सरकार की नजर
सरकारी आंकड़ों के अनुसार NCR के जिलों में लगभग 26.19 लाख वाहन ऐसे हैं जो अपनी निर्धारित आयु पूरी कर चुके हैं। इन वाहनों से प्रदूषण का स्तर अधिक होता है और ये पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं।
जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच 37,156 पुराने वाहनों को स्क्रैप किया गया है, जबकि 460 वाहनों को जब्त किया गया। सरकार अब ऐसे वाहनों की पहचान कर उन्हें चरणबद्ध तरीके से सड़क से हटाने की योजना पर काम कर रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पुराने वाहनों को हटाने और स्वच्छ ईंधन आधारित वाहनों को बढ़ावा देने से प्रदूषण नियंत्रण में उल्लेखनीय सफलता मिल सकती है।
‘नया सफर’ योजना के तहत स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा
राज्य सरकार ने स्वच्छ परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए ‘नया सफर’ योजना को प्राथमिकता दी है। इस योजना के अंतर्गत BS-VI मानक वाले वाहन, CNG वाहन और इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन दिया जाएगा।
सरकार का उद्देश्य है कि आने वाले वर्षों में पारंपरिक ईंधन आधारित वाहनों की संख्या कम हो और उनकी जगह कम प्रदूषण फैलाने वाले आधुनिक वाहन लें। इसके लिए विभिन्न प्रकार की प्रोत्साहन योजनाओं और सुविधाओं पर भी विचार किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों और CNG आधारित परिवहन को बढ़ावा देना वायु प्रदूषण कम करने की दिशा में एक प्रभावी कदम साबित हो सकता है।
सार्वजनिक परिवहन में इलेक्ट्रिक बसों का विस्तार
प्रदूषण नियंत्रण और बेहतर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के लिए सरकार ने गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और मेरठ में 975 इलेक्ट्रिक बसें संचालित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
वर्तमान समय में इन शहरों में लगभग 100 ई-बसें संचालित हो रही हैं। सरकार का मानना है कि इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ने से निजी वाहनों पर निर्भरता कम होगी, जिससे सड़कों पर वाहनों की संख्या घटेगी और प्रदूषण में भी कमी आएगी।
ई-बसें न केवल पर्यावरण के लिए अनुकूल हैं, बल्कि यात्रियों को आधुनिक और आरामदायक परिवहन सुविधा भी प्रदान करती हैं। आने वाले समय में इन बसों का नेटवर्क और अधिक विस्तारित किए जाने की योजना है।
स्वास्थ्य पर प्रदूषण के प्रभाव को लेकर चिंता
विशेषज्ञों के अनुसार NCR में बढ़ता वायु प्रदूषण लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। प्रदूषित हवा के कारण अस्थमा, फेफड़ों की बीमारियां, हृदय रोग और अन्य श्वसन संबंधी समस्याओं के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है।
बच्चे, बुजुर्ग और पहले से बीमार लोग प्रदूषण के प्रभाव से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। ऐसे में सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों को सार्वजनिक स्वास्थ्य की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जनभागीदारी होगी सफलता की कुंजी
निष्कर्ष
1 अक्टूबर 2026 से लागू होने जा रही ‘नो PUCC, नो फ्यूल’ नीति उत्तर प्रदेश सरकार की वायु प्रदूषण नियंत्रण रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। पेट्रोल पंपों पर ANPR कैमरों की स्थापना, पुराने वाहनों पर कार्रवाई, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा, सार्वजनिक परिवहन का विस्तार और व्यापक जनजागरूकता अभियान जैसे कदम NCR की वायु गुणवत्ता सुधारने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। सरकार को उम्मीद है कि इन प्रयासों के माध्यम से प्रदूषण स्तर में उल्लेखनीय कमी आएगी और क्षेत्र के करोड़ों लोगों को स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराया जा सकेगा।
