Sankashti Chaturthi 3 जून 2026: अधिकमास में पड़ने वाली यह दुर्लभ तिथि क्यों है अत्यंत खास,
Sankashti Chaturthi हिंदू धर्म में भगवान गणेश को समर्पित एक अत्यंत पावन व्रत माना जाता है। यह हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन के सभी प्रकार के विघ्न, बाधाएं और कष्ट दूर हो जाते हैं तथा सुख, समृद्धि और सफलता प्राप्त होती है।
लेकिन वर्ष 3 जून 2026 को आने वाली संकष्टी चतुर्थी सामान्य नहीं है। यह चतुर्थी इसलिए विशेष मानी जा रही है क्योंकि यह अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) के दौरान पड़ रही है। इस दुर्लभ संयोग के कारण इस तिथि का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व कई गुना बढ़ जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन की गई पूजा और व्रत का फल सामान्य दिनों की तुलना में बहुत अधिक प्राप्त होता है।
अधिकमास और संकष्टी चतुर्थी का दुर्लभ संयोग
हिंदू पंचांग के अनुसार, अधिकमास लगभग तीन वर्षों में एक बार आता है। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, क्योंकि यह भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। यह एक अतिरिक्त मास होता है, जो चंद्र और सौर कैलेंडर के अंतर को संतुलित करने के लिए जोड़ा जाता है।
इस पवित्र मास में धार्मिक कार्य, जप, तप, व्रत और पूजा का विशेष महत्व होता है। ऐसे समय में जब संकष्टी चतुर्थी जैसी पवित्र तिथि आती है, तो उसका प्रभाव और भी अधिक शुभ माना जाता है।
ज्योतिषाचार्य पंडित रामगोविंद शास्त्री के अनुसार, अधिकमास में भगवान गणेश की आराधना करने से भक्त को कई गुना फल प्राप्त होता है और जीवन में आने वाली बाधाएं स्वतः ही कम होने लगती हैं।
Sankashti Chaturthi का धार्मिक महत्व
संकष्टी चतुर्थी का अर्थ होता है—“कष्टों को हरने वाली चतुर्थी”। इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में आने वाली सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं।
भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है, अर्थात वे सभी प्रकार के विघ्नों को समाप्त करने वाले देवता हैं। यही कारण है कि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले उनकी पूजा की जाती है।
इस दिन व्रत रखने वाले भक्त चंद्र दर्शन के बाद अपना व्रत खोलते हैं। यह परंपरा विशेष रूप से मानसिक शांति, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने के लिए मानी जाती है।
अधिकमास में पूजा का महत्व
अधिकमास को अत्यंत पुण्यकारी समय माना गया है। इस मास में किया गया कोई भी धार्मिक कार्य कई गुना फल देता है। शास्त्रों के अनुसार, इस मास में किए गए दान, जप और व्रत सीधे मोक्ष और पुण्य प्रदान करते हैं।
इस दौरान भगवान गणेश की पूजा करना विशेष रूप से लाभकारी माना गया है, क्योंकि गणेश जी बुद्धि, ज्ञान और सफलता के देवता हैं। अधिकमास में उनकी आराधना करने से व्यक्ति के जीवन में स्थिरता आती है और कार्यों में आने वाली बाधाएं समाप्त होती हैं।
चंद्र दोष और ज्योतिषीय प्रभाव
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा करने से चंद्र दोष का प्रभाव कम होता है।
जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा कमजोर होता है, उन्हें मानसिक तनाव, अस्थिरता, भय, निर्णय क्षमता की कमी और भावनात्मक असंतुलन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में इस दिन व्रत और पूजा करने से विशेष लाभ मिलता है।
पंडितों के अनुसार, भगवान गणेश की कृपा से चंद्र दोष शांत होता है और व्यक्ति के जीवन में मानसिक स्थिरता, शांति और आत्मविश्वास बढ़ता है।
संकष्टी चतुर्थी पर पूजा विधि
इस दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। घर या मंदिर में भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाकर पूजा की जाती है।
पूजा में गणेश जी को दूर्वा, मोदक, लाल फूल और सिंदूर अर्पित किया जाता है। इसके बाद गणेश मंत्रों का जाप किया जाता है।
शाम के समय चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत खोला जाता है। चंद्र दर्शन के समय जल अर्पित करना भी शुभ माना जाता है।
विशेष उपाय जो कष्टों को दूर करते हैं
इस संकष्टी चतुर्थी पर कुछ विशेष उपाय करने से जीवन की समस्याएं कम होती हैं और सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं।
1. गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ
इस दिन गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ अत्यंत शुभ माना जाता है। यह पाठ बुद्धि, स्मरण शक्ति और एकाग्रता को बढ़ाता है।
2. बच्चों के लिए विशेष उपाय
जिन बच्चों का मन पढ़ाई में नहीं लगता या जिनकी एकाग्रता कमजोर है, उन्हें इस रात भगवान गणेश की पूजा में शामिल करना चाहिए। इससे उनका मन शांत होता है और सीखने की क्षमता बढ़ती है।
3. दीपदान और मोदक अर्पण
इस दिन गणेश जी को मोदक का भोग लगाना और दीपदान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे घर में सुख-समृद्धि आती है।
4. “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र जाप
इस मंत्र का जाप करने से जीवन के सभी विघ्न दूर होते हैं और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।
छात्रों और परिवारों के लिए महत्व
यह संकष्टी चतुर्थी विशेष रूप से छात्रों के लिए अत्यंत लाभकारी मानी जाती है। माता-पिता अपने बच्चों को इस दिन पूजा में शामिल कर सकते हैं ताकि उनमें सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास का विकास हो।
परिवार के सभी सदस्यों द्वारा सामूहिक रूप से पूजा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि का वातावरण बनता है।
सामाजिक और आध्यात्मिक महत्व
संकष्टी चतुर्थी केवल व्यक्तिगत पूजा का दिन नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और आध्यात्मिक एकता का भी प्रतीक है। इस दिन मंदिरों में सामूहिक पूजा और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है।
अधिकमास में इस प्रकार के धार्मिक आयोजन और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाते हैं, क्योंकि यह समय आध्यात्मिक साधना के लिए श्रेष्ठ माना गया है।
निष्कर्ष
3 जून 2026 को आने वाली संकष्टी चतुर्थी एक अत्यंत दुर्लभ और शुभ संयोग है क्योंकि यह अधिकमास में पड़ रही है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो मानसिक तनाव, बाधाओं या कार्यों में रुकावट का सामना कर रहे हैं। श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई पूजा निश्चित रूप से सकारात्मक परिणाम देती है।
अतः भक्तों को सलाह दी जाती है कि वे इस पावन अवसर पर व्रत, पूजा, मंत्र जाप और विशेष उपायों को अपनाकर भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करें और अपने जीवन को सफल एवं सुखमय बनाएं।
