—Advertisement—

Ujjain: भांग, त्रिपुंड और त्रिशूल से सजा बाबा महाकाल का दिव्य स्वरूप, भस्म आरती में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब

Author Picture
Published On: 1 June 2026
Ujjain
— उज्जैन श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का भांग, त्रिपुंड और त्रिशूल से सजा दिव्य स्वरूप देखने को मिला

—Advertisement—

Ujjain: भांग, त्रिपुंड और त्रिशूल से सजा बाबा महाकाल का दिव्य स्वरूप, भस्म आरती में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब

विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर, Ujjain में सोमवार की सुबह एक बार फिर आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। ज्येष्ठ अधिकमास कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा के अवसर पर बाबा महाकाल की भस्म आरती का आयोजन भव्य रूप से किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया।

रविवार देर रात से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें मंदिर परिसर में लगनी शुरू हो गई थीं। भक्त अपने आराध्य के दिव्य दर्शन पाने के लिए पूरी रात जागते रहे। जैसे ही सुबह 4 बजे मंदिर के पट खुले, पूरा वातावरण “जय श्री महाकाल” के जयघोष से गूंज उठा।

सुबह 4 बजे जागे बाबा महाकाल, शुरू हुई भस्म आरती

परंपरा के अनुसार आज बाबा महाकाल सुबह 4 बजे भक्तों को दर्शन देने के लिए जागे। इसके बाद वीरभद्र भगवान से अनुमति लेकर मंदिर के पट खोले गए। गर्भगृह में विराजमान सभी देव प्रतिमाओं का विधिवत पूजन-अर्चन किया गया।

इसके पश्चात भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया, जिसमें दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत और विभिन्न फलों के रस का उपयोग किया गया। इस दौरान हरिओम जल अर्पित कर प्रथम घंटा बजाया गया, जिससे वातावरण भक्तिमय हो उठा।

भव्य शृंगार में सजा महाकाल का अलौकिक स्वरूप

Ujjain भस्म आरती से पहले पुजारियों और पुरोहितों ने बाबा महाकाल का अत्यंत दिव्य और आकर्षक शृंगार किया। कपूर आरती के बाद भगवान को नवीन मुकुट धारण कराया गया।

इस बार के शृंगार की विशेषता यह रही कि बाबा महाकाल को भांग, त्रिपुंड और त्रिशूल से अलंकृत किया गया। साथ ही उनके स्वरूप में भगवा ध्वज और ‘ॐ’ का प्रतीक भी आकर्षण का केंद्र रहा।

शृंगार के बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से शिवलिंग पर भस्म अर्पित की गई। इसके बाद झांझ, मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद के बीच भस्म आरती संपन्न हुई।

श्रद्धालुओं की भारी भीड़, मंदिर परिसर गूंज उठा जयकारों से

Ujjain भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। हजारों की संख्या में आए भक्तों ने बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया।

भक्तों का कहना था कि बाबा महाकाल का यह रूप अत्यंत अलौकिक और दिव्य था, जिसे देखकर मन को असीम शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त हुई। पूरा मंदिर परिसर “जय श्री महाकाल” के उद्घोष से गूंजता रहा।

Ujjain भस्म आरती का धार्मिक महत्व

मान्यता है कि भस्म अर्पित करने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यह भस्म आरती विश्व में अनोखी मानी जाती है, जो प्रतिदिन प्रातःकाल मंदिर में संपन्न होती है।

इस आरती में शामिल होना श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत सौभाग्य की बात मानी जाती है। यही कारण है कि देश-विदेश से भक्त इस दिव्य क्षण का अनुभव करने उज्जैन पहुंचते हैं।

महानिर्वाणी अखाड़े की विशेष भूमिका

Ujjain भस्म आरती में महानिर्वाणी अखाड़े की भूमिका विशेष रहती है। परंपरा के अनुसार अखाड़े की ओर से ही शिवलिंग पर भस्म अर्पित की जाती है। इसके बाद पूरी आरती विधिवत संपन्न होती है।

इस प्रक्रिया के दौरान मंदिर में ढोल-नगाड़ों, शंख और घंटियों की ध्वनि से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है।

पुजारी ने दी जानकारी, विधिवत संपन्न हुई आरती

श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि आज की भस्म आरती ज्येष्ठ अधिकमास कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा के अवसर पर प्रातः 4 बजे शुरू हुई और लगभग 6 बजे तक चली।

उन्होंने बताया कि पहले भगवान महाकाल का पंचामृत से अभिषेक किया गया, फिर विशेष शृंगार के बाद भस्म अर्पित की गई। इसके बाद भक्तों को दिव्य दर्शन का अवसर मिला।

आरती का समय और विशेष व्यवस्था

मंदिर प्रशासन द्वारा आरतियों का समय निर्धारित किया गया है, जो आश्विन मास की पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा) तक लागू रहेगा।

  • भस्म आरती: सुबह 4:00 से 6:00 बजे तक
  • दध्योदक आरती: सुबह 7:00 से 7:45 बजे तक
  • भोग आरती: सुबह 10:00 से 10:45 बजे तक
  • संध्या पूजन: शाम 5:00 से 5:45 बजे तक
  • संध्या आरती: शाम 7:00 से 7:45 बजे तक
  • शयन आरती: रात 10:30 से 11:00 बजे तक

मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्था भी की है, ताकि सभी भक्त सुगमता से दर्शन कर सकें।

Ujjain में बढ़ता श्रद्धा का सैलाब

Ujjain स्थित महाकालेश्वर मंदिर में हर दिन हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन विशेष तिथियों और पर्वों पर यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ज्येष्ठ अधिकमास की प्रतिपदा पर भी यही दृश्य देखने को मिला, जहां श्रद्धा और भक्ति का अनूठा संगम दिखाई दिया।

निष्कर्ष

बाबा महाकाल की भस्म आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम है। भांग, त्रिपुंड और त्रिशूल से सजा उनका दिव्य स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए आस्था और विश्वास का केंद्र बना रहा।

Ujjain का श्री महाकालेश्वर मंदिर एक बार फिर यह साबित करता है कि यहां हर सुबह सिर्फ आरती नहीं होती, बल्कि आस्था स्वयं भगवान के स्वरूप में प्रकट होती है।

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp