ट्रंप के 25% टैरिफ के बाद अमेरिका–यूरोपीय संघ व्यापार तनाव बढ़ा, EU ने दी कड़ी चेतावनी
यूरोपीय संघ (EU) ने कहा है कि यदि अमेरिका साझा व्यापार समझौते के विपरीत कोई कदम उठाता है, तो वह अपने हितों की रक्षा के लिए “सभी विकल्प खुले” रखेगा। यह प्रतिक्रिया शनिवार (2 मई 2026) को आई, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोपीय संघ से आयात होने वाली कारों और ट्रकों पर टैरिफ बढ़ाकर 25 प्रतिशत करने की घोषणा की।
यूरोपीय आयोग के प्रवक्ता ने कहा कि EU एक स्थिर और पारस्परिक रूप से लाभकारी ट्रांस-अटलांटिक व्यापार संबंध बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, लेकिन यदि अमेरिका संयुक्त समझौते के अनुरूप कार्य नहीं करता है, तो यूरोपीय संघ अपने हितों की रक्षा के लिए आवश्यक सभी कदम उठाएगा।
प्रवक्ता ने कहा, “हम एक स्थिर और परस्पर लाभकारी ट्रांस-अटलांटिक संबंध के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं, लेकिन यदि अमेरिका संयुक्त बयान के अनुरूप कार्य नहीं करता, तो हम अपने हितों की रक्षा के लिए सभी विकल्प खुले रखेंगे।”
EU ने यह भी स्पष्ट किया कि वह पिछले वर्ष हुए व्यापार समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को सामान्य विधायी प्रक्रिया के अनुसार लागू कर रहा है। साथ ही, यूरोपीय संघ अमेरिकी प्रशासन को लगातार इसकी जानकारी दे रहा है और समझौते के क्रियान्वयन को लेकर स्पष्टता भी मांग रहा है।
पिछले व्यापार समझौते की पृष्ठभूमि
पिछले वर्ष हुए समझौते के अनुसार, यूरोपीय संघ ने अमेरिकी औद्योगिक उत्पादों पर टैरिफ हटाने और कृषि एवं खाद्य उत्पादों के लिए टैरिफ-रेट कोटा लागू करने पर सहमति जताई थी। इसके बदले में अमेरिका ने अधिकांश यूरोपीय उत्पादों पर 15 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने का वादा किया था।
ट्रंप का टैरिफ बढ़ाने का फैसला
डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को घोषणा की कि उन्होंने यूरोपीय संघ से आने वाली कारों और ट्रकों पर टैरिफ बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यूरोपीय संघ मौजूदा व्यापार समझौते का पालन नहीं कर रहा है।
मरीन वन से रवाना होने से पहले ट्रंप ने कहा, “हमने यूरोपीय संघ से आने वाली कारों पर टैरिफ बढ़ाया है क्योंकि वे हमारे व्यापार समझौते का पालन नहीं कर रहे थे। यह अमेरिका के लिए अरबों डॉलर लेकर आएगा और कंपनियों को उत्पादन अमेरिका में स्थानांतरित करने के लिए मजबूर करेगा।”
उन्होंने यह भी दावा किया कि इस कदम का उद्देश्य वैश्विक वाहन निर्माताओं को अमेरिका में निवेश बढ़ाने के लिए प्रेरित करना है। ट्रंप के अनुसार, वर्तमान में अमेरिका में 100 अरब डॉलर से अधिक के ऑटोमोबाइल प्लांट्स निर्माणाधीन हैं, जो एक रिकॉर्ड स्तर है। इसमें जापान, दक्षिण कोरिया, कनाडा और मैक्सिको से आने वाला निवेश भी शामिल है।
व्यापार तनाव में बढ़ोतरी
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार तनाव को और बढ़ा सकता है, खासकर ऑटोमोबाइल सेक्टर में, जो लंबे समय से दोनों पक्षों के बीच विवाद का प्रमुख कारण रहा है।
यदि यह विवाद और बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और आर्थिक स्थिरता पर भी पड़ सकता है। ऑटोमोबाइल उद्योग, जो अंतरराष्ट्रीय उत्पादन नेटवर्क पर अत्यधिक निर्भर है, इस विवाद से सबसे अधिक प्रभावित हो सकता है।
वर्तमान स्थिति में दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं, जिससे आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या कूटनीतिक वार्ता के जरिए इस व्यापार विवाद को टाला जा सकता है या यह एक बड़े आर्थिक टकराव का रूप लेता है।
इस पूरे घटनाक्रम ने वैश्विक व्यापार व्यवस्था में अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसे दो बड़े आर्थिक ब्लॉकों के बीच टैरिफ युद्ध केवल इन दोनों क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर एशिया, अफ्रीका और वैश्विक बाजारों पर भी देखने को मिलेगा। ऑटोमोबाइल उद्योग, जो पहले से ही इलेक्ट्रिक वाहनों और सप्लाई चेन बदलावों के दौर से गुजर रहा है, इस टैरिफ वृद्धि से और अधिक दबाव में आ सकता है। इससे उत्पादन लागत बढ़ने, निर्यात प्रभावित होने और उपभोक्ता कीमतों में वृद्धि की आशंका जताई जा रही है। कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां अब अपने निवेश और उत्पादन रणनीतियों पर पुनर्विचार करने को मजबूर हो सकती हैं। वहीं, आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि दोनों पक्ष जल्द किसी समझौते पर नहीं पहुंचते, तो यह विवाद वैश्विक आर्थिक विकास की गति को भी धीमा कर सकता है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रणाली में अस्थिरता बढ़ा सकता है।
