US-Israel vs Iran War Live Updates | 25 April 2026
US–Iran : मध्य-पूर्व में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है, जहां ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष अब और गंभीर मोड़ ले चुका है। इजरायल की भूमिका के साथ यह टकराव अब व्यापक क्षेत्रीय संकट में बदलता दिख रहा है। दोनों देशों के बीच शांति वार्ता के प्रयासों के बावजूद स्थिति अभी भी अस्थिर बनी हुई है।
US–Iran के बीच तनाव चरम पर
ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद ने अब युद्ध जैसी स्थिति का रूप ले लिया है। ईरान ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वह आतंकवाद और हिंसा को बढ़ावा दे रहा है। इस बयान ने कूटनीतिक माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है।
दूसरी ओर अमेरिका की ओर से भी कड़ा रुख अपनाया गया है और क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों को बढ़ाया गया है। इस संघर्ष में इजरायल भी सक्रिय भूमिका में नजर आ रहा है, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है।
शांति वार्ता की पहली कोशिश विफल
दोनों देशों के बीच हुई पहली शांति वार्ता पूरी तरह असफल रही। हालांकि तनाव को कम करने के लिए दो बार सीजफायर बढ़ाया गया, लेकिन जमीनी स्तर पर हिंसा और सैन्य गतिविधियां जारी रहीं।
कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, दोनों पक्षों में भरोसे की भारी कमी है, जिसके कारण बातचीत आगे नहीं बढ़ पा रही है।
इजरायल की युद्ध तैयारी की पुष्टि
इस पूरे घटनाक्रम के बीच इजरायल के रक्षा मंत्री ने यह स्पष्ट किया है कि देश किसी भी स्थिति के लिए तैयार है और जरूरत पड़ने पर युद्ध दोबारा शुरू किया जा सकता है। इस बयान ने क्षेत्र में चिंता और बढ़ा दी है।
इजरायल की यह रणनीति संकेत देती है कि संघर्ष केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब इसमें कई क्षेत्रीय शक्तियां शामिल हो चुकी हैं।
25 अप्रैल को दूसरे दौर की बातचीत संभव
आज 25 अप्रैल को इस संकट को लेकर दूसरे दौर की बातचीत होने की संभावना जताई जा रही है। यह वार्ता पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पहले दौर की बातचीत विफल हो चुकी है।
कूटनीतिक स्तर पर उम्मीद की जा रही है कि इस बार कुछ सकारात्मक परिणाम निकल सकते हैं, हालांकि हालात अभी भी अनिश्चित बने हुए हैं।
ईरानी विदेश मंत्री इस्लामाबाद पहुंचे
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची शुक्रवार रात इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब क्षेत्र में कूटनीतिक हलचल तेज है और शांति प्रयासों को लेकर लगातार बैठकें चल रही हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान इस वार्ता का एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ केंद्र बनकर उभर रहा है।
अमेरिका की ओर से वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल
अमेरिका की तरफ से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और अपने दामाद जेरेड कुशनर को बातचीत के लिए भेजा है। माना जा रहा है कि ये दोनों आज पाकिस्तान पहुंच सकते हैं और दूसरे दौर की बातचीत में शामिल होंगे।
इन दोनों प्रतिनिधियों की मौजूदगी को अमेरिका की गंभीर कूटनीतिक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
उपराष्ट्रपति JD वेंस स्टैंडबाय पर
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस बार पाकिस्तान नहीं गए हैं, लेकिन उन्हें स्टैंडबाय पर रखा गया है। यदि स्थिति और बिगड़ती है, तो उन्हें तुरंत इस्लामाबाद भेजा जा सकता है।
यह संकेत देता है कि अमेरिका स्थिति को बेहद गंभीरता से देख रहा है और किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार है।
ईरानी संसद नेतृत्व बैठक में अनुपस्थित
ईरान की ओर से संसद स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ इस बार की बातचीत में शामिल नहीं हो रहे हैं। जबकि वे पहले दौर की वार्ता में ईरानी डेलिगेशन का नेतृत्व कर चुके थे।
उनकी अनुपस्थिति को लेकर राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं, हालांकि आधिकारिक तौर पर इसका कारण स्पष्ट नहीं किया गया है।
क्षेत्रीय तनाव और वैश्विक चिंता
इस पूरे संघर्ष ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। तेल बाजार, सुरक्षा स्थिति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर इसका सीधा असर देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और बढ़ता है तो यह पूरे मध्य-पूर्व क्षेत्र को अस्थिर कर सकता है।
आगे की स्थिति पर नजर
अब सभी की नजर 25 अप्रैल को होने वाली संभावित बातचीत पर टिकी हुई है। यह वार्ता यह तय करेगी कि तनाव कम होगा या संघर्ष और बढ़ेगा।
कूटनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय सबसे जरूरी है कि दोनों पक्ष बातचीत को प्राथमिकता दें और सैन्य टकराव से बचें।
निष्कर्ष
ईरान और अमेरिका के बीच जारी यह संघर्ष अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें इजरायल और अन्य क्षेत्रीय शक्तियां भी शामिल हो चुकी हैं। Donald Trump के विशेष दूतों की मौजूदगी और Abbas Araghchi की इस्लामाबाद यात्रा इस बात का संकेत है कि कूटनीतिक प्रयास अभी भी जारी हैं।
हालांकि स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है और आने वाले कुछ घंटे या दिन इस पूरे संघर्ष की दिशा तय कर सकते हैं।
