Ujjain : भस्म आरती में दिव्य श्रृंगार से सजे बाबा महाकाल, हजारों श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
भोर में खुलते ही मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब
मध्य प्रदेश के Ujjain स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार, 14 अप्रैल को वैसाख कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि पर भस्म आरती का भव्य आयोजन हुआ। तड़के सुबह से ही मंदिर परिसर में हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। भक्त देर रात से कतारों में लगकर अपने आराध्य भगवान महाकाल के दर्शन के लिए बेसब्री से इंतजार करते रहे। जैसे ही मंदिर के पट खुले, पूरा वातावरण ‘जय श्री महाकाल’ के जयघोष से गूंज उठा।
विधि-विधान से हुआ जलाभिषेक और पूजन
सुबह लगभग 4 बजे भगवान महाकाल का जागरण किया गया, जिसके बाद पूजा-अर्चना की शुरुआत हुई। पुजारियों ने दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत और फलों के रस से भगवान का अभिषेक किया। ‘हरि ओम’ के मंत्रोच्चार के साथ प्रथम घंटा बजाया गया और पूरी श्रद्धा के साथ पूजन संपन्न हुआ।
मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा के अनुसार, भस्म आरती से पहले वीरभद्र जी से आज्ञा लेने की परंपरा निभाई जाती है। इसके बाद गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का विधिपूर्वक पूजन किया गया।
भांग से विशेष श्रृंगार, त्रिपुंड और त्रिशूल से सजा स्वरूप
इस दिन बाबा महाकाल का विशेष और आकर्षक श्रृंगार किया गया। भगवान के मस्तक पर त्रिपुंड और चंद्र के साथ त्रिशूल अंकित किया गया। साथ ही भांग से अलंकृत कर उनका दिव्य रूप सजाया गया, जिसने भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। जैसे ही भगवान का यह अलौकिक स्वरूप सामने आया, श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर जयकारे लगाए।
महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म अर्पण
श्रृंगार के बाद महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा शिवलिंग पर भस्म अर्पित की गई। यह भस्म आरती महाकाल मंदिर की सबसे विशेष परंपराओं में से एक है। झांझ, मंजीरे, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के बीच यह आरती संपन्न हुई, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल अपने निराकार स्वरूप से साकार रूप में प्रकट होकर भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि इस आरती को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।
Ujjain आरती के दौरान गूंजे ‘जय श्री महाकाल’ के जयघोष
पूरे मंदिर परिसर में भक्ति का अद्भुत माहौल देखने को मिला। हजारों श्रद्धालु हाथ जोड़कर भगवान के दर्शन करते नजर आए। ‘जय श्री महाकाल’ के जयघोष, शंखनाद और घंटियों की ध्वनि से वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। भक्तों ने भगवान से सुख-समृद्धि और मंगल की कामना की।
आरती के निर्धारित समय में हुआ बदलाव
मंदिर प्रशासन द्वारा आरतियों के समय तय किए गए हैं, जो इस प्रकार हैं—
- भस्म आरती: सुबह 4:00 से 6:00 बजे तक
- दद्योदक आरती: सुबह 7:00 से 7:45 बजे तक
- भोग आरती: सुबह 10:00 से 10:45 बजे तक
- संध्या पूजन: शाम 5:00 से 5:45 बजे तक
- संध्या आरती: शाम 7:00 से 7:45 बजे तक
- शयन आरती: रात्रि 10:30 से 11:00 बजे तक
यह समय परिवर्तन आश्विन मास की पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा) तक प्रभावी रहेगा।
श्रद्धालुओं की सुविधाओं का लिया गया जायजा
Ujjain मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक ने मंदिर के आंतरिक और बाहरी परिसर का निरीक्षण किया। उन्होंने श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए पेयजल, छाया, बैठने की व्यवस्था और स्वच्छता बनाए रखने के निर्देश दिए। साथ ही मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों की भी समीक्षा की गई।
आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम
कुल मिलाकर, 14 अप्रैल की भस्म आरती एक बार फिर आस्था, परंपरा और भक्ति का भव्य उदाहरण बनकर सामने आई। बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना के साथ लौटे। यह आयोजन न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि Ujjain की सांस्कृतिक पहचान को भी दर्शाता है।
