मतलब की दोस्ती पर आधारित यह मार्मिक कविता आज के रिश्तों की सच्चाई को उजागर करती है, जहां दोस्ती दिल से नहीं बल्कि स्वार्थ से जुड़ने लगी है।
कविता – “मतलब की दोस्ती” (पूर्ण रचना)
मतलब की दोस्ती
यहाँ दोस्ती भी अब मतलब की हो गई है,
दिल से नहीं, जरूरत से जुड़ने लगी है।
मुस्कुराहटों के पीछे छुपे हैं इरादे,
हर बात में कोई फायदा दिखने लगी है।
जब तक काम है, तब तक साथ हैं,
फिर पहचान तक बदल जाती है,
जो कल तक कहते थे “हम तुम्हारे हैं”,
आज वो नजरें भी चुरा जाते हैं।
अब दिल से दोस्त बनाना डर सा लगता है,
हर रिश्ता अधूरा सा लगता है,
क्योंकि इस मतलब की दुनिया में,
सच्चा साथ भी सपना सा लगता है।
कंधा देने वाले बहुत मिलते हैं यहाँ,
पर दर्द समझने वाला कोई नहीं,
भीड़ में घिरे रहते हैं हम,
पर अपना कहने वाला कोई नहीं।
मतलब की इस दोस्ती ने ये सिखा दिया,
कि हर मुस्कान सच्ची नहीं होती,
और हर साथ निभाने वाला,
हमेशा अपनी मर्जी का ही होता है।
फिर भी कहीं ना कहीं उम्मीद बाकी है,
कि कोई तो होगा जो दिल से निभाएगा,
जो बिना मतलब के साथ चलेगा,
और हर हाल में दोस्ती को सच बनाएगा
✍️ पूनम रमेश गांधी, राजस्थान
क्यों बदल रही है दोस्ती की परिभाषा
मतलब की दोस्ती के पीछे कारण
1. स्वार्थ की बढ़ती प्रवृत्ति
आज हर व्यक्ति अपने फायदे को प्राथमिकता देता है।
2. समय की कमी
लोगों के पास रिश्तों को निभाने का समय कम होता जा रहा है।
3. डिजिटल दुनिया का प्रभाव
ऑनलाइन कनेक्शन बढ़े हैं, लेकिन भावनात्मक जुड़ाव घटा है।
सोशल मीडिया और मतलब की दोस्ती
आज सोशल मीडिया पर हजारों “दोस्त” होते हैं, लेकिन असल जिंदगी में साथ देने वाला कोई नहीं होता।
सच्ची दोस्ती की पहचान कैसे करें
मतलब की दोस्ती बनाम सच्ची दोस्ती
| पहलू | मतलब की दोस्ती | सच्ची दोस्ती |
|---|---|---|
| आधार | स्वार्थ | विश्वास |
| समय | जरूरत तक | हमेशा |
| भावनाएं | नकली | सच्ची |
| साथ | अस्थायी | स्थायी |
उम्मीद अब भी बाकी है
हालांकि मतलब की दोस्ती का चलन बढ़ा है, लेकिन सच्ची दोस्ती खत्म नहीं हुई है।
आज भी ऐसे लोग मौजूद हैं—
- जो बिना किसी स्वार्थ के साथ निभाते हैं
- जो मुश्किल समय में साथ खड़े रहते हैं
- जो रिश्तों को दिल से निभाते हैं
निष्कर्ष
मतलब की दोस्ती ने समाज को एक कड़वा सबक जरूर दिया है, लेकिन यह हमें सच्चे रिश्तों की अहमियत भी सिखाती है।यह कविता सिर्फ एक भावना नहीं, बल्कि आज की हकीकत का आईना है।
