1 अप्रैल 2026 से नए इनकम टैक्स एक्ट के तहत टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत मिलेगी। ₹12 लाख तक की आय टैक्स फ्री, निवेश के नए नियम और लेट ITR पर भी रिफंड जानें।
टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत: 1 अप्रैल से ₹12 लाख तक की आय होगी टैक्स फ्री, बदल जाएंगे निवेश और रिफंड के नियम
नई दिल्ली: अगर आप हर साल टैक्स भरने के बाद पछताते हैं कि काश यह पैसा आपके पास रहता, तो 1 अप्रैल 2026 से आपकी यह उम्मीद पूरी होने जा रही है। भारत की कर व्यवस्था में आज से यानी 1 अप्रैल, 1961 के पुराने इनकम टैक्स एक्ट को बदलकर “नया इनकम टैक्स एक्ट 2025” लागू हो गया है। इस नए कानून के तहत टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत देते हुए कई नियमों को सरल और आधुनिक बनाया गया है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बिल को संसद में पेश करते हुए इसे पिछले 60 सालों में कर प्रणाली में सबसे बड़ा बदलाव बताया था। आइए जानते हैं इन नियमों का आपकी जेब और आपके निवेश पर क्या असर पड़ेगा।
1. ₹12 लाख तक टैक्स फ्री: मिडिल क्लास को तोहफा
इस नए एक्ट का सबसे बड़ा आकर्षण आयकर स्लैब में बदलाव है। टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत देते हुए अब नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) में ₹12 लाख तक की वार्षिक आय पर कोई कर नहीं लगेगा .
हालांकि, सैलरीड क्लास के लिए यह सीमा और भी बढ़ जाती है। ₹75,000 के मानक कटौती (Standard Deduction) को मिलाने के बाद, ₹12.75 लाख तक की सैलरी वालों को एक रुपया भी टैक्स नहीं देना पड़ेगा . यह कदम मिडिल क्लास के हाथों में सीधे तौर पर खर्च करने लायक पैसा देने वाला है।
नई टैक्स स्लैब (FY 2026-27):
- ₹0 – ₹4 लाख: 0%
- ₹4 – ₹8 लाख: 5%
- ₹8 – ₹12 लाख: 10%
- ₹12 – ₹16 लाख: 15%
- ₹16 – ₹20 लाख: 20%
- ₹20 – ₹24 लाख: 25%
- ₹24 लाख और अधिक: 30%
नोट: पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Regime) में ₹2.5 लाख तक की छूट जारी रहेगी, लेकिन उसमें 80C जैसी कटौतियों का लाभ मिलता है .
2. निवेश के नियम बदले: 80C अब हुआ “सेक्शन 123”
टैक्स फाइल करने वालों के लिए सबसे अहम बदलाव सेक्शन 80C का नया रूप है। जटिलताओं को कम करने के लिए सेक्शन 80C को हटाकर उसे सेक्शन 123 बना दिया गया है . सरकार ने 300 से अधिक पुरानी धाराओं को खत्म कर दिया है।अब आपको याद रखना होगा कि PPF, ELSS, जीवन बीमा प्रीमियम, NSC और सुकन्या समृद्धि योजना का लाभ सेक्शन 123 के तहत मिलेगा . हालांकि, इसकी सीमा अभी भी ₹1.5 लाख प्रति वर्ष ही है। उद्योग जगत ने इसे बढ़ाकर ₹3.5 लाख करने की मांग की थी, लेकिन अभी इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है .
3. HRA और शिक्षा भत्ते में जबरदस्त बढ़ोतरी
टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत देने के लिए किराए पर रहने वालों और बच्चों वाले परिवारों पर खास ध्यान दिया गया है:
- HRA नियम: हाउस रेंट अलाउंस (HRA) के नियमों को सरल बनाया गया है, जिससे कर्मचारियों को अधिक लचीलापन मिलेगा।
- शिक्षा भत्ता (Education Allowance): यह बदलाव सबसे बड़ा है। दशकों से ₹100 प्रति माह चल रहा बच्चों का ट्यूशन फीस का भत्ता अब बढ़ाकर ₹3,000 प्रति माह (प्रति बच्चा) कर दिया गया है .
4. लेट ITR (Late Filing) पर भी मिलेगा रिफंड
अब तक अगर आप समय सीमा (31 जुलाई) के बाद टैक्स रिटर्न भरते थे, तो न सिर्फ जुर्माना लगता था, बल्कि आपका रिफंड भी रुक जाता था। नए नियमों के तहत, देरी से रिटर्न भरने वालों को भी उनका रिफंड मिल सकेगा .
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नई डेडलाइन: अब आप अगले साल 31 मार्च तक भी संशोधित रिटर्न (Revised Return) दाखिल कर सकते हैं, जो पहले 31 दिसंबर तक ही सीमित था .
5. शेयर बाजार और SGB के नए नियम
अगर आप शेयर बाजार या सोने (Gold) में निवेश करते हैं, तो सावधान हो जाइए। टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत के साथ-साथ सट्टेबाजी पर शिकंजा कसा गया है:
- F&O ट्रेडिंग: सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) को बढ़ा दिया गया है। फ्यूचर्स पर STT अब 0.05% (पहले 0.02%) और ऑप्शंस पर 0.15% (पहले 0.1%) हो गया है . इससे F&O ट्रेडिंग काफी महंगी हो जाएगी।
- SGB (सोवरेन गोल्ड बॉन्ड): सेकेंडरी मार्केट से SGB खरीदने वालों पर बुरी खबर है। अब सेकेंडरी मार्केट में खरीदे गए SGB पर मैच्योरिटी पर टैक्स छूट नहीं मिलेगी, जबकि डायरेक्ट सब्सक्रिप्शन पर पुराने नियम लागू रहेंगे .
Conclusion
1 अप्रैल 2026 से भारत का कर इतिहास बदल गया है। ये बदलाव सरकार की उस मंशा को दिखाते हैं जहाँ वे ईमानदारी से टैक्स देने वालों को परेशान नहीं करना चाहते। टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत देने वाले ये नियम आम आदमी की क्रय शक्ति बढ़ाएंगे और अर्थव्यवस्था में मांग को गति देंगे।हालांकि, निवेशकों को अब पुराने सेक्शन 80C को भूलकर नए सेक्शन 123 और शेयर बाजार के नियमों को समझना होगा। अगर आप F&O ट्रेडर हैं, तो अब आपकी ट्रेडिंग थोड़ी महंगी हो गई है, जबकि लॉन्ग टर्म इन्वेस्टर्स के लिए यह अच्छी खबर है।
