उत्तर प्रदेश में सीएम सामूहिक विवाह योजना के तहत 1784 जोड़ों की शादी अटकी। जानिए क्या है वजह, कब होगी शादी और कैसे करें आवेदन।
1784 कुंवारों की गुहार: सीएम सामूहिक विवाह योजना के तहत अटकी शादी, जानें क्या है मामला
गाजीपुर: उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में एक अनोखी और चिंताजनक स्थिति देखने को मिल रही है। यहां 1784 युवा-युवतियां सरकार से अपनी शादी कराने की गुहार लगा रहे हैं। इन सभी ने सीएम सामूहिक विवाह योजना के तहत आवेदन तो कर दिया, लेकिन महीनों बीत जाने के बावजूद उनकी शादी की तारीख नहीं आई है। विभाग की चुप्पी ने इन वर-वधू की उम्मीदों को अधर में लटका दिया है।
क्या है सीएम सामूहिक विवाह योजना?
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा शुरू की गई सीएम सामूहिक विवाह योजना गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए वरदान से कम नहीं है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य उन परिवारों की बेटियों की शादी में आर्थिक सहायता प्रदान करना है, जो शादी का खर्च वहन नहीं कर सकते। शुरुआत में इस योजना के तहत एक जोड़े पर 51 हजार रुपये खर्च किए जाते थे। हालांकि, पिछले वित्तीय वर्ष में सरकार ने उदारता दिखाते हुए इस राशि को बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दिया। इस बढ़ोतरी के बाद से ही इस योजना के प्रति लोगों का रुझान तेजी से बढ़ा है।
गाजीपुर में क्यों अटकी 1784 जोड़ों की शादी?
गाजीपुर जिले में यह योजना वर्ष 2017 से लागू है। अब तक इस योजना के तहत कुल 7967 जोड़ों का विवाह संपन्न कराया जा चुका है। पिछले वित्तीय वर्ष में शासन ने 799 शादियों का लक्ष्य निर्धारित किया था, जिसके सापेक्ष समाज कल्याण विभाग ने 796 शादियां करा दीं। यह आंकड़ा तो सरकार की सक्रियता को दर्शाता है, लेकिन समस्या यह है कि आवेदनों की संख्या लक्ष्य से कहीं अधिक थी।
वर्तमान में जिले के पोर्टल पर 1784 जोड़े ऐसे हैं, जिनका आवेदन तो स्वीकार कर लिया गया है, लेकिन उनकी शादी की तिथि तय नहीं हो सकी है। मार्च का महीना वित्तीय वर्ष का अंतिम महीना होता है। चूंकि इस वर्ष का बजट और निर्धारित लक्ष्य पूरा किया जा चुका है, इसलिए इन आवेदनों पर फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
योजना का लाभ किसे और कैसे मिलता है?
सीएम सामूहिक विवाह योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें जाति और धर्म का कोई बंधन नहीं है। यह योजना पूरी तरह से धर्मनिरपेक्ष है।
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हिंदू जोड़े: पारंपरिक रीति-रिवाजों और वैदिक मंत्रों के साथ सामूहिक विवाह कराए जाते हैं।
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मुस्लिम जोड़े: काजी की मौजूदगी में निकाह की प्रक्रिया संपन्न कराई जाती है।
इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदक की आयु, निवास और आय सीमा निर्धारित है। मुख्य रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग के परिवार इसके पात्र हैं।
ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया और लंबित मामले
शासन के निर्देशानुसार, इस योजना के लिए आवेदन पूरी तरह से ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से किए जाते हैं। लाभार्थियों को समाज कल्याण विभाग के पोर्टल पर सभी आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने होते हैं। दस्तावेजों की जांच के बाद ही शादी की तिथि निर्धारित की जाती है।
हालांकि, गाजीपुर में 1784 आवेदन ऐसे हैं जो जांच के बाद भी शादी की प्रतीक्षा कर रहे हैं। जिला समाज कल्याण अधिकारी के अनुसार, ये सभी लाभार्थी अब अगले वित्तीय वर्ष का इंतजार करने को मजबूर हैं। जैसे ही नया वित्तीय वर्ष शुरू होगा और शासन से नया बजट और लक्ष्य जारी होगा, इन आवेदनों पर कार्रवाई शुरू की जाएगी।
अगले वित्तीय वर्ष का इंतजार: लाभार्थियों की मजबूरी
1 अप्रैल 2026 से नया वित्तीय वर्ष शुरू होगा। तब तक इन 1784 जोड़ों को धैर्य रखने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। यह प्रतीक्षा काल इन युवाओं और उनके परिवारों के लिए काफी कठिन है।
एक लाभार्थी का कहना है, “हमने बहुत उम्मीद से आवेदन किया था। सरकार से गुहार है कि हमारी शादी जल्द से जल्द करा दी जाए। हम महीनों से इंतजार कर रहे हैं।”
सरकार से युवाओं की उम्मीदें
सीएम सामूहिक विवाह योजना ने वास्तव में कई गरीब परिवारों के सपनों को साकार किया है। यह योजना न सिर्फ आर्थिक बोझ कम करती है, बल्कि सामूहिक विवाह के माध्यम से सामाजिक समरसता को भी बढ़ावा देती है।
हालांकि, गाजीपुर का यह मामला दर्शाता है कि योजना के प्रति बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए सरकार को आवेदनों की संख्या के अनुरूप बजट और लक्ष्य बढ़ाने की आवश्यकता है। जब तक इन 1784 जोड़ों की शादी नहीं हो जाती, तब तक यह मामला प्रशासनिक चुनौती बना रहेगा। युवाओं को उम्मीद है कि नए वित्तीय वर्ष में सरकार उनकी गुहार सुनेगी और उनकी शादी की रस्में पूरी होंगी।
