नवपद ओलिजी आराधना थांदला में 47 आराधकों की शुरुआत, 100 से अधिक श्रद्धालुओं ने एक लाख नवकार मंत्र जाप कर भक्ति का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया।
आराधना क्या है
नवपद ओलिजी आराधना थांदला जैन धर्म की अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र साधना है, जो चैत्र नवरात्रि के दौरान सप्तमी से प्रारंभ होती है। इस विशेष आराधना में श्रद्धालु नौ दिनों तक कठोर नियमों का पालन करते हुए एक समय उबला हुआ, विगय रहित भोजन ग्रहण करते हैं।इस साधना का मुख्य उद्देश्य आत्मशुद्धि, कर्म क्षय और आध्यात्मिक उन्नति है। इसमें आराधक नवकार महामंत्र के पाँच पदों तथा ज्ञान, दर्शन, चारित्र और तप की क्रमशः साधना करते हैं।
थांदला में आराधना की शुरुआत
थांदला में इस वर्ष नवपद ओलिजी आराधना थांदला का प्रारंभ भव्य और उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ। प्रारंभिक चरण में कुल 47 आराधकों ने इस पवित्र तप को अपनाया।संयोजक लता सोनी और सचिव हितेश शाहजी के अनुसार, इस बार आयोजन विशेष रूप से अनुशासित और सामूहिक रूप में किया गया है, जिससे हर आराधक को आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव हो सके।
तप और नियमों का विशेष पालन
इस आराधना में तप और संयम का अत्यंत महत्व है।
- 10 आराधकों ने आयम्बिल और वरण तप किया
- केवल उड़द द्रव्य का उपयोग किया गया
- अलुणा (बिना नमक) और विगय रहित आहार लिया गया
- 37 आराधकों ने निवि तप किया
- भोजन में केवल नमक और काली मिर्च का उपयोग
यह तप साधकों के आत्मसंयम और श्रद्धा का प्रतीक है, जो उन्हें आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनाता है।
लाभार्थी परिवार और आयोजन व्यवस्था
इस वर्ष नवपद ओलिजी आराधना थांदला के विभिन्न तपों के लाभार्थी बैंगलोर के श्रीकांता भंवरलाल बांठिया परिवार रहे।
श्रीसंघ अध्यक्ष प्रदीप गादिया के अनुसार:
- प्रत्येक परिवार को एक दिन सेवा का अवसर दिया गया
- पहले दिन शाहजी और मेहता परिवार ने सेवा दी
- सामूहिक सहयोग से आयोजन सफल बनाया गया
यह व्यवस्था समाज में एकता और सहयोग की भावना को मजबूत करती है।
एक लाख नवकार मंत्र जाप का आयोजन
इस आराधना का सबसे विशेष आकर्षण रहा एक लाख नवकार मंत्र का सामूहिक जाप।
- सुबह 9 से 11 बजे तक आयोजन
- 100 से अधिक आराधक शामिल
- प्रत्येक ने 10-10 माला का जाप किया
- मौन रहकर सामायिक में साधना की गई
महिला मंडल अध्यक्ष किरण श्रीश्रीमाल, सचिव अर्चना गादिया और कोषाध्यक्ष सीमा चौरड़िया ने बताया कि यह आराधना आत्मशुद्धि के लिए अत्यंत प्रभावशाली है।
आध्यात्मिक महत्व और संदेश
नवपद ओलिजी आराधना थांदला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मा के शुद्धिकरण का मार्ग है।
इसका महत्व:
- कर्मों का क्षय
- मन की शांति
- आत्मज्ञान की प्राप्ति
- आध्यात्मिक उन्नति
जैनाचार्य उमेशमुनिजी “अणु” और जिनेन्द्रमुनिजी के आशीर्वाद से यह आयोजन और भी दिव्य बन गया।
निष्कर्ष
नवपद ओलिजी आराधना थांदला ने यह सिद्ध कर दिया कि श्रद्धा, तप और सामूहिकता के माध्यम से आध्यात्मिक ऊँचाइयों को प्राप्त किया जा सकता है। 47 आराधकों से शुरू होकर 100+ श्रद्धालुओं तक पहुँचा यह आयोजन समाज में धर्म और भक्ति का अद्भुत उदाहरण है।

