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भोजशाला जैन अधिकार PIL पर हाईकोर्ट में सुनवाई, जैन समाज को राहत, सरकार और ASI से जवाब मांगा गया इंदौर खंडपीठ में

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Published On: 20 March 2026

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भोजशाला जैन अधिकार PIL पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट इंदौर में सुनवाई, जैन समाज को बड़ी राहत, सरकार और ASI से जवाब मांगा गया।

राजेश जैन दद्दू
इंदौर

भोजशाला जैन अधिकार PIL पर सुनवाई

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भोजशाला जैन अधिकार PIL को लेकर आज मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई, जिसे जैन समाज के लिए एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। इस जनहित याचिका को समाज श्रेष्ठी सलेकचंद जैन (दिल्ली) द्वारा दाखिल किया गया है, जिसमें भोजशाला को जैन गुरुकुल और जैन मंदिर के रूप में मान्यता देने तथा जैन समाज के अधिकार सुनिश्चित करने की मांग की गई है।धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने जानकारी देते हुए बताया कि यह मामला लंबे समय से जैन समाज की आस्था और ऐतिहासिक दावों से जुड़ा हुआ है। आज की सुनवाई में कोर्ट ने इस विषय को गंभीरता से लिया और विस्तृत चर्चा की।

कोर्ट में क्या हुआ आज

भोजशाला जैन अधिकार PIL पर सुनवाई के दौरान मध्यप्रदेश सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के वकीलों ने इस याचिका का विरोध किया। इसके बावजूद माननीय न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति राजेश कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने याचिका को स्वीकार करते हुए Respondents से जवाब मांगा।कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि सभी पक्ष 2 अप्रैल 2026 तक अपना लिखित जवाब और आपत्तियां प्रस्तुत करें। साथ ही, इस PIL को भोजशाला से जुड़े अन्य मामलों के साथ कनेक्ट भी कर दिया गया है।

जैन समाज के लिए क्या है महत्व

भोजशाला जैन अधिकार PIL जैन समाज के लिए ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। इस याचिका में यह दावा किया गया है कि भोजशाला केवल एक पुरातात्विक स्थल नहीं, बल्कि जैन धर्म से जुड़ा प्राचीन गुरुकुल और मंदिर रहा है।राजेश जैन दद्दू के अनुसार, सर्वे के दौरान जैन तीर्थंकरों की मूर्तियों के खंडित हिस्से, यक्ष-यक्षणियों की प्रतिमाएं और सप्तफणी कैनोपी जैसे अवशेष मिले हैं। इन अवशेषों को जैन धर्म से जोड़ने के पर्याप्त प्रमाण मौजूद हैं।

जैन पक्ष की दलीलें

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील दिनेश प्रसाद राजभर ने जैन समाज की ओर से प्रभावी तरीके से पक्ष रखा। उन्होंने कोर्ट के सामने यह तर्क रखा कि:

  • भोजशाला ऐतिहासिक रूप से जैन गुरुकुल रहा है
  • यहां से प्राप्त मूर्तियां जैन धर्म से संबंधित हैं
  • ASI ने अपनी रिपोर्ट में जैन पक्ष को पर्याप्त महत्व नहीं दिया

उन्होंने यह भी कहा कि इन तथ्यों को नजरअंदाज करना न्यायसंगत नहीं है।

ASI रिपोर्ट पर उठे सवाल

भोजशाला जैन अधिकार PIL में सबसे बड़ा मुद्दा ASI की रिपोर्ट को लेकर सामने आया। जैन समाज का आरोप है कि:

  • जैन मूर्तियों और अवशेषों का सही उल्लेख नहीं किया गया
  • सप्तफणी कैनोपी को वासुकी नाग बताकर गलत प्रचार किया गया
  • जैन धार्मिक पहचान को दबाने का प्रयास हुआ

इन बिंदुओं पर कोर्ट ने भी गंभीरता दिखाई और Respondents से स्पष्टीकरण मांगा है।

अगली सुनवाई की तारीख

कोर्ट ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया है कि सभी पक्ष 2 अप्रैल 2026 तक अपने जवाब दाखिल करें। इसके बाद इस मामले की अगली सुनवाई होगी, जिसमें आगे की दिशा तय की जाएगी।

निष्कर्ष

भोजशाला जैन अधिकार PIL पर आज की सुनवाई जैन समाज के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। याचिका का स्वीकार होना और सरकार व ASI से जवाब मांगा जाना इस मामले को नई दिशा देता है।अब सभी की नजरें 2 अप्रैल 2026 की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि जैन समाज के ऐतिहासिक और धार्मिक दावों को किस हद तक मान्यता मिलती है।

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