—Advertisement—

Thandla में पक्खी पर्व पर आराधना, निखिलशीलाजी का संदेश—अश्लीलता से दूर रहकर इन्द्रिय नियंत्रण अपनाएं, संयम से जीवन में शांति पाएँ

Author Picture
Published On: 19 March 2026
thandla

—Advertisement—

Thandla में पक्खी पर्व का आयोजन, इन्द्रिय नियंत्रण पर दिया गया विशेष संदेश

Thandla । जैन धर्म में तप, संयम और इन्द्रिय निग्रह का विशेष महत्व बताया गया है। इन्हीं मूल्यों को आत्मसात करने के उद्देश्य से पक्खी पर्व का आयोजन किया जाता है। गुरुवार, 19 मार्च 2026 को थांदला में इस पर्व को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित धर्मसभा में पूज्या श्री निखिलशीलाजी म.सा. ने चक्षु इन्द्रिय के संयम और उसके दुरुपयोग से होने वाले परिणामों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

पक्खी पर्व का धार्मिक महत्व

पक्खी पर्व जैन परंपरा का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे साधक आत्मशुद्धि, तपस्या और संयम के लिए मनाते हैं। यह पर्व हमें हमारे दैनिक जीवन में इन्द्रियों पर नियंत्रण रखने और आत्मचिंतन की प्रेरणा देता है।

थांदला में आयोजित इस पर्व में जिन शासन गौरव पूज्य गुरुदेव श्री उमेशमुनिजी म.सा. “अणु” की कृपा और प्रवर्तक देव बुद्धपुत्र पूज्य श्री जिनेन्द्रमुनिजी म.सा. के मार्गदर्शन में महासती सरलमना पूज्या श्री निखिलशीलाजी म.सा. आदि ठाणा 4 के माध्यम से रत्नत्रय की निरंतर आराधना की जा रही है। इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लिया और धर्म लाभ प्राप्त किया।

चक्षु इन्द्रिय के दुरुपयोग पर चेतावनी

अपने प्रवचन में पूज्या श्री निखिलशीलाजी म.सा. ने कहा कि वर्तमान समय में मनुष्य चक्षु इन्द्रिय का अत्यधिक दुरुपयोग कर रहा है। मोबाइल, टीवी और अन्य माध्यमों के जरिए अश्लीलता और आकर्षक दृश्यों को बार-बार देखने से मन में रागात्मक और द्वेषात्मक भाव उत्पन्न होते हैं।

उन्होंने बताया कि मनोज्ञ दृश्यों से राग और अमनोज्ञ दृश्यों से द्वेष पैदा होता है, जो कर्म बंध का मुख्य कारण बनता है। यह प्रवृत्ति व्यक्ति को आध्यात्मिक रूप से कमजोर बनाती है और उसे दुर्गति की ओर ले जाती है।

इन्द्रिय निग्रह का महत्व

पूज्या श्री ने बताया कि जीव पांच इन्द्रियों के माध्यम से कर्म बांधता है, लेकिन यदि इन इन्द्रियों का संयम किया जाए तो वही जीव कर्मों का क्षय भी कर सकता है। इन्द्रिय निग्रह का अर्थ है – विवेकपूर्ण दृष्टि।

उन्होंने कहा कि व्यक्ति को यह समझना चाहिए कि उसे क्या देखना है और क्या नहीं। यह विवेक ही उसे सही मार्ग पर ले जाता है। यदि व्यक्ति अपनी इन्द्रियों को नियंत्रित करता है, तो उसके भीतर शुद्धता और संतुलन का विकास होता है।

दृष्टांत के माध्यम से समझाया संदेश

अपने प्रवचन को प्रभावी बनाने के लिए पूज्या श्री ने एक दृष्टांत भी प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि एक मांस-लोलुप राजा अपनी विकारी प्रवृत्तियों के कारण राज्य से निष्कासित होकर वन में भटकने लगा।

लेकिन जब उसे संतों का सान्निध्य मिला और उसने इन्द्रिय निग्रह अपनाया, तो उसका जीवन पूरी तरह बदल गया और वह आध्यात्मिक सुख का अधिकारी बन गया। इस उदाहरण के माध्यम से उन्होंने बताया कि जीवन में परिवर्तन संभव है, यदि व्यक्ति सही मार्ग अपनाए।

3b 1

आंखों का सही उपयोग कैसे करें

पूज्या श्री ने आंखों की तुलना हीरे से करते हुए कहा कि जैसे कोई व्यक्ति अपनी तिजोरी में केवल कीमती वस्तुएं ही रखता है, वैसे ही आंखों का उपयोग भी केवल शुभ कार्यों के लिए होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आंखों का उपयोग प्रभु दर्शन, संतों के सान्निध्य और आगम अध्ययन में करना चाहिए। इससे व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा और पुण्य का संचार होता है।

दृष्टि का यह परिवर्तन व्यक्ति को बुरे विचारों और विकारों से दूर करता है और उसे आत्मिक शांति प्रदान करता है।

चेलना चरित्र के माध्यम से तत्व चर्चा

इस अवसर पर पूज्या श्री प्रियशीलाजी म.सा. ने चेलना चरित्र के माध्यम से गहन आध्यात्मिक चर्चा की। उन्होंने जीव के अस्तित्व, पुनर्जन्म, नरक और अन्य गतियों के विषय में विस्तार से बताया।

उन्होंने यह भी बताया कि भगवान महावीर के समय 400 वादी थे, जो उनकी वाणी को इतनी गहराई से समझते थे कि उनके सामने अन्य मत स्वतः ही खंडित हो जाते थे। यह जैन दर्शन की गहराई और तर्कशक्ति को दर्शाता है।

तप और आराधना का आयोजन

पक्खी पर्व के अवसर पर थांदला पक्खी मण्डल द्वारा उपवास और तप की विशेष आराधना की गई। महिला मंडल द्वारा निरंतर पक्खी जाप किया गया, जिसमें ज्योति शाहजी, ज्योति कांकरिया और शीला पीचा ने भाग लिया।

यह तप और साधना व्यक्ति के आत्मबल को बढ़ाने के साथ-साथ मानसिक शांति प्रदान करती है। श्रद्धालुओं ने पूरे समर्पण के साथ इन धार्मिक गतिविधियों में हिस्सा लिया।

वर्षितप पारणें का विशेष आयोजन

वर्षितप आराधकों के पारणें का आयोजन भी इस अवसर पर किया गया, जिसका लाभ भंसाली परिवार ने लिया। यह आयोजन जैन धर्म में तप और संयम की परंपरा का प्रतीक है।

उल्लेखनीय है कि इसी दिन एक वर्ष पूर्व भंसाली परिवार के पूज्य श्री ललितमुनिजी ने संयम मार्ग को अपनाया था। यह दिन उनके परिवार के लिए विशेष महत्व रखता है। इसी अवसर पर परिवार में पुत्ररत्न की प्राप्ति भी हुई, जिससे यह दिन और भी शुभ बन गया।

समाजजनों की सहभागिता

इस आयोजन में समाज के अनेक प्रमुख लोग उपस्थित रहे। संघ अध्यक्ष प्रदीप गादिया, प्रवक्ता पवन नाहर सहित कई गणमान्य नागरिकों ने धर्मसभा में भाग लिया।

इसके अलावा मनीष व्होरा, दिलीप गांधी, पंकज कुंवर, दिलीप ओरा, मनोज ओरा, आयुष बोहरा, मनोज वागरेचा सहित कई समाजसेवी भी उपस्थित रहे। सभी ने इस आयोजन को सफल बनाने में सहयोग दिया।

आध्यात्मिक संदेश और निष्कर्ष

पक्खी पर्व का यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह समाज को आत्मसंयम, नैतिकता और आध्यात्मिकता का संदेश देने वाला अवसर भी था।

पूज्या श्री निखिलशीलाजी म.सा. के प्रवचन ने यह स्पष्ट किया कि यदि व्यक्ति अपनी इन्द्रियों, विशेषकर आंखों पर नियंत्रण रखे, तो वह न केवल अपने जीवन को बेहतर बना सकता है, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति भी प्राप्त कर सकता है।

इस प्रकार थांदला में आयोजित यह पर्व समाज के लिए प्रेरणादायक रहा और लोगों को अपने जीवन में संयम और विवेक अपनाने की प्रेरणा देता रहा।

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp