सर्वधर्म संस्था उमराह यात्रा के तहत गरीब परिवार को मक्का-मदीना भेजने की अनोखी पहल, जानिए पूरी प्रेरणादायक कहानी।
सर्वधर्म संस्था उमराह यात्रा एक ऐसी मिसाल बनकर सामने आई है, जिसने इंसानियत, धार्मिक सौहार्द और सेवा भाव को एक नई ऊंचाई दी है। इंदौर में आयोजित इस पहल ने यह साबित कर दिया कि अगर नीयत साफ हो और सेवा का भाव सच्चा हो, तो किसी भी जरूरतमंद की सबसे बड़ी ख्वाहिश पूरी की जा सकती है।
सर्वधर्म संस्था उमराह यात्रा की अनोखी पहल
इंदौर की सर्वधर्म संस्था पिछले 25 वर्षों से समाज में धार्मिक सौहार्द और भाईचारे को बढ़ावा देने के लिए कार्य कर रही है। इस संस्था ने हाल ही में एक ऐसा कदम उठाया, जिसने हर किसी का दिल जीत लिया।संस्था ने एक गरीब मुस्लिम महिला नूरजहां बेगम और उनके बेटे को उमराह यात्रा पर भेजने का निर्णय लिया। यह पहल सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि मानवता की सच्ची सेवा का प्रतीक है।
नूरजहां बेगम की अधूरी ख्वाहिश हुई पूरी
नूरजहां बेगम का सपना था कि वे एक बार मक्का-मदीना जाकर अल्लाह के घर का दीदार करें। लेकिन आर्थिक तंगी के कारण यह सपना अधूरा था।
कहते हैं –
“अल्लाह दिलों की नीयत देखता है”
और यही हुआ। सर्वधर्म संस्था उनके लिए एक माध्यम बनी और उनकी यह ख्वाहिश पूरी करने का जिम्मा उठाया।
पूरी यात्रा का खर्च संस्था ने उठाया
सिर्फ यात्रा ही नहीं, बल्कि:
- पासपोर्ट बनवाना
- वीजा प्रक्रिया
- फ्लाइट टिकट
- रहने और खाने की व्यवस्था
इन सभी जिम्मेदारियों को संस्था ने पूरी तरह निभाया।
उमराह यात्रा का धार्मिक महत्व
इस्लाम धर्म में उमराह एक पवित्र इबादत मानी जाती है। हालांकि यह हज की तरह अनिवार्य नहीं है, लेकिन हर मुसलमान की इच्छा होती है कि वह जीवन में कम से कम एक बार मक्का-मदीना जाए।गरीबों के लिए यह सपना अक्सर अधूरा रह जाता है। ऐसे में सर्वधर्म संस्था उमराह यात्रा जैसी पहल उन्हें एक नई उम्मीद देती है।
धार्मिक सौहार्द की मिसाल
इस संस्था की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें सभी धर्मों के लोग शामिल हैं।यह सिर्फ मुस्लिम समुदाय के लिए ही नहीं, बल्कि:
- हिंदू
- मुस्लिम
- जैन
- सिख
सभी धर्मों के लोगों के लिए कार्य करती है।
मंजूर बेग का प्रेरणादायक संदेश
संस्था के अध्यक्ष मंजूर बेग ने कहा:
“अगर हमारी वजह से किसी गरीब के चेहरे पर मुस्कान आती है, तो इससे बड़ी कोई इबादत नहीं हो सकती।”
उन्होंने कुरान की एक बात भी साझा की:
“करो मेहरबानी तुम अहले ज़मीं पर, खुदा मेहरबां होगा तुम पर अर्शे बरी पर”
विदाई समारोह और दुआ
19 मार्च 2026 को नूरजहां बेगम और उनके बेटे शेख मोहम्मद इंदौर से उमराह के लिए रवाना होंगे।
रवाना होने से पहले संस्था के सदस्यों:
- हाजी इमरान कुरेशी
- मुकेश बजाज
- रियाज खान
- समीर बेग
ने उनका फूलों से स्वागत किया और उनसे देश-दुनिया में अमन और शांति की दुआ करने की गुजारिश की।
भविष्य की योजनाएं
सर्वधर्म संस्था उमराह यात्रा के बाद अब संस्था ने एक और बड़ा फैसला लिया है:गरीब हिंदू परिवारों को धार्मिक यात्रा पर भेजने की योजना,यह कदम समाज में एक नई दिशा देगा, जहां धर्म नहीं बल्कि इंसानियत सबसे बड़ा धर्म होगा।
समाज के लिए प्रेरणा
यह पहल हमें कई महत्वपूर्ण सीख देती है:
- सेवा सबसे बड़ी इबादत है
- धर्म से पहले इंसानियत आती है
- एक छोटा कदम भी किसी की जिंदगी बदल सकता है
निष्कर्ष
सर्वधर्म संस्था उमराह यात्रा सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि इंसानियत की सबसे खूबसूरत मिसाल है। यह पहल हमें सिखाती है कि जब दिल से सेवा की जाती है, तो धर्म और जाति की सीमाएं अपने आप खत्म हो जाती हैं।यह कहानी हर उस इंसान के लिए प्रेरणा है जो समाज में बदलाव लाना चाहता है।

