—Advertisement—

“‘द डायरी ऑफ मणिपुर’ में Monalisa और पिता को दक्षिण के फिल्म मेकर्स ने ब्रेनवॉश किया: डायरेक्टर सनोज मिश्रा का खुलासा”

Author Picture
Published On: 16 March 2026
Monalisa

—Advertisement—

Monalisa और उनके पिता के साथ कथित धोखाधड़ी: ‘द डायरी ऑफ मणिपुर’ में ब्रेनवॉश का मामला

विवेक पाराशर, खरगोन।
हाल ही में ‘द डायरी ऑफ मणिपुर’ के डायरेक्टर सनोज मिश्रा ने बड़ा खुलासा किया कि अभिनेत्री Monalisa और उनके पिता जय सिंह भोंसले को दक्षिण भारत के कथित रूप से फंडेड फिल्म मेकर्स ने बरगला कर ब्रेनवॉश किया। उनके अनुसार, मोनालिसा के पिता को एक फिल्म में कर्नल का रोल देने का झांसा देकर उन्हें दक्षिण में ले जाया गया। इस घटना के चलते फिल्म की शूटिंग डेढ़ महीने तक रुकी रही।

काठमांडू प्रवास और ब्रेनवॉश की कहानी

सनोज मिश्र ने बताया कि नेपाल के काठमांडू प्रवास के दौरान दक्षिण के कुछ कथित फिल्म मेकर्स ने मोनालिसा और उनके पिता को बहकाया और दक्षिण में ले जाकर फिल्म निर्माण में शामिल किया। उन्होंने कहा कि उनके कई बार मना करने के बावजूद मोनालिसा और उसके पिता को दक्षिण में ले जाया गया।

मिश्रा ने आगे बताया कि फिल्म की शूटिंग के दौरान मोनालिसा और उनके पिता को विश्वास में लिया गया कि उनके लिए विशेष अवसर और बड़े रोल तैयार हैं। इस झांसे में आने के कारण फिल्म की पूरी प्रक्रिया प्रभावित हुई और लगभग डेढ़ महीने तक शूटिंग रोक दी गई।

फिल्म में रोल और भुगतान का झांसा

सनोज मिश्र ने बताया कि मोनालिसा के पिता जय सिंह भोंसले को एक फिल्म में कर्नल का रोल देने का वादा किया गया था। इसके लिए तीन लाख रुपये की रकम का भुगतान करने का झांसा भी दिया गया। जय सिंह ने उन्हें रात में यूनिफॉर्म में अपनी फोटो भी भेजी, जिससे सनोज मिश्र को हंसी और दुख दोनों अनुभव हुए।

मिश्रा ने स्पष्ट किया कि यह सब एक तरह की धोखाधड़ी थी, क्योंकि फिल्म कभी भी बनाई नहीं गई थी। इसके बावजूद मोनालिसा और फरहान खान की कथित फिल्म की झांसी तैयार कर दी गई थी।

एक्टिंग और रील की ट्रेनिंग के नाम पर झांसा

मोनालिसा और उसके पिता को एक्टिंग, डांस और रील बनाने की ट्रेनिंग देने का वादा किया गया। उन्हें सस्ते में किराए का मकान उपलब्ध कराने का भी आश्वासन मिला। सनोज मिश्र ने बताया कि मोनालिसा अभी हिंदी के डायलॉग ठीक से नहीं बोल पा रही थी, और ऐसे में उसे दक्षिण भारतीय भाषाओं जैसे कन्नड़ या मलयालम में डायलॉग बोलने के लिए दबाव डाला गया।

इसके चलते मोनालिसा और उनके पिता झांसे में आ गए और उन्हें लगा कि उनके अभिनय करियर की शुरुआत हो रही है। लेकिन वास्तविकता में यह सब केवल धोखाधड़ी थी।

पीएफआई के कथित फंडिंग आरोप

सनोज मिश्र ने आरोप लगाया कि पीएफआई जैसी संस्थाएं कथित रूप से इस तरह के लोगों को फंडिंग करती हैं। उन्होंने बताया कि मोनालिसा को एक्टिंग सिखाने वाले एक अन्य व्यक्ति को भी फिल्म में बजरंगबली का रोल देने का झांसा दिया गया, जबकि कोई असली फिल्म बनाई ही नहीं गई।

इस प्रकार, मोनालिसा और उनके पिता केवल धोखाधड़ी का शिकार बने। फिल्म मेकर्स ने उन्हें विश्वास दिलाया कि उनके प्रयास और प्रतिभा के अनुसार उन्हें बड़े रोल दिए जाएंगे, जबकि वास्तव में उन्हें धोखा दिया गया।

फिल्म निर्माण और आर्थिक नुकसान

‘द डायरी ऑफ मणिपुर’ के निर्माण के लिए सनोज मिश्र ने बड़ी राशि का कर्ज लिया। जब दक्षिण के कथित फिल्म निर्माता मोनालिसा को फिल्म में कास्ट कर चुके थे, तो उन्हें लगा कि उनकी मेहनत और निवेश पर पानी फिर जाएगा।

इसके चलते उन्होंने जल्दबाजी में फिल्म का ट्रेलर लॉन्च किया। फिल्म का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा बन चुका है, लेकिन मोनालिसा का शेष रोल अभी भी बाकी है। सनोज मिश्र ने बताया कि फिल्म पूरी करने के लिए उनके पास फिलहाल कोई स्पष्ट जवाब नहीं है।

फिल्म उद्योग में उठ रहे सवाल

इस घटना ने फिल्म उद्योग में फंडिंग, पारदर्शिता और कलाकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह स्पष्ट हो गया कि कलाकारों और उनके परिवार को फिल्मों में शामिल करने से पहले पूरी जांच और पारदर्शिता की आवश्यकता है।

धोखाधड़ी के चलते कई कलाकारों और उनके परिवारों के करियर पर असर पड़ सकता है। मोनालिसा और उनके पिता के साथ हुई घटना यह भी दिखाती है कि उद्योग में फंडिंग और लॉन्चिंग प्रक्रिया में गहरी जिम्मेदारी की कमी है।

Monalisa का भविष्य और अगले कदम

सनोज मिश्र ने बताया कि फिल्म का शेष हिस्सा पूरी करने के लिए उन्हें रणनीति बनाने की आवश्यकता है। मोनालिसा के अभिनय और भूमिका को ध्यान में रखते हुए फिल्म को पूर्ण करना चुनौतीपूर्ण है।

इसके अलावा, इस घटना ने यह सवाल भी उठाया है कि कैसे कलाकारों को बिना अनुभव और उचित मार्गदर्शन के फिल्मों में शामिल किया जाता है और उन्हें मानसिक दबाव में लाया जाता है।

निष्कर्ष

मोनालिसा और उनके पिता के साथ हुई कथित धोखाधड़ी फिल्म उद्योग में गंभीर चिंता का विषय है। कलाकारों की सुरक्षा, पारदर्शिता और फंडिंग की प्रक्रिया को नियंत्रित करना अब उद्योग की प्राथमिकता बन चुकी है। इस घटना से यह स्पष्ट हो गया है कि केवल प्रतिभा और मेहनत पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है; कलाकारों और उनके परिवार को उचित मार्गदर्शन और सुरक्षा मिलनी चाहिए।

‘द डायरी ऑफ मणिपुर’ की कहानी केवल एक फिल्म का संघर्ष नहीं है, बल्कि यह भारतीय फिल्म उद्योग में फंडिंग और पारदर्शिता के मुद्दों को उजागर करती है।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

Related News

Comments are closed.

Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp