करीला धाम मेला 2026 में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। रंगपंचमी पर सीएम डॉ. मोहन यादव पहुंचे, मां जानकी के दर्शन कर कई विकास परियोजनाओं का करेंगे शुभारंभ।
करीला धाम मेला 2026: आस्था और संस्कृति का अनोखा संगम
मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में आयोजित करीला धाम मेला 2026 प्रदेश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है। रंगपंचमी के अवसर पर आयोजित इस मेले में लाखों श्रद्धालु माँ जानकी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।इस वर्ष यह भव्य आयोजन 7 मार्च से 9 मार्च 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। प्रशासन के अनुसार इस दौरान लगभग 20 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
रंगपंचमी पर उमड़ती है लाखों भक्तों की भीड़
करीला धाम में रंगपंचमी के दिन सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लग जाती हैं। श्रद्धालु मंदिर में पहुँचकर माँ जानकी के दर्शन करते हैं और अपने परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं।यह मेला केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं बल्कि लोक संस्कृति और परंपराओं का उत्सव भी है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का दौरा
करीला धाम मेला 2026 के दौरान मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी इस ऐतिहासिक मेले में शामिल होंगे।मुख्यमंत्री मंदिर में माँ जानकी के दर्शन कर पूजा-अर्चना करेंगे और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना करेंगे।इसके साथ ही वे जिले में कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी करेंगे।
महिला दिवस पर स्व-सहायता समूहों की प्रदर्शनी
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर करीला मेले में महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा विशेष प्रदर्शनी लगाई गई है।इस प्रदर्शनी में ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार किए गए उत्पाद और स्वरोजगार से जुड़े कार्य प्रदर्शित किए जा रहे हैं।
करीला धाम का धार्मिक इतिहास
करीला धाम धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक कथाओं से जुड़ा एक पवित्र स्थल है।मान्यता है कि माता जानकी ने महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में लव-कुश के साथ इसी क्षेत्र में निवास किया था।मंदिर में माता जानकी के साथ महर्षि वाल्मीकि और लव-कुश की प्राचीन प्रतिमाएं स्थापित हैं।
वाल्मीकि गुफा के विशेष दर्शन
रंगपंचमी के अवसर पर वाल्मीकि गुफा के कपाट विशेष रूप से खोले जाते हैं।इन दुर्लभ दर्शनों के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु बड़ी संख्या में करीला धाम पहुंचते हैं।
राई नृत्य की अनोखी परंपरा
करीला धाम मेले की सबसे खास पहचान राई नृत्य है।कहा जाता है कि जिन दंपतियों की संतान नहीं होती, वे यहाँ मन्नत मांगते हैं और इच्छा पूरी होने पर राई नृत्य का आयोजन करवाते हैं।रंगीन लहंगों और घुंघरुओं की आवाज के बीच यह नृत्य पूरी रात चलता है।
माँ जानकी की भभूति की विशेष मान्यता
करीला धाम में मिलने वाली भभूति को चमत्कारी माना जाता है।किसान इसे अपने खेतों में छिड़कते हैं और मान्यता है कि इससे फसलों में लगने वाले कीट और बीमारियां दूर हो जाती हैं।
प्रशासन की विशेष व्यवस्थाएं
मेले में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं।
इनमें शामिल हैं
- सुरक्षा व्यवस्था
- यातायात प्रबंधन
- चिकित्सा सेवाएं
- पेयजल व्यवस्था
- पार्किंग और भीड़ नियंत्रण
प्रशासन का लक्ष्य है कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम दर्शन मिल सकें।

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