PM श्री विद्यालय झकनावदा में टीएलएम प्रदर्शनी: 80 विद्यार्थियों ने दिखाई रचनात्मक प्रतिभा
PM श्री विद्यालय झकनावदा में आयोजित शिक्षण-अधिगम सामग्री (टीएलएम) प्रदर्शनी ने विद्यालय में उत्सव का माहौल बना दिया। इस प्रदर्शनी का उद्देश्य शिक्षकों और विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई शैक्षणिक सामग्री को प्रदर्शित करना और शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, रोचक एवं व्यवहारिक बनाना था। यह आयोजन संकुल से जुड़े भेरूपाड़ा, सेमलिया, कुंम्भाखेड़ी, झोसरपाड़ा, बखतपुरा, धोलीखाली, झकनावदा कन्या शाला और मीडिल स्कूलों के विद्यार्थियों की भागीदारी से संपन्न हुआ।
छात्रों ने दिखाई अद्भुत रचनात्मकता
PM श्री विद्यालय में 80 विद्यार्थियों ने विभिन्न विषयों से संबंधित आकर्षक चार्ट, कार्यशील मॉडल, प्रोजेक्ट फाइलें, विज्ञान और गणित आधारित गतिविधि सामग्री तथा पर्यावरण, सामाजिक विज्ञान और भाषा विषयों की अभिनव प्रस्तुतियां प्रदर्शित की। विद्यार्थियों ने पूरे आत्मविश्वास के साथ अपने मॉडल और प्रोजेक्ट के बारे में उपस्थित अतिथियों और अभिभावकों को विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उनकी प्रस्तुति शैली और रचनात्मकता ने सभी का मन मोह लिया। बच्चों की मेहनत, कल्पनाशक्ति और व्यावहारिक दृष्टिकोण ने दर्शकों को प्रभावित किया।
शिक्षकों ने भी दिखाई नवीनता
प्रदर्शनी में शिक्षकों ने भी अपनी रचनात्मक क्षमता का प्रदर्शन किया। उन्होंने स्थानीय संसाधनों का उपयोग करके कम लागत में प्रभावी शिक्षण सामग्री तैयार की। इससे यह स्पष्ट हुआ कि सीमित संसाधनों के बावजूद कैसे शिक्षण को रोचक और प्रयोगात्मक बनाया जा सकता है। टीएलएम प्रदर्शनी ने विद्यार्थियों और शिक्षकों दोनों में नवाचार और सीखने की भावना को बढ़ावा दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि जनपद पंचायत उपाध्यक्ष देवकुंवर पडियार, ठाकुर धर्मसिंह डोडिया जावरा, पूर्व सांसद प्रतिनिधि राजेश काँसवा, समाजसेवी श्रेणिक कोठारी और पालक शिक्षक संघ अध्यक्ष फकीरचंद माली ने किया। इस अवसर पर पत्रकार संजय व्यास, संकुल प्राचार्य रमेश कुमार चौरसिया एवं हेमेंद्र कुमार जोशी भी उपस्थित थे।
मुख्य अतिथियों ने फीता काटकर प्रदर्शनी का औपचारिक शुभारंभ किया और विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया। विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए मॉडल, चार्ट और प्रोजेक्ट्स को देखकर अतिथियों ने बच्चों का उत्साहवर्धन किया और उनकी मेहनत की सराहना की।
शिक्षा में नवाचार और व्यावहारिकता का महत्व
अपने संबोधन में मुख्य अतिथियों ने कहा कि इस प्रकार की प्रदर्शनी बच्चों में आत्मविश्वास, रचनात्मकता और विषय के प्रति रुचि बढ़ाने का कार्य करती है। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह व्यवहारिक और प्रयोगात्मक भी होनी चाहिए। शिक्षण में प्रयोगात्मक विधियों के समावेश से विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास संभव होता है और उन्हें सीखने में अधिक रुचि आती है।
विद्यालय का वातावरण बना उत्सवमय
टीएलएम प्रदर्शनी के सफल आयोजन से विद्यालय परिसर में उत्सव जैसा माहौल बन गया। अभिभावकों और ग्रामीणों ने भी इस पहल की सराहना की। उन्होंने विद्यार्थियों की रचनात्मकता और शिक्षकों की मेहनत को देखकर संतोष व्यक्त किया। प्रदर्शनी ने यह स्पष्ट किया कि सही मार्गदर्शन और संसाधनों के प्रयोग से बच्चों में असाधारण प्रतिभा को विकसित किया जा सकता है।
प्रमुख उपस्थित अतिथिगण और शिक्षकगण
इस अवसर पर जन शिक्षक सुरेंद्र सिंगाड़, ज्योति सोलंकी, पद्मसिंह टैगोर, प्रतिभा सोलंकी, शिक्षक कैलाश कटारा, संदीप पाटीदार, दिनेश बघेल, शिवानी चौहान, दिनेश राठौड़, रिंकू पवार, पूजा कटारे, प्रेमलता पाटीदार, संतोष कटारा, लक्ष्मी चौधरी और ज्योति गेहलोत आदि उपस्थित थे। उन्होंने भी विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों का अवलोकन किया और उन्हें प्रोत्साहित किया।
स्थानीय संसाधनों का उपयोग और शिक्षा में प्रभाव
प्रदर्शनी में यह देखने को मिला कि शिक्षकों और विद्यार्थियों ने स्थानीय संसाधनों का उपयोग करके कम लागत में भी आकर्षक और प्रभावी शिक्षण सामग्री तैयार की। इससे बच्चों में रचनात्मक सोच, प्रयोगात्मक ज्ञान और व्यावहारिक दृष्टिकोण विकसित हुआ। यह पहल न केवल शिक्षण प्रक्रिया को रोचक बनाती है, बल्कि विद्यार्थियों में आत्मनिर्भरता और नवीनता की भावना को भी बढ़ावा देती है।
प्राचार्य का आभार और भविष्य की योजनाएं
कार्यक्रम के अंत में संकुल प्राचार्य ने सभी अतिथियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी इस प्रकार के शैक्षणिक नवाचारों को बढ़ावा दिया जाएगा। टीएलएम प्रदर्शनी ने न केवल विद्यार्थियों के सीखने की रुचि बढ़ाई, बल्कि शिक्षकों को भी नई शिक्षण तकनीकों और नवाचारों के प्रयोग के लिए प्रेरित किया।
निष्कर्ष
PM श्री विद्यालय झकनावदा में आयोजित टीएलएम प्रदर्शनी ने यह साबित किया कि शिक्षण को रोचक, प्रभावी और व्यवहारिक बनाने में विद्यार्थियों और शिक्षकों की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। 80 विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत विभिन्न मॉडल, प्रोजेक्ट्स और चार्ट्स ने दर्शकों को प्रभावित किया और विद्यालय में सीखने और सृजनात्मकता का उत्सव स्थापित किया।
इस प्रदर्शनी ने यह भी संदेश दिया कि शिक्षा केवल कक्षाओं और पुस्तकों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। प्रयोगात्मक और व्यावहारिक शिक्षा से बच्चों में रचनात्मकता, आत्मविश्वास और विषयों के प्रति गहरी समझ विकसित होती है। टीएलएम प्रदर्शनी के आयोजन से यह स्पष्ट हुआ कि स्थानीय संसाधनों और रचनात्मक सोच के माध्यम से कम लागत में भी प्रभावी शिक्षण सामग्री तैयार की जा सकती है।
विद्यालय परिसर में इस प्रदर्शनी के दौरान उत्पन्न उत्साह और सहभागिता ने सभी को यह महसूस कराया कि शिक्षा में नवाचार, अनुभव और रचनात्मकता का समावेश विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है।
