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मध्य प्रदेश High Court कोर्ट ने बाइक टैक्सी को बताया गैरकानूनी, कहा मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन

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Published On: 9 February 2026
MP High Court
— "MP High Court ने बाइक टैक्सी को किया गैरकानूनी घोषित – यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि

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मध्य प्रदेश High Court कोर्ट ने बाइक टैक्सी को बताया गैरकानूनी, कहा  मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन

इंदौर/भोपाल: मध्य प्रदेश High Court ने हाल ही में बाइक टैक्सी सेवाओं को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। इंदौर बेंच के माध्यम से लिया गया यह निर्णय प्रदेश में चल रही सभी बाइक टैक्सी सेवाओं के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश का काम करेगा। कोर्ट ने बाइक टैक्सी को गैरकानूनी करार दिया और स्पष्ट किया कि इसका संचालन मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 और राज्य द्वारा जारी एग्रीगेटर गाइडलाइंस का उल्लंघन है।

High Court का रुख और आदेश

High Court  ने इंदौर समेत पूरे प्रदेश में बाइक टैक्सी पर सख्त रुख अपनाया। अदालत ने कहा कि किसी भी दोपहिया वाहन का सार्वजनिक परिवहन के रूप में उपयोग केवल तभी वैध होगा जब वह सभी कानूनी परमिट, पंजीकरण और सुरक्षा नियमों का पालन करता हो। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सिर्फ मोबाइल एप के जरिए रजिस्ट्रेशन या बुकिंग सुविधा देना पर्याप्त नहीं है।

डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई के दौरान मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 के प्रासंगिक प्रावधानों का विस्तार से विश्लेषण किया। कोर्ट ने कहा कि दोपहिया वाहनों को बिना वैध परमिट यात्रियों को ले जाने के लिए उपयोग करना कानून का उल्लंघन है, और यह सार्वजनिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी खतरनाक है।

सुरक्षा से समझौता अस्वीकार्य

High Court ने यह भी निर्देश दिया कि राज्य सरकार द्वारा जारी एग्रीगेटर गाइडलाइंस का सख्ती से पालन अनिवार्य है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी एग्रीगेटर कंपनी को केवल ऐप प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने या रजिस्ट्रेशन सुविधा देने के आधार पर वैधता नहीं दी जा सकती। इसके साथ ही, कोर्ट ने राज्य सरकार और परिवहन विभाग को निर्देश दिए कि वे अवैध रूप से सार्वजनिक परिवहन के लिए इस्तेमाल किए जा रहे दोपहिया वाहनों की कड़ाई से जांच करें और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करें।

कोर्ट ने यह भी कहा कि यात्रियों की सुरक्षा से समझौता किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है। इस निर्णय के माध्यम से High Court ने यह संदेश दिया कि सड़क सुरक्षा और नियमों का पालन सर्वोपरि है।

मामले की पृष्ठभूमि

मामला उन बाइक टैक्सी सेवाओं से जुड़ा है जो ओला, उबर और रैपिडो जैसे एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म के माध्यम से संचालित हो रही हैं। इंदौर की सड़कों पर सैकड़ों दोपहिया वाहन बिना वैध परमिट के यात्रियों को ले जा रहे थे। हाई कोर्ट ने इसे कानून और नियमों के खिलाफ पाया।

कोर्ट में दायर जनहित याचिकाओं में यह मामला उठाया गया कि कैसे ये बाइक टैक्सी सेवाएं सार्वजनिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था के लिए खतरा बन रही हैं। अदालत ने याचिका का निराकरण करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि भविष्य में यदि नियमों की अनदेखी होती है, तो एग्रीगेटर कंपनियों और संबंधित एजेंसियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

High Court का आदेश: क्या करना होगा?

हाई कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि:

  1. राज्य सरकार और परिवहन विभाग सभी अवैध बाइक टैक्सी सेवाओं की पहचान और जांच करें।
  2. किसी भी बाइक को सार्वजनिक परिवहन के रूप में इस्तेमाल करने से पहले वैध परमिट, पंजीकरण, बीमा और सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य है।
  3. एग्रीगेटर कंपनियों को राज्य द्वारा जारी गाइडलाइंस के अनुरूप संचालन सुनिश्चित करना होगा।
  4. यात्रियों की सुरक्षा, हेलमेट, बीमा और नियमों का पालन सुनिश्चित करना अनिवार्य है।
बाइक टैक्सी पर असर

हाई कोर्ट के इस सख्त आदेश का असर इंदौर समेत पूरे प्रदेश के शहरों में नजर आने की संभावना है। परिवहन विभाग अब ऐसे सभी दोपहिया वाहनों की सख्ती से जांच और कार्रवाई कर सकता है जो अवैध रूप से सार्वजनिक परिवहन के रूप में इस्तेमाल हो रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला सड़क सुरक्षा और कानून के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके साथ ही, यह बाइक टैक्सी सेवाओं के नियमन और वैध संचालन की प्रक्रिया को स्पष्ट करता है।

राज्य सरकार और एजेंसियों की जिम्मेदारी

High Court ने राज्य सरकार और परिवहन विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे कानून के उल्लंघन पर कार्रवाई सुनिश्चित करें। यह निर्णय न केवल सार्वजनिक सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह व्यावसायिक और नियामक ढांचे को भी मजबूती देता है।

भविष्य की संभावनाएं

High Courtने यह साफ कर दिया कि यदि भविष्य में कोई एग्रीगेटर या एजेंसी रूल्स और गाइडलाइंस का उल्लंघन करती है, तो इसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसका अर्थ है कि प्रदेश में बाइक टैक्सी सेवाओं को अब वैध नियमों और परमिटों के तहत संचालित होना होगा, अन्यथा इसे गैरकानूनी माना जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने और यात्रियों के हितों की रक्षा के लिहाज से एक सही दिशा में कदम है। इस फैसले के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि बाइक टैक्सी को नियंत्रित और कानूनी ढांचे में लाना अनिवार्य है।

इस प्रकार, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का यह फैसला बाइक टैक्सी सेवाओं के लिए चेतावनी और मार्गदर्शन दोनों है। अब राज्य सरकार, परिवहन विभाग और एग्रीगेटर कंपनियों को नियमों का पालन सुनिश्चित करना होगा ताकि यात्री और चालक दोनों सुरक्षित रह सकें और कानून की अवहेलना न हो।

 

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