Jaishankar अमेरिका तो डोभाल सऊदी पहुंचे, भारत ने कूटनीति से पलट दिया गेम
अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि वह दबाव की राजनीति नहीं, बल्कि संतुलित और रणनीतिक कूटनीति में विश्वास करता है। अमेरिका और सऊदी अरब के साथ हालिया घटनाक्रमों ने साफ कर दिया है कि भारत ने वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति और मजबूत की है, जबकि पाकिस्तान एक बार फिर दिखावे और खोखले दावों में उलझकर रह गया है।
अमेरिका के साथ भारत की ट्रेड डील और सऊदी अरब के साथ बढ़ते रणनीतिक संबंधों ने पाकिस्तान को बड़ा झटका दिया है। खासतौर पर ऐसे समय में जब पाकिस्तान के सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व ने अमेरिका को खुश करने के लिए हर संभव कोशिश की थी।
ट्रंप प्रशासन और टैरिफ का खेल
India-US के बीच हाल ही में हुए व्यापार समझौते के बाद ट्रंप प्रशासन ने भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। यह फैसला भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत माना जा रहा है। वहीं, पाकिस्तान पर यह टैरिफ 19 प्रतिशत तय किया गया है, जो यह दिखाता है कि तमाम कोशिशों के बावजूद पाकिस्तान अमेरिका से बेहतर सौदा हासिल नहीं कर पाया।
गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा सत्ता में आने के बाद पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने उन्हें प्रभावित करने की हरसंभव कोशिश की। यहां तक कि पाकिस्तान की तथाकथित हाइब्रिड सरकार ने ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित करने तक का कदम उठा लिया।
ब्रीफकेस में ‘खजाना’ और पाकिस्तान की फजीहत
इस दौरान व्हाइट हाउस से सामने आई एक तस्वीर ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं, जिसमें पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक ब्रीफकेस खोलकर दिखाते नजर आए। दावा किया गया कि उस ब्रीफकेस में पाकिस्तान के खनिज संसाधनों और कीमती पत्थरों की जानकारी थी, जिसे अमेरिका के सामने एक तरह से ‘लुभावने प्रस्ताव’ के तौर पर पेश किया गया।
लेकिन इसके उलट, भारत ने न तो ट्रंप की शर्तों पर कोई समझौता किया और न ही उन्हें खुश करने के लिए किसी तरह का राजनीतिक दिखावा किया। भारत ने अमेरिकी दबाव के बावजूद रूस से कच्चे तेल की खरीद जारी रखी और 50 प्रतिशत टैरिफ की धमकियों के आगे भी झुकने से इनकार कर दिया।
आखिरकार ट्रंप प्रशासन को खुद भारत के पास आकर ट्रेड डील करनी पड़ी, जिससे पाकिस्तान में शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर की जमकर आलोचना हुई।
ट्रेड डील के बाद अमेरिका पहुंचे जयशंकर
India-US व्यापार समझौते के तुरंत बाद अमेरिका ने भारत को क्रिटिकल मिनरल्स पर आयोजित पहली मंत्री स्तरीय बैठक में शामिल होने का न्योता दिया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर 2 से 4 फरवरी के बीच अमेरिका दौरे पर रहे और इस अहम बैठक में हिस्सा लिया।
जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी की। इस बातचीत में क्वाड (भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान) के तहत द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। दोनों नेताओं ने परमाणु सहयोग, रक्षा संबंध, अहम खनिज, व्यापार और ऊर्जा जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।
इसके अलावा, जयशंकर ने अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट से भी मुलाकात की, जहां भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने पर जोर दिया गया।
Jaishankar अमेरिका, तो डोभाल सऊदी अरब में
जहां एक ओर Jaishankar अमेरिका में भारत का पक्ष मजबूती से रख रहे थे, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल पांच दिवसीय दौरे पर सऊदी अरब पहुंचे। यह दौरा खास तौर पर इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि पिछले साल पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट हुआ था।
सूत्रों के मुताबिक, डोभाल के इस दौरे के दौरान सऊदी अरब भारत को पाकिस्तान के साथ हुए डिफेंस पैक्ट को लेकर ब्रीफ करेगा। इसके साथ ही गाजा शांति योजना और पश्चिम एशिया में सुरक्षा हालात पर भी चर्चा होने की संभावना है।
सऊदी अरब का पाकिस्तान को कड़ा संदेश
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सऊदी अरब ने पाकिस्तान को एक और बड़ा झटका दिया है। 28 जनवरी को हुई द्विपक्षीय सिक्योरिटी वर्किंग ग्रुप की बैठक में सऊदी अरब ने पहलगाम आतंकी हमले और लाल किले पर हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की।
भारत ने 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया था। इसके जवाब में 7 मई को भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में स्थित आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई की थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच चार दिनों तक सैन्य संघर्ष चला, जो 10 मई को संघर्षविराम के साथ समाप्त हुआ।
युद्ध के बाद पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ डिफेंस पैक्ट किया, लेकिन सऊदी द्वारा पहलगाम हमले की निंदा को पाकिस्तान के आतंकवादी चेहरे पर करारा तमाचा माना जा रहा है।
भारत की कूटनीति, पाकिस्तान की बेचैनी
सऊदी अरब ने हाल ही में नई दिल्ली में हुई भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लिया, जहां फिलिस्तीनी मुद्दे पर टू-स्टेट सॉल्यूशन का समर्थन किया गया। यह भारत की पश्चिम एशिया नीति की मजबूती को दर्शाता है।
कुल मिलाकर, अमेरिका और सऊदी अरब के साथ भारत की सक्रिय और संतुलित कूटनीति ने यह साफ कर दिया है कि वैश्विक मंच पर भारत अब शर्तों पर नहीं, बल्कि बराबरी के स्तर पर बातचीत करता है। वहीं, पाकिस्तान दिखावे की राजनीति और असफल दांव-पेंच में उलझकर एक बार फिर खुद को अलग-थलग करता नजर आ रहा है।

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