Silver Price रिव्यू: एक साल में 4 गुना बढ़े चांदी के दाम, 24 जनवरी, शनिवार को आपके शहर में क्या भाव?
साल 2025 से 2026 की शुरुआत तक Silver ने निवेशकों और सर्राफा बाजार में तहलका मचा दिया है। पिछले एक साल में Silver की कीमतों में जो वृद्धि देखने को मिली, वह इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी में से एक मानी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी ने पहली बार 100 डॉलर प्रति औंस का रिकॉर्ड स्तर पार किया है, वहीं भारत में चांदी की कीमतें 3,40,000 रुपये प्रति किलो के पार पहुंच गई हैं।
24 जनवरी, 2026 को देश के प्रमुख शहरों में चांदी का भाव निम्नलिखित है:
- दिल्ली: 3,40,010 रुपये/किलो
- मुंबई: लगभग 3,40,000 रुपये/किलो
- चेन्नई: 3,45,100 रुपये/किलो
- हैदराबाद: बाजार से थोड़ा ऊपर
- अहमदाबाद और वडोदरा: लगभग 3,40,100 रुपये/किलो
पिछले एक साल में चांदी की तेजी
अगर एक साल पहले यानी 24 जनवरी, 2025 की बात करें, तो उस समय चांदी का भाव लगभग 84,792 रुपये प्रति किलो था। इसके बाद एक साल के भीतर चांदी का भाव 3,40,000 रुपये प्रति किलो के पार पहुंच गया। यानी 1 साल में चांदी लगभग 4 गुना (4.01 times) महंगी हो गई है।
कुल बढ़ोतरी देखें तो यह लगभग 2,55,208 रुपये प्रति किलो के करीब है, और प्रतिशत में देखें तो लगभग 301% की वृद्धि दर्ज की गई है। यह आंकड़े सिर्फ सर्राफा बाजार में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चांदी के बढ़ते महत्व को दर्शाते हैं।
न्यूयॉर्क के स्पॉट मार्केट में चांदी की कीमतें 100 डॉलर प्रति औंस को पार कर गईं। 23 जनवरी, 2026 को चांदी की हाजिर कीमतें (Spot Prices) 4.2% बढ़कर 100.29 डॉलर/औंस तक पहुंच गईं।
Silver के भाव बढ़ने के कारण
पिछले कुछ वर्षों में चांदी की कीमतों में तेजी के पीछे कई कारण काम कर रहे हैं। इनमें प्रमुख हैं:
- उद्योग और निवेश में बढ़ी मांग – चांदी का इस्तेमाल ज्वैलरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और औद्योगिक उपकरणों में लगातार बढ़ रहा है। इसके कारण मांग खदानों से निकलने वाली चांदी से कहीं अधिक हो गई है।
- बाजार में चांदी की कमी – खानों से उतनी चांदी नहीं निकल पा रही जितनी की जरूरत है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय और देशी बाजार में कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है।
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में रिकॉर्ड – अमेरिका, यूरोप और एशिया के बाजारों में चांदी की कीमतों में लगातार उछाल हो रहा है। 2025 के अंत में चांदी की कीमतें दोगुनी से भी अधिक हो गई थीं।
- मुद्रास्फीति और निवेश विकल्प – गोल्ड और सिल्वर दोनों ही निवेशकों के लिए सुरक्षित विकल्प माने जाते हैं। डॉलर और रुपये की कमजोरी के चलते निवेशक चांदी में अपनी पूंजी लगाते हैं।
- वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक तनाव – युद्ध, तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और मुद्रा बाजार की अस्थिरता भी चांदी के भाव पर असर डाल रही है।
शहरवार Silver की कीमतें
देश के अलग-अलग शहरों में Silver के भाव में हल्का अंतर देखने को मिलता है। उदाहरण के तौर पर, चेन्नई में चांदी 3,45,100 रुपये प्रति किलो के स्तर पर है, जो दिल्ली और मुंबई की तुलना में अधिक है। हैदराबाद में भी यह भाव उससे ऊपर है। अहमदाबाद और वडोदरा में चांदी का भाव लगभग दिल्ली और मुंबई के समान 3,40,100 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गया है।
निवेशकों के लिए संकेत
- Silver की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, इसलिए छोटी अवधि के निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।
- दीर्घकालीन निवेशकों के लिए यह अवसर लाभदायक साबित हो सकता है, क्योंकि चांदी हमेशा मुद्रास्फीति और आर्थिक अनिश्चितता में सुरक्षित निवेश का विकल्प मानी जाती है।
- बाजार में उतार-चढ़ाव के चलते निवेश से पहले बाजार और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर नजर रखना जरूरी है।
अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण
23 जनवरी, 2026 को Silver ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 100 डॉलर प्रति औंस का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया। पिछले साल जनवरी से अब तक चांदी में 225% की वृद्धि हुई है। यह बढ़ोतरी अमेरिका, यूरोप और एशिया के निवेशकों के लिए आकर्षक अवसर प्रस्तुत करती है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वापसी और वैश्विक आर्थिक नीतियों के चलते चांदी में तेजी आई है। पिछले साल 2025 में चांदी की कीमतें दोगुनी से भी अधिक हो गई थीं, और नए साल की शुरुआत में अब तक इसमें 40% का उछाल दर्ज किया गया।
भविष्य की संभावनाएं
विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी के भाव में और तेजी आ सकती है। इसके पीछे कारण हैं:
- औद्योगिक मांग में वृद्धि: इलेक्ट्रॉनिक्स, फोटोग्राफी, और सौर ऊर्जा उपकरणों में चांदी की लगातार जरूरत बढ़ रही है।
- वैश्विक निवेशकों की रुचि: अमेरिका और यूरोप के निवेशक चांदी को सुरक्षित निवेश मानते हैं।
- मुद्रास्फीति और आर्थिक अस्थिरता: रुपये और डॉलर के उतार-चढ़ाव का असर चांदी के भाव पर पड़ता है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि निवेशकों को लंबे समय तक चांदी में निवेश करने पर विचार करना चाहिए। छोटी अवधि के निवेश में उतार-चढ़ाव से नुकसान होने की संभावना रहती है।
निष्कर्ष
पिछले एक साल में चांदी ने निवेशकों को जो लाभ दिया है, वह अभूतपूर्व है। 24 जनवरी, 2026 को भारत में चांदी की कीमतें 3,40,000 रुपये प्रति किलो के पार पहुंच चुकी हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह 100 डॉलर प्रति औंस का स्तर छू चुकी है।
Silver के बढ़ते दाम निवेशकों के लिए आकर्षक अवसर प्रस्तुत करते हैं, लेकिन इस तेजी के चलते सावधानी भी आवश्यक है। यदि आप निवेश करना चाहते हैं, तो बाजार की चाल, अंतरराष्ट्रीय घटनाओं और सर्राफा बाजार के रुझानों पर नजर रखना अनिवार्य है।
चांदी का यह रिकॉर्ड हाई न केवल सर्राफा बाजार के लिए बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था और निवेशकों के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत है।
