जैन समाज की मांगें पूरी होने पर देशभर में खुशी की लहर। सम्मेद शिखरजी रोपवे रद्द और गिरनार जी में CCTV आदेश से समाज संतुष्ट।
जैन समाज की मांगें पूरी: आस्था और संवेदनशीलता की ऐतिहासिक जीत
जैन समाज की मांगें पूरी होना केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान है। केंद्र सरकार द्वारा जैन समाज की वर्षों पुरानी दो महत्वपूर्ण मांगों को स्वीकार किए जाने से पूरे देश में जैन समाज में हर्ष और संतोष का वातावरण है।
यह निर्णय समाज की एकजुटता, जनप्रतिनिधियों के सतत प्रयास और सरकार की संवेदनशील सोच का प्रत्यक्ष उदाहरण है।
जैन समाज की मांगें पूरी: सम्मेद शिखरजी पर रोपवे नहीं लगेगा
श्री सिद्धक्षेत्र सम्मेद शिखरजी, जो जैन समाज का सर्वोच्च तीर्थ माना जाता है, वहां प्रस्तावित रोपवे (झूला) परियोजना को अब पूरी तरह से निरस्त कर दिया गया है।
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि जैन समाज लंबे समय से इस मांग को उठा रहा था क्योंकि रोपवे से तीर्थ की पवित्रता, तपस्या और आध्यात्मिक वातावरण प्रभावित होने की आशंका थी।
केंद्र सरकार द्वारा इस मांग को मान लेने से यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार धार्मिक भावनाओं को गंभीरता से समझती है।
जैन समाज की मांगें पूरी: गिरनार जी वंदना मार्ग पर CCTV कैमरे
दूसरी बड़ी उपलब्धि के रूप में सिद्धक्षेत्र गिरनार जी के वंदना मार्ग पर सभी प्रमुख स्थानों पर CCTV कैमरे लगाने के आदेश जारी किए गए हैं।
इस निर्णय से श्रद्धालुओं की सुरक्षा, अनुशासन और तीर्थ क्षेत्र की मर्यादा को बनाए रखने में मदद मिलेगी। यह कदम विशेष रूप से महिला, वृद्ध और बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करेगा।
सांसद शंकर लालवानी की भूमिका सराहनीय
इंदौर नगर के सांसद शंकर लालवानी की भूमिका इस पूरे प्रयास में अत्यंत महत्वपूर्ण रही। विश्व जैन संगठन, भारत वर्षीय तीर्थ क्षेत्रीय कमेटी एवं इंदौर दिगम्बर जैन समाज के निरंतर संवाद और प्रयासों को उन्होंने केंद्र सरकार तक मजबूती से रखा।
उनके प्रयासों से यह संभव हो पाया कि जैन समाज की मांगें पूरी हो सकीं।
समाज के वरिष्ठजनों ने प्रकट किया आभार
इस निर्णय पर इंदौर दिगम्बर जैन समाज के वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. जैनेन्द्र जैन,
महावीर ट्रस्ट के अध्यक्ष अमित कासलीवाल,
विश्व जैन संगठन के मयंक जैन,
फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोहर झांझरी,
भारत वर्षीय तीर्थ रक्षा कमेटी के हंसमुख गांधी, टी.के. वेद,
राष्ट्रीय शिरोमणि संरक्षिका श्रीमती पुष्पा कासलीवाल,
रेखा जैन, श्रीफल जैन, श्रीमती मुक्ता जैन सहित अनेक समाजजनों ने केंद्र सरकार के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
धार्मिक आस्था और परंपरा की जीत
जैन समाज के लिए तीर्थ केवल स्थान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम और साधना का मार्ग हैं। ऐसे में यह निर्णय आने वाली पीढ़ियों के लिए धार्मिक विरासत को सुरक्षित रखने वाला सिद्ध होगा।
जैन समाज की मांगें पूरी होना यह संदेश देता है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण और संगठित प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाते।
निष्कर्ष
यह निर्णय केवल जैन समाज के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक सकारात्मक उदाहरण है कि आस्था, संवाद और संवेदनशीलता से समाधान संभव हैं।
जैन समाज की मांगें पूरी होना निश्चित ही आने वाले समय में समाज और सरकार के बीच विश्वास को और मजबूत करेगा।
