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Ujjain Mahakal: माघ कृष्ण एकादशी पर महाकालेश्वर मंदिर में आस्था का महासंगम भस्म आरती में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब

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Published On: 14 January 2026
Ujjain Mahakal:
— Ujjain Mahakal: माघ कृष्ण एकादशी पर महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती का दिव्य दृश्य, श्रद्धालुओं ने किया भगवान महाकाल के दर्शन का पुण्य लाभ

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Ujjain Mahakal: माघ कृष्ण एकादशी पर महाकालेश्वर मंदिर में आस्था का महासंगम भस्म आरती में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब

Ujjain Mahakal : माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर बुधवार तड़के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में श्रद्धा, भक्ति और आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। पावन एकादशी के अवसर पर बाबा महाकाल के दर्शन के लिए देशभर से आए हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ आधी रात से ही मंदिर परिसर और आसपास की सड़कों पर उमड़ पड़ी। ठंड के बावजूद भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा था। सभी श्रद्धालु अपने आराध्य भगवान महाकाल के दिव्य दर्शन की अभिलाषा लिए घंटों कतारों में खड़े रहे।

प्रातः चार बजे जैसे ही मंदिर के पट खोले गए, पूरे परिसर में “जय श्री महाकाल” के गगनभेदी जयघोष गूंज उठे। ढोल-नगाड़ों, शंखनाद और मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल के दिव्य दर्शन हुए, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं के चेहरों पर आस्था, विश्वास और आध्यात्मिक आनंद स्पष्ट झलक रहा था।

Ujjain Mahakal Darshan
“Ujjain Mahakal दरबार में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब,

भस्म आरती में अलौकिक श्रृंगार

Ujjain Mahakal माघ कृष्ण एकादशी के पावन अवसर पर भस्म आरती का विशेष आयोजन किया गया। इस दौरान भगवान महाकाल को भस्म रमाकर अत्यंत आकर्षक और अलौकिक श्रृंगार किया गया। भस्म से सजे बाबा महाकाल का स्वरूप अत्यंत दिव्य और अद्भुत दिखाई दे रहा था। मान्यता है कि भस्म आरती के समय बाबा महाकाल अपने भक्तों को विशेष कृपा प्रदान करते हैं, इसी कारण इस आरती में शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह रहता है।

भस्म आरती के दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। कई भक्तों की आंखों में आंसू और चेहरे पर संतोष व शांति का भाव दिखाई दिया। श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर भगवान महाकाल से सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और परिवार की मंगलकामना की।

परंपरागत विधि-विधान से संपन्न हुई आरती

श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि माघ मास कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर परंपरागत धार्मिक विधि-विधान के अनुसार प्रातः चार बजे भस्म आरती संपन्न की गई। सबसे पहले वीरभद्र जी से आज्ञा लेकर मंदिर के मुख्य द्वार खोले गए। इसके पश्चात गर्भगृह में विराजित भगवान महाकाल सहित सभी देवी-देवताओं का विधिवत पूजन-अर्चन किया गया।

पूजन की प्रक्रिया के दौरान मंत्रोच्चार और वैदिक विधियों का विशेष ध्यान रखा गया। मंदिर के पुजारी और पंडे पारंपरिक वेशभूषा में पूजा-अर्चना करते नजर आए, जिससे प्राचीन परंपराओं की झलक दिखाई दी।

पंचामृत और फलों के रस से हुआ जलाभिषेक

पूजन-अर्चन के पश्चात भगवान महाकाल का विशेष जलाभिषेक किया गया। इस दौरान दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत और विभिन्न फलों के रस से शिवलिंग का अभिषेक किया गया। अभिषेक के समय पूरे गर्भगृह में वैदिक मंत्रों की गूंज सुनाई देती रही।

प्रथम घंटाल बजाकर ‘हरि ओम’ के पवित्र जल से भगवान महाकाल का अभिषेक किया गया। इसके बाद कपूर आरती संपन्न हुई। कपूर आरती के दौरान गर्भगृह में फैली सुगंध और दीपों की ज्योति ने माहौल को अत्यंत पावन और आध्यात्मिक बना दिया।

नवीन मुकुट और विशेष भोग

कपूर आरती के बाद बाबा महाकाल का आकर्षक श्रृंगार किया गया। उन्हें नवीन मुकुट धारण कराया गया, जिससे उनका स्वरूप और भी भव्य नजर आया। महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से शिवलिंग पर विधिवत भस्म अर्पित की गई। इसके पश्चात झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद के साथ भस्म आरती का समापन हुआ।

आज के श्रृंगार की विशेषता यह रही कि भगवान महाकाल को भस्म से अलौकिक रूप में सजाया गया और तिल से बने पकवानों का विशेष भोग अर्पित किया गया। माघ माह में तिल का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है, इसलिए तिल के व्यंजनों का भोग अर्पण श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

साकार रूप में दर्शन देने की मान्यता

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भस्म अर्पण के पश्चात भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि भस्म आरती को महाकाल मंदिर की सबसे विशिष्ट और महत्वपूर्ण आरती माना जाता है। इस पावन अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

श्रद्धालुओं का कहना था कि भस्म आरती के दर्शन से मन को विशेष शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। कई भक्तों ने इसे अपने जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बताया।

सुरक्षा और व्यवस्थाएं

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन द्वारा सुरक्षा और व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए थे। पुलिस बल और मंदिर के स्वयंसेवक लगातार व्यवस्थाओं को संभालते नजर आए। दर्शन व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए बैरिकेडिंग की गई थी, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

श्री महाकालेश्वर मंदिर में आरती का समय
  • प्रथम भस्म आरती: प्रातः 4:00 से 6:00 बजे तक
  • द्वितीय दद्योटक आरती: प्रातः 7:30 से 8:15 बजे तक
  • तृतीय भोग आरती: प्रातः 10:30 से 11:15 बजे तक
  • चतुर्थ संध्याकालीन पूजन: सायं 5:00 से 5:45 बजे तक
  • पंचम संध्या आरती: सायं 6:30 से 7:15 बजे तक
  • शयन आरती: रात्रि 10:30 से 11:00 बजे तक

मंदिर प्रशासन ने बताया कि आरती का यह क्रम फाल्गुन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तक प्रभावी रहेगा।

माघ कृष्ण एकादशी के इस पावन अवसर पर श्री महाकालेश्वर मंदिर में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब एक बार फिर इस बात का साक्षी बना कि बाबा महाकाल की महिमा अपार है और उनकी नगरी उज्जैन सदा आस्था और भक्ति का प्रमुख केंद्र बनी हुई है।

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