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इंदौर में 75 हजार वाहन अब भी बिना हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के, ई-चालान में आ रही परेशानी

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Published On: 16 September 2026

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इंदौर में 75 हजार वाहन अब भी बिना हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के, ई-चालान में आ रही परेशानी

कैमरों में नंबर स्पष्ट नहीं होने से रेड सिग्नल तोड़ने वाले वाहनों की पहचान मुश्किल; वर्ष 2019 से पहले पंजीकृत वाहनों पर HSRP लगाना अनिवार्य

इंदौर। शहर की सड़कों पर करीब 75 हजार वाहन अब भी हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट यानी एचएसआरपी के बिना चल रहे हैं। ऐसे वाहनों के कारण यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले चालकों की पहचान और ऑनलाइन चालान की कार्रवाई में ट्रैफिक पुलिस को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। चौराहों पर लगे कैमरे कई पुरानी अथवा अमानक नंबर प्लेट को स्पष्ट रूप से पढ़ नहीं पाते, जिसका फायदा उठाकर कुछ चालक रेड सिग्नल पार करने सहित अन्य नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।

परिवहन विभाग के मुताबिक इंदौर जिले में एक अप्रैल 2019 से पहले पंजीकृत 13 लाख से अधिक वाहनों पर हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट लगाई जानी थी। वाहन ट्रांसफर, पंजीयन नवीनीकरण और परिवहन कार्यालय से जुड़े अन्य कार्यों के लिए एचएसआरपी अनिवार्य किए जाने के बाद बड़ी संख्या में वाहन मालिकों ने निर्धारित प्लेट लगवा ली। इसके बावजूद करीब 75 हजार वाहन अब भी इस प्रक्रिया से बाहर हैं।

कैमरों से पहचान और ई-चालान में समस्या

इंदौर के प्रमुख चौराहों और मार्गों पर लगे कैमरों की सहायता से यातायात नियम तोड़ने वाले वाहनों की पहचान की जाती है। कैमरे में दर्ज नंबर को वाहन के पंजीयन रिकॉर्ड से जोड़कर संबंधित मालिक के नाम ऑनलाइन चालान जारी किया जाता है।

पुरानी, अस्पष्ट, अलग डिजाइन अथवा मनमाने फॉन्ट में लिखी नंबर प्लेट होने पर कैमरा सिस्टम वाहन नंबर को सही तरीके से पढ़ नहीं पाता। ऐसी स्थिति में वाहन के पंजीकृत मालिक की पहचान करना और उसके खिलाफ ई-चालान जारी करना मुश्किल हो जाता है।

एचएसआरपी की निर्धारित बनावट होने के कारण ट्रैफिक कैमरों के लिए नंबर पढ़ना अपेक्षाकृत आसान होता है। ऐसे में सभी वाहनों पर मानक नंबर प्लेट लगने से रेड सिग्नल जंपिंग, तेज गति और अन्य यातायात उल्लंघनों के मामलों में कार्रवाई अधिक प्रभावी हो सकती है।

2019 से पहले पंजीकृत वाहनों के लिए जारी हुए थे निर्देश

वर्ष 2023 में एक अप्रैल 2019 से पहले पंजीकृत वाहनों पर हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट लगवाने के निर्देश जारी किए गए थे। शुरुआत में परिवहन विभाग की ओर से सख्ती किए जाने के बाद बड़ी संख्या में वाहन मालिकों ने प्लेट के लिए आवेदन किया।

अचानक मांग बढ़ने के कारण एचएसआरपी लगवाने के लिए लंबी प्रतीक्षा सूची बन गई थी। वाहन मालिकों को समय पर प्लेट उपलब्ध नहीं होने के कारण अंतिम तारीख भी आगे बढ़ानी पड़ी। इसके बाद वाहन पोर्टल पर बिना एचएसआरपी वाले वाहनों के ट्रांसफर, नवीनीकरण और अन्य सेवाओं को रोक दिया गया।

इस व्यवस्था के कारण अधिकांश वाहनों पर हाई सिक्योरिटी प्लेट लग गई, लेकिन हजारों वाहन अब भी बिना मानक प्लेट के दर्ज हैं। इनमें से कुछ वाहन चलन से बाहर हो चुके हो सकते हैं, जबकि कुछ का पंजीयन नवीनीकरण नहीं कराया गया है।

बिना HSRP के नहीं होगा ट्रांसफर और अन्य काम

इंदौर के क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी प्रदीप शर्मा के अनुसार, हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगने के बाद ही परिवहन कार्यालय में वाहन ट्रांसफर और अन्य आवेदन संबंधी प्रक्रिया पूरी की जाती है। सड़क पर जांच के दौरान निर्धारित नंबर प्लेट नहीं मिलने पर भी संबंधित वाहन के खिलाफ कार्रवाई की जाती है।

वाहन मालिकों को पुराने वाहन का स्वामित्व बदलने, पंजीयन नवीनीकरण कराने अथवा अन्य परिवहन सेवा लेने से पहले एचएसआरपी लगवानी होगी। ऐसे में वाहन मालिकों को कार्रवाई से बचने के लिए जल्द से जल्द प्लेट लगवाने की प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी गई है।

पांच वर्षों तक प्रभावित रही थी प्लेट लगाने की प्रक्रिया

वाहनों में हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट लगाने की प्रक्रिया इंदौर सहित मध्य प्रदेश में वर्ष 2012 में प्रारंभ हुई थी। इसके लिए लिंक उत्सव प्राइवेट लिमिटेड को 15 वर्ष का अनुबंध दिया गया था। कंपनी के कामकाज को लेकर शिकायतें सामने आने के बाद वर्ष 2014 में अनुबंध निरस्त कर दिया गया।

इसके बाद मामला न्यायालय में पहुंचने के कारण एचएसआरपी लगाने का काम प्रभावित रहा। एक अप्रैल 2019 से वाहन डीलरों को नए वाहनों पर हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट लगाने की जिम्मेदारी दी गई। इस पूरी प्रक्रिया के बीच करीब पांच वर्ष तक पुराने वाहनों में प्लेट लगाने का काम व्यवस्थित रूप से आगे नहीं बढ़ पाया।

चोरी और फर्जी नंबर प्लेट पर अंकुश में मददगार

हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट वाहन की पहचान को अधिक सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से तैयार की गई है। सामान्य नंबर प्लेट के मुकाबले इसे आसानी से निकालकर दूसरे वाहन पर लगाना कठिन होता है। इससे चोरी के वाहनों पर दूसरी नंबर प्लेट लगाने अथवा फर्जी नंबर का इस्तेमाल करने पर रोक लगाने में सहायता मिलती है।

एचएसआरपी में छेड़छाड़-रोधी तकनीक का उपयोग होता है। प्लेट पर लेजर के माध्यम से 10 अंकों की विशिष्ट पहचान संख्या अंकित होती है, जो वाहन के आधिकारिक रिकॉर्ड से जुड़ी रहती है। यह यूनिक नंबर जांच एजेंसियों को वाहन का रिकॉर्ड सत्यापित करने में मदद करता है।

दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता स्नैप लॉक

हाई सिक्योरिटी प्लेट को वाहन पर लगाने के लिए नॉन-रीयूजेबल स्नैप लॉक का उपयोग किया जाता है। एक बार प्लेट निकालने के बाद उसी लॉक को दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। यह व्यवस्था नंबर प्लेट को बार-बार बदलने और दूसरे वाहन पर लगाने की आशंका को कम करती है।

मानक डिजाइन, फॉन्ट और पहचान संख्या के कारण सीसीटीवी तथा ट्रैफिक कैमरों से वाहन की पहचान भी आसान होती है। इससे यातायात नियम तोड़ने वाले वाहन मालिक तक ऑनलाइन चालान पहुंचाने में सुविधा मिलती है।

वाहन मालिकों को जल्द पूरी करनी होगी प्रक्रिया

जिन वाहन मालिकों के पुराने वाहनों पर अब तक एचएसआरपी नहीं लगी है, उन्हें अधिकृत व्यवस्था के माध्यम से आवेदन करना चाहिए। आवेदन करते समय वाहन का पंजीयन नंबर, चेसिस नंबर और अन्य जरूरी जानकारी सही दर्ज करनी होगी।

प्लेट प्राप्त होने के बाद उसे अधिकृत केंद्र अथवा निर्धारित डीलर के माध्यम से वाहन पर लगवाया जाना चाहिए। बाजार में अनधिकृत रूप से तैयार कराई गई सामान्य नंबर प्लेट एचएसआरपी का विकल्प नहीं मानी जाएगी। नियम का पालन करने से परिवहन कार्यालय में भविष्य की प्रक्रियाएं आसान होंगी और जांच अथवा चालानी कार्रवाई से भी बचा जा सकेगा।

 

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