₹65 करोड़ की मऊ–तलेन सड़क के निर्माण पर उठे सवाल, लापरवाही के आरोपों को लेकर SDOP को सौंपा आवेदन
18 माह से शिकायत करने का दावा, भाजपा कार्यकर्ता प्रद्युम्न परमार ने कहा—हादसे के बाद भी जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं; प्रतिनिधिमंडल ने जांच और दोषियों पर प्रकरण दर्ज करने की मांग की
रिपोर्टर: मनोज कुमार पुष्पद
पड़ाना/सारंगपुर। केंद्र सड़क निधि के अंतर्गत करीब 65.50 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन मऊ–तलेन 25 किलोमीटर सड़क को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। सड़क निर्माण कार्य में कथित अनियमितता, अधिकारियों की मनमानी और लापरवाही के आरोप लगाते हुए मंगलवार को एक प्रतिनिधिमंडल ने सारंगपुर कार्यालय पहुंचकर एसडीओपी अरविंद सिंह को आवेदन सौंपा। आवेदन में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वाले निर्माण एजेंसी और लोक निर्माण विभाग के संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।
भाजपा कार्यकर्ता एवं समाजसेवी प्रद्युम्न परमार का आरोप है कि मऊ–तलेन सड़क के निर्माण में लंबे समय से अनियमितताएं सामने आ रही हैं। इस संबंध में वे करीब 18 माह से लगातार विभिन्न स्तरों पर शिकायत कर रहे हैं, लेकिन शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार विभागों की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। उनका कहना है कि यदि समय रहते शिकायतों पर गंभीरता से संज्ञान लिया जाता और निर्माण कार्य की उचित निगरानी की जाती तो स्थिति अलग हो सकती थी।
कलेक्टर से मुख्यमंत्री कार्यालय तक शिकायत करने का दावा
प्रद्युम्न परमार के अनुसार सड़क निर्माण की गुणवत्ता और कार्यप्रणाली को लेकर राजगढ़ कलेक्टर कार्यालय, लोक निर्माण विभाग, भोपाल स्थित संबंधित मंत्रालय और मुख्यमंत्री कार्यालय सहित विभिन्न स्तरों पर शिकायतें भेजी गई हैं। इसके अतिरिक्त सीएम हेल्पलाइन 181 पर भी करीब 10 शिकायतें दर्ज कराने का दावा किया गया है।
परमार का आरोप है कि लगातार शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने मामले पर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई। उनका कहना है कि लोक निर्माण विभाग के संबंधित अधिकारियों की ओर से निर्माण एजेंसी की प्रभावी निगरानी नहीं होने के कारण सड़क निर्माण से जुड़ी समस्याएं लगातार बनी रहीं।
उन्होंने आरोप लगाया कि शिकायतों की वास्तविक जांच और समस्याओं के स्थायी समाधान के बजाय कई बार केवल औपचारिक कार्रवाई की गई। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है और संबंधित विभाग एवं निर्माण एजेंसी का पक्ष भी सामने आना आवश्यक है।
10 अगस्त की घटना के बाद बढ़ा ग्रामीणों का आक्रोश
आवेदन में 10 अगस्त 2026 को क्षेत्र में हुई एक घटना का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यह घटना बेहद दुखद थी और इसके बाद स्थानीय ग्रामीणों में सड़क निर्माण की व्यवस्था तथा जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर आक्रोश बढ़ गया।
ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि सड़क निर्माण के दौरान यदि सुरक्षा व्यवस्था, निर्माण मानकों और पूर्व में की गई शिकायतों पर समय रहते पर्याप्त ध्यान दिया जाता तो परिस्थितियां अलग हो सकती थीं। हालांकि घटना के वास्तविक कारण और सड़क निर्माण से उसके संबंध का निर्धारण सक्षम जांच एजेंसी की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
घटना के बाद ग्रामीणों ने जिम्मेदार अधिकारियों और निर्माण एजेंसी पर कार्रवाई की मांग उठाई थी। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक उस समय प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष भी यह मुद्दा प्रमुखता से रखा गया था।
कलेक्टर और एसपी के समक्ष भी उठी थी कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि घटना के बाद राजगढ़ कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा और पुलिस अधीक्षक अमित तोलानी के समक्ष भी निर्माण एजेंसी तथा लोक निर्माण विभाग के संबंधित एसडीओ, जिला स्तर के अधिकारी और इंजीनियरों की भूमिका की जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की मांग की गई थी।
आरोप है कि घटना के तत्काल बाद ग्रामीणों को मामले की जांच और जिम्मेदार पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा मिला था, लेकिन शिकायतकर्ताओं के अनुसार अब तक अपेक्षित कार्रवाई दिखाई नहीं दी है।
प्रद्युम्न परमार ने आरोप लगाया कि जिन अधिकारियों और संबंधित पक्षों की भूमिका की जांच होनी चाहिए, उन्हें कार्रवाई से बचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले में किसी भी स्तर पर प्रभाव का इस्तेमाल न हो और जांच पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से की जाए।
मंगलवार को SDOP कार्यालय पहुंचा प्रतिनिधिमंडल
लगातार कार्रवाई की मांग के बीच मंगलवार, 18 अगस्त को प्रतिनिधिमंडल सारंगपुर स्थित एसडीओपी कार्यालय पहुंचा। यहां एसडीओपी अरविंद सिंह को लिखित आवेदन देकर पूरे घटनाक्रम की जांच कराने की मांग की गई।
प्रतिनिधिमंडल ने आवेदन के माध्यम से मांग की कि सड़क निर्माण से संबंधित दस्तावेजों, निर्माण गुणवत्ता, विभागीय निरीक्षण, सुरक्षा इंतजामों और पिछले 18 महीनों के दौरान की गई शिकायतों की जांच की जाए। इसके साथ ही यह भी पता लगाया जाए कि शिकायतों पर संबंधित अधिकारियों ने समय-समय पर क्या कार्रवाई की और यदि कार्रवाई नहीं हुई तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
निर्माण एजेंसी और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग
शिकायतकर्ताओं की प्रमुख मांग है कि मऊ–तलेन सड़क निर्माण से जुड़े लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों, इंजीनियरों और निर्माण एजेंसी की भूमिका की विस्तृत जांच हो। यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही, नियमों की अनदेखी अथवा निर्माण मानकों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
प्रद्युम्न परमार ने कहा कि यह मामला किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि जनहित और क्षेत्र के हजारों लोगों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। करोड़ों रुपये की लागत से बनने वाली सड़क से क्षेत्रवासियों को बेहतर और सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलनी चाहिए। ऐसे में निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों से किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए।
निष्पक्ष जांच के बाद सामने आएगी वास्तविक स्थिति
मऊ–तलेन सड़क निर्माण को लेकर लगाए गए आरोप गंभीर हैं। शिकायतकर्ताओं ने जहां विभागीय अधिकारियों और निर्माण एजेंसी की भूमिका पर सवाल उठाए हैं, वहीं मामले में संबंधित लोक निर्माण विभाग, निर्माण एजेंसी और प्रशासन का विस्तृत पक्ष सामने आना भी जरूरी है।
अब निगाह इस बात पर है कि मंगलवार को एसडीओपी को दिए गए आवेदन के बाद मामले में किस स्तर पर जांच शुरू होती है और शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोपों पर प्रशासन क्या कार्रवाई करता है। ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच कर वास्तविक तथ्य सार्वजनिक किए जाएं तथा यदि किसी अधिकारी, इंजीनियर या निर्माण एजेंसी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
