366.94 लाख के निर्माणाधीन पुल पर पहली बारिश में सवाल, ग्रामीणों ने गुणवत्ता जांच की मांग
चंदला। चंदला-बंसिया गौहानी मार्ग पर उमरी नाले में निर्माणाधीन पुल तेज बारिश के बाद क्षतिग्रस्त होने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब 366.94 लाख रुपये की लागत से बनाए जा रहे इस पुल के एक हिस्से को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर आपत्तियां दर्ज कराते हुए पूरे निर्माण की तकनीकी जांच और गुणवत्ता परीक्षण कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के दौरान पर्याप्त मात्रा में सरिया और अन्य निर्माण सामग्री का उपयोग नहीं किया गया। उनका दावा है कि पुल के पिलर और स्लैब निर्माण में गुणवत्ता के निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया। तेज बारिश के बाद नाले में पानी का बहाव बढ़ा, जिसके बाद निर्माणाधीन संरचना का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया।
मलबा हटाने को लेकर भी उठे सवाल
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से का मलबा रात में हटाया गया। ग्रामीणों के मुताबिक घटना से संबंधित वीडियो भी सामने आया है, जिसके आधार पर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है।
हालांकि लोक निर्माण विभाग के ईई आशीष भारती ने अलग जानकारी दी है। उनके अनुसार 4 अगस्त को उपयंत्री और एसडीओ ने ठेकेदार की मौजूदगी में निर्माणाधीन स्लैब कल्वर्ट का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान कुछ कमियां मिलने पर सुधार के निर्देश दिए गए थे। विभागीय अधिकारी के मुताबिक पुल पानी में बहा नहीं है, बल्कि आगे संभावित नुकसान से बचाने के लिए ठेकेदार द्वारा उसे गिराया गया है।
ग्रामीणों ने उठाए सवाल
विभाग की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण के बावजूद ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण मजबूत और निर्धारित मानकों के अनुरूप था, तो उसे गिराने की आवश्यकता क्यों पड़ी। वहीं यदि निर्माण में कमियां थीं, तो निर्माण के दौरान गुणवत्ता की निगरानी किस स्तर पर की गई, यह भी जांच का विषय है।
ग्रामीणों का कहना है कि करीब 366.94 लाख रुपये की लागत वाली परियोजना में गुणवत्ता और तकनीकी मानकों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने निर्माण में इस्तेमाल सामग्री, सरिया, सीमेंट, कंक्रीट और पिलर की मजबूती की विशेषज्ञों से जांच कराने की मांग की है।

कई गांवों का आवागमन प्रभावित
पुल के क्षतिग्रस्त होने से आसपास के कई गांवों के लोगों की परेशानी बढ़ गई है। जुड़गुड़ू, बल्दूपुरवा, बिहारगंज, गोविंदपुर, मकारी, सिमरिया और गुलौरा सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों का आवागमन प्रभावित होने की बात कही जा रही है।
ग्रामीणों के अनुसार बारिश के दौरान नाले में पानी बढ़ जाने से रास्ता पार करना मुश्किल हो जाता है। स्कूली बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जबकि मरीजों को भी अस्पताल तक पहुंचाने में दिक्कतें आ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नाले के दूसरी ओर करीब तीन किलोमीटर क्षेत्र में वाहन पहुंचना भी मुश्किल हो गया है।
वैकल्पिक रास्ते की व्यवस्था नहीं होने का आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पुल निर्माण के दौरान आवागमन के लिए पर्याप्त वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था नहीं की गई। ऐसे में निर्माणाधीन पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद समस्या और गंभीर हो गई है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से तत्काल सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि स्कूली बच्चों, मरीजों, किसानों और रोजाना आवागमन करने वाले ग्रामीणों को परेशानी न हो।
तकनीकी जांच की मांग
ग्रामीणों के एक समूह ने निर्माण कार्य की तकनीकी जांच, इस्तेमाल की गई निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच और निर्माण की निगरानी से जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पुल का हिस्सा तेज बहाव के कारण क्षतिग्रस्त हुआ, निर्माण में तकनीकी कमी थी या विभागीय निर्देशों के तहत उसे जानबूझकर हटाया गया।
मामले में अब निगाहें प्रशासन और लोक निर्माण विभाग की जांच पर टिकी हैं। यदि तकनीकी जांच कराई जाती है तो निर्माण की वास्तविक गुणवत्ता, जिम्मेदारी और पुल के क्षतिग्रस्त होने के कारणों की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
करीब 3.66 करोड़ रुपये की लागत वाले इस निर्माण को लेकर ग्रामीणों की मांग है कि जांच निष्पक्ष और विशेषज्ञों की निगरानी में हो। साथ ही दोष सामने आने पर जिम्मेदार एजेंसी या संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
फिलहाल सवाल यही है कि पहली तेज बारिश में निर्माणाधीन पुल को नुकसान पहुंचने के पीछे वास्तविक कारण क्या रहा—नाले का तेज बहाव, निर्माण की तकनीकी खामी या कोई अन्य वजह। इसका जवाब विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
