सीमाओं के फेर में फंसा 2 किमी का मार्ग, जान जोखिम में डालकर स्कूल जाने को मजबूर नौनिहाल
दो पंचायतों और दो विधानसभा क्षेत्रों के बीच अटका सड़क निर्माण, ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी
राघौगढ़/चाचौड़ा। ग्राम पंचायत मोहम्मदपुर बहादुर के पुरा मजरा भेरूगढ़ से महुआ पुरा, बड़ौदा खुर्द होते हुए मकसूदनगढ़ को जोड़ने वाला लगभग 2 किलोमीटर लंबा मुख्य मार्ग लंबे समय से बदहाली का शिकार है। सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे, कीचड़ और जलभराव के कारण ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सबसे अधिक परेशानी स्कूल जाने वाले छोटे-छोटे बच्चों को हो रही है, जिन्हें प्रतिदिन खराब सड़क से होकर गुजरना पड़ता है।
बारिश के दिनों में इस मार्ग की स्थिति और भी बदतर हो जाती है। सड़क के गड्ढों में पानी भर जाने तथा कीचड़ फैलने से पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता है। ऐसे में बच्चों के फिसलकर गिरने और चोटिल होने का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों का आरोप है कि लंबे समय से समस्या सामने होने के बावजूद जिम्मेदार विभागों द्वारा स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी पहल नहीं की गई है।
दो पंचायतों और दो विधानसभा क्षेत्रों की सीमा बनी बाधा
ग्रामीणों के अनुसार यह मार्ग ग्राम पंचायत मोहम्मदपुर और ग्राम पंचायत कंजाई की सीमा से जुड़ा हुआ है। इसके अलावा क्षेत्र चाचौड़ा और राघौगढ़ विधानसभा क्षेत्रों की सीमा में भी आता है। ग्रामीणों का कहना है कि दो पंचायतों और दो विधानसभा क्षेत्रों के बीच स्थित होने के कारण सड़क निर्माण की जिम्मेदारी को लेकर समन्वय का अभाव बना हुआ है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक यही स्थिति इस महत्वपूर्ण मार्ग के विकास में सबसे बड़ी बाधा बन गई है। वर्षों से ग्रामीण सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें स्थायी सड़क सुविधा नहीं मिल सकी है। ग्रामीणों का कहना है कि सीमा और विभागीय प्रक्रिया का हवाला देकर समस्या को टालने के बजाय संबंधित पंचायत एवं प्रशासन को आपसी समन्वय से इसका समाधान निकालना चाहिए।
गड्ढों और कीचड़ से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित
इस मार्ग की बदहाली का सबसे गंभीर असर स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है। रोजाना स्कूल जाने वाले छोटे बच्चे खराब रास्ते से गुजरने को मजबूर हैं। बारिश के दौरान सड़क पर कीचड़ और पानी भर जाने से बच्चों के लिए पैदल निकलना मुश्किल हो जाता है।
ग्रामीणों के अनुसार कई बार बच्चे रास्ते में फिसलकर गिर जाते हैं। इससे उनके कपड़े खराब होने के साथ चोट लगने का खतरा भी बना रहता है। खराब सड़क के कारण बच्चों को स्कूल पहुंचने में अधिक समय लगता है और कई बार मौसम खराब होने पर उन्हें स्कूल जाने में परेशानी होती है।
ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षा बच्चों का अधिकार है और केवल विद्यालय तक पहुंचने के लिए भी यदि उन्हें जोखिम उठाना पड़े, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए सड़क का जल्द से जल्द स्थायी निर्माण कराया जाए।
मरीजों और राहगीरों के लिए भी परेशानी
सड़क की खराब स्थिति का असर केवल स्कूली बच्चों तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार किसी व्यक्ति के बीमार पड़ने या आपातकालीन स्थिति उत्पन्न होने पर मरीज को अस्पताल तक पहुंचाना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। खराब सड़क के कारण वाहन धीमी गति से चलने को मजबूर होते हैं और कई स्थानों पर गड्ढों से बचते हुए निकलना पड़ता है।
दोपहिया वाहन चालकों के लिए तो यह मार्ग विशेष रूप से जोखिमपूर्ण बताया जा रहा है। बारिश के समय गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अनुमान लगाना मुश्किल होता है। इससे दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है।
ग्रामीण बोले—अब स्थायी समाधान चाहिए
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से सड़क की मरम्मत और निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों ने कहा कि इस मार्ग का उपयोग आसपास के कई गांवों के लोग करते हैं और यह उनके लिए आवागमन का महत्वपूर्ण साधन है।
एक स्थानीय ग्रामीण ने कहा, “यह मार्ग दो विधानसभाओं की सीमा पर होने के कारण उपेक्षा का शिकार है। मासूम बच्चों के भविष्य और ग्रामीणों की सुविधा को देखते हुए शासन-प्रशासन को तुरंत इस 2 किलोमीटर रास्ते का डामरीकरण या नवनिर्माण कराना चाहिए।”
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण होने से न केवल स्कूली बच्चों को सुरक्षित आवागमन मिलेगा, बल्कि किसानों, मजदूरों, महिलाओं, बुजुर्गों और अन्य ग्रामीणों को भी बड़ी राहत मिलेगी।
निर्माण नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी
सड़क की समस्या को लेकर क्षेत्रीय ग्रामीणों और समाजसेवियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस 2 किलोमीटर जर्जर मार्ग के पक्के निर्माण की स्वीकृति नहीं दी गई, तो वे सामूहिक रूप से प्रशासन को ज्ञापन सौंपेंगे।
ग्रामीणों ने कहा कि इसके बाद भी यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो सभी गांवों के लोग एकजुट होकर आंदोलन और प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी मांग किसी राजनीतिक लाभ की नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और आम नागरिकों के सुगम आवागमन से जुड़ी हुई है।
प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि संबंधित विभागों और दोनों पंचायतों के बीच समन्वय स्थापित कर सड़क की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण कराया जाए। इसके बाद निर्माण की जिम्मेदारी स्पष्ट करते हुए जल्द से जल्द सड़क निर्माण की स्वीकृति प्रदान की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि लगभग 2 किलोमीटर का यह मार्ग बहुत बड़ा प्रोजेक्ट नहीं है, लेकिन इसके निर्माण से कई परिवारों की रोजमर्रा की परेशानियां दूर हो सकती हैं। विशेष रूप से बारिश के मौसम में बच्चों और मरीजों को होने वाली परेशानी को देखते हुए प्रशासन को मामले को प्राथमिकता के आधार पर लेना चाहिए।
फिलहाल ग्रामीणों की निगाहें शासन-प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि सड़क का शीघ्र निर्माण होता है तो यह क्षेत्र के लोगों के लिए बड़ी राहत होगी, वहीं लंबे समय तक अनदेखी जारी रहने पर ग्रामीण आंदोलन का रास्ता अपनाने की तैयारी में हैं।
रिपोर्टर: हेमराज सहरिया
राघौगढ़ तहसील रिपोर्टर
