स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद थीम पर 23 सितंबर को मनेगा 11वां आयुर्वेद दिवस
भारत सहित 150 से अधिक देशों में होंगे जागरूकता कार्यक्रम, स्वस्थ जीवनशैली और संतुलित आहार पर रहेगा जोर
Ujjain , 08 सितंबर। आयुर्वेद की प्राचीन परंपरा और आधुनिक समय में उसकी उपयोगिता को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से 23 सितंबर 2026 को भारत सहित दुनिया के कई देशों में 11वां आयुर्वेद दिवस मनाया जाएगा। इस वर्ष आयुर्वेद दिवस की थीम “स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद” रखी गई है।
आयुर्वेद दिवस के माध्यम से लोगों को स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार, मानसिक स्वास्थ्य और प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने के प्रति जागरूक किया जाएगा। अभियान के तहत आयुर्वेद के समग्र दृष्टिकोण को आम लोगों तक पहुंचाने पर विशेष जोर रहेगा।
संतुलन को माना गया है स्वास्थ्य का आधार
23 सितंबर की तारीख आयुर्वेद दिवस के लिए विशेष महत्व रखती है। यह दिन शरद विषुव यानी Autumnal Equinox के आसपास आता है, जब दिन और रात की अवधि लगभग समान होती है। आयुर्वेद में भी संतुलन को स्वस्थ जीवन का प्रमुख आधार माना गया है।
आयुर्वेद के अनुसार, जब शरीर में दोष, धातु और मल संतुलित अवस्था में हों तथा इंद्रियां, मन और आत्मा प्रसन्न हों, तब व्यक्ति को स्वस्थ माना जाता है। इसी अवधारणा को इस वर्ष की थीम के माध्यम से व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
2016 से मनाया जा रहा आयुर्वेद दिवस
आयुष मंत्रालय द्वारा वर्ष 2016 से आयुर्वेद दिवस मनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य आयुर्वेद को वैज्ञानिक और प्रमाण-आधारित चिकित्सा पद्धति के रूप में स्थापित करने के साथ इसकी प्रासंगिकता और उपयोगिता के बारे में लोगों को जानकारी देना है।
पिछले कुछ वर्षों में आयुर्वेद दिवस का आयोजन भारत तक सीमित नहीं रहा है। यह आयोजन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना चुका है और 150 से अधिक देशों में आयुर्वेद दिवस से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
तीन प्रमुख क्षेत्रों पर रहेगा फोकस
इस वर्ष के अभियान में आयुर्वेद से जुड़े तीन प्रमुख क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी। इनमें बेहतर स्वास्थ्य परिणामों के लिए एकीकृत स्वास्थ्य सेवा, आयुर्वेद में साक्ष्य आधारित अनुसंधान एवं नवाचार तथा सामुदायिक कल्याण और टिकाऊ जीवनशैली के लिए आयुर्वेद प्रमुख हैं।
इन विषयों के माध्यम से आयुर्वेद की पारंपरिक अवधारणाओं को आधुनिक स्वास्थ्य जरूरतों से जोड़ने और लोगों तक वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
स्वस्थ दिनचर्या अपनाने के लिए किया जाएगा प्रेरित
आयुर्वेद दिवस के अवसर पर लोगों को अपने दैनिक जीवन में स्वस्थ आदतों को शामिल करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। उचित आहार, नियमित दिनचर्या, मानसिक संतुलन और प्रकृति के साथ सामंजस्य को स्वस्थ जीवन के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में बताया जाएगा।
अभियान के दौरान आयुर्वेद को लेकर समाज में मौजूद गलत अवधारणाओं और भ्रांतियों को दूर करने पर भी जोर रहेगा। इसके लिए घरों, स्कूलों, कॉलेजों और ग्रामीण एवं शहरी समुदायों तक आयुर्वेद की वैज्ञानिक एवं समग्र सोच से जुड़ी जानकारी पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
आयुर्वेद जीवन जीने का विज्ञान: डॉ. जितेंद्र जैन
शासकीय आयुर्वेद औषधालय, करोहन, उज्जैन के आयुर्वैदिक चिकित्सा अधिकारी एवं चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. जितेंद्र जैन ने बताया कि आयुर्वेद केवल उपचार की एक पद्धति नहीं है, बल्कि स्वस्थ और संतुलित जीवन जीने का विज्ञान भी है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बदलती जीवनशैली और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बीच आयुर्वेद की जीवनशैली एवं सिद्धांत उपयोगी हो सकते हैं। स्वस्थ भविष्य के निर्माण के लिए संतुलित आहार, उचित दिनचर्या और मानसिक संतुलन जैसे आयुर्वेदिक सिद्धांतों को दैनिक जीवन में अपनाना लाभकारी हो सकता है।
जनभागीदारी से बनेगा स्वस्थ भविष्य
11वें आयुर्वेद दिवस का उद्देश्य केवल एक दिन आयोजन तक सीमित न रहकर लोगों को लंबे समय तक स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है। आयुर्वेद के सिद्धांतों, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और प्रकृति के साथ संतुलित जीवन के महत्व को जन-जन तक पहुंचाकर स्वस्थ समाज के निर्माण की दिशा में जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
23 सितंबर को मनाया जाने वाला आयुर्वेद दिवस इसी संदेश के साथ लोगों को स्वस्थ भविष्य के लिए अपनी जीवनशैली में संतुलन और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित करेगा।
