—Advertisement—

MP का 1000 साल पुराना ककनमठ मंदिर: खंभों की गिनती आज भी रहस्य, लोककथाओं से भरा

Author Picture
Published On: 3 February 2026
1000-Year-Old Kakanmath Temple in MP: Pillars Count Still a Mystery, Folk Legends Abound
— 1000-Year-Old Kakanmath Temple in MP: Pillars Count Still a Mystery, Folk Legends Abound

—Advertisement—

MP का 1000 साल पुराना ककनमठ मंदिर: खंभे गिनना आज भी रहस्य, 

मुरैना, MP । MP के मुरैना जिले के सिहोनिया गांव में स्थित ककनमठ मंदिर अपनी रहस्यमयी वास्तुकला और अद्भुत इतिहास के कारण देशभर में प्रसिद्ध है। यह मंदिर लगभग 1000 साल पुराना है और स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मंदिर के खंभों को अब तक कोई पूरी तरह गिन नहीं पाया। भले ही यह मंदिर अब भग्नावस्था में है, लेकिन इसकी अद्भुत नक्काशियां और स्थापत्य कला आज भी पर्यटकों और भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं।

ककनमठ मंदिर की अद्भुत वास्तुकला

ककनमठ मंदिर गुर्जर-प्रतिहार शैली में बना हुआ है, जो 10वीं और 11वीं शताब्दी के स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह विशालकाय पत्थरों से बना है और मंदिर का शिखर ऐसा प्रतीत होता है मानो हवा में तैर रहा हो।

मंदिर का गर्भगृह, स्तंभयुक्त मंडप और मुखमंडप अत्यंत आकर्षक हैं। इन पर देवी-देवताओं, पौराणिक जीवों और मिथकीय कथाओं की नक्काशी की गई है। खास बात यह है कि निर्माण में चूना, मिट्टी या सीमेंट का उपयोग नहीं किया गया, बल्कि पत्थरों को बिना किसी बंधन के जोड़कर बनाया गया।

आज मंदिर भले ही खंडित अवस्था में हो, लेकिन इसकी मूर्तियां और नक्काशियां आज भी भक्तों और पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं। मंदिर की हर दीवार और छत पर की गई नक्काशियां उसकी प्राचीन महिमा और स्थापत्य कौशल को उजागर करती हैं।

इतिहास और निर्माण की कहानी

इतिहासकारों का मानना है कि यह मंदिर कच्छपघात राजवंश की रानी ककनवती के आदेश पर 11वीं शताब्दी में निर्मित हुआ। रानी ककनवती के नाम पर ही इसे ककनमठ कहा गया।

स्थानीय कहानियों और किवदंतियों में इसे भूतों द्वारा बनाया गया मंदिर भी कहा जाता है। एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, भूत मंदिर बना रहे थे, तभी एक महिला ने चक्की चलाना शुरू किया। डरकर भूत अधूरा काम छोड़कर भाग गए। यही कारण माना जाता है कि मंदिर आज तक अधूरा है।

पुरातत्व विभाग इन कहानियों को केवल लोककथा मानता है। वैज्ञानिक दृष्टि से इनका कोई आधार नहीं है, लेकिन यह कहानियां मंदिर की रहस्यमयी छवि को बढ़ाती हैं और लोगों को आकर्षित करती हैं।

रहस्यमयी खंभे

ककनमठ मंदिर के खंभे इस मंदिर की सबसे बड़ी पहेली हैं। स्थानीय लोग कहते हैं कि अब तक कोई भी इन खंभों की सटीक संख्या नहीं गिन पाया। हर बार गिनती करने पर संख्या बदल जाती है।

मंदिर परिसर में कई शिवलिंग और मूर्तियां भी रखी हैं, जो खंडित अवस्था में हैं। इन खंभों और मूर्तियों की अनोखी संरचना और उनकी संख्या की रहस्यमयी प्रकृति मंदिर को और भी आकर्षक बनाती है।

भूतों और लोककथाओं से जुड़े रहस्य

स्थानीय मान्यता है कि सूर्यास्त के बाद मंदिर भूतों का केंद्र बन जाता है। रात में अजीब आवाजें और रहस्यमयी दृश्य दिखाई देते हैं। लोगों का कहना है कि जो रात में यहां ठहरता है, उसे डरावने दृश्य दिखाई देते हैं।

एक अन्य किवदंती यह है कि जिस दिन मंदिर के सामने नाई जाति के नौ काने दूल्हे बारात लेकर निकलेंगे, उस दिन मंदिर गिर जाएगा। भले ही यह केवल अंधविश्वास पर आधारित है, लेकिन यह मंदिर को और रहस्यमयी बनाता है।

इन कथाओं के कारण, रात में अधिकांश लोग मंदिर परिसर में नहीं रुकते। यही रहस्य और कहानियां पर्यटकों और इतिहास प्रेमियों के लिए इस मंदिर को और भी रोमांचक बनाती हैं।

कैसे पहुंचें ककनमठ मंदिर?

ककनमठ मंदिर तक पहुंचना आसान है। निकटतम हवाई अड्डा ग्वालियर है, जो मंदिर से लगभग 65–70 किलोमीटर दूर है। रेल और सड़क मार्ग से मुरैना पहुंचना भी सुविधाजनक है।

दिल्ली से यमुना एक्सप्रेसवे के जरिए 325 किलोमीटर की दूरी तय करके मुरैना पहुंचा जा सकता है। मुरैना से बस या टैक्सी द्वारा लगभग 35 किलोमीटर का सफर कर मंदिर तक पहुँचा जा सकता है।

ककनमठ मंदिर: पर्यटन और धार्मिक महत्व

ककनमठ मंदिर न केवल इतिहास और वास्तुकला के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि इसकी लोककथाओं और रहस्यमयी कथाओं के कारण यह पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है।

यह मंदिर इतिहास प्रेमियों, पुरातत्वविदों और रहस्य प्रेमियों के लिए एक रोमांचक स्थल है। मंदिर का शांत और वीरान वातावरण पर्यटक को अतीत की ओर ले जाता है और उसे प्राचीन स्थापत्य कला और धार्मिक इतिहास का अनुभव कराता है।

भले ही मंदिर अब पूरी तरह बहाल नहीं है, लेकिन इसकी नक्काशियां, अनगिनत खंभे और रहस्यमयी कथाएं इसे अनोखा बनाती हैं। पर्यटक और श्रद्धालु दोनों ही यहां जाकर अपने अनुभव साझा करते हैं और मंदिर की अनोखी छवि को यादगार बनाते हैं।

निष्कर्ष

MP का यह 1000 साल पुराना ककनमठ मंदिर इतिहास, वास्तुकला और लोककथाओं का अद्भुत संगम है। इसकी भव्यता, खंभों की अनोखी गिनती और भूतों से जुड़ी रहस्यमयी कहानियां इसे केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि एक रोमांचक पर्यटन स्थल भी बनाती हैं।

ककनमठ मंदिर आज भी अपने इतिहास और रहस्यों के माध्यम से लोगों को आकर्षित करता है। यह मंदिर न केवल धार्मिक श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर का अद्भुत उदाहरण भी है।

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp