यादें: परिवार और पेशे की दोहरी चुनौती में घिरे डॉ. देव, इक़बाल खान ने साझा किया किरदार निभाने का अनुभव
मुंबई। सोनी सब के शो ‘यादें’ में डॉ. देव की जिंदगी एक मुश्किल मोड़ पर पहुंचने वाली है। हास्य, भावनाओं और अप्रत्याशित परिस्थितियों को साथ लेकर चलने वाली इस कहानी में अब उनके निजी रिश्तों और पेशे की परीक्षा होगी। इक़बाल खान द्वारा निभाए जा रहे डॉ. देव के सामने परिवार को एकजुट रखने की चुनौती है। साथ ही, उन्हें गांव वालों का भरोसा जीतकर आरोग्य केंद्र में मरीजों का पंजीकरण भी बढ़ाना होगा। आगामी एपिसोड्स में इन दोनों जिम्मेदारियों के बीच उनका संघर्ष देखने को मिलेगा।
डॉ. सृष्टि के फैसले से बढ़ी परिवार को लेकर चिंता
डॉ. सृष्टि, जिनकी भूमिका गुलकी जोशी निभा रही हैं, एक बड़ी बहस के बाद किलारी गांव छोड़कर मुंबई लौटने का फैसला कर लेती हैं। उनका यह निर्णय डॉ. देव को भावनात्मक रूप से परेशान कर देता है। उन्हें अपने परिवार के बिखरने की आशंका सताने लगती है और वह सृष्टि को जाने से रोकने की कोशिश करते हैं।
कहानी का यह मोड़ डॉ. देव के उस पक्ष को सामने लाएगा, जहां दूसरों की मदद करने वाला व्यक्ति अपने रिश्तों को संभालने के लिए जूझ रहा है। सृष्टि के फैसले को समझना और परिवार को साथ बनाए रखना उनके लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि, इस परेशानी से उबरने का समय मिलने से पहले ही उनके सामने एक नई जिम्मेदारी आ जाती है।
15 दिनों में 50 मरीजों के पंजीकरण का लक्ष्य
आगामी कहानी में अपना मेडिकल लाइसेंस बनाए रखने के लिए डॉ. देव को 15 दिनों के भीतर कल्लारी आरोग्य केंद्र में 50 मरीजों का पंजीकरण करना होगा। सीमित समय में इस लक्ष्य तक पहुंचना उनके लिए आसान नहीं होगा, क्योंकि गांव के लोग अभी भी उनके उपचार पर भरोसा करने से हिचकिचा रहे हैं।
डॉ. देव लगातार किलारी के लोगों की मदद करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके बावजूद लोगों को आरोग्य केंद्र आने के लिए तैयार करना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। अब उन्हें अपनी चिकित्सा सेवाओं के प्रति विश्वास पैदा करने के साथ निर्धारित समयसीमा का भी ध्यान रखना होगा। इस लक्ष्य से उनके पेशे का भविष्य जुड़ा है, इसलिए वह इसे नजरअंदाज नहीं कर सकते।
रिश्तों और जिम्मेदारी के बीच होगा संघर्ष
डॉ. देव के लिए परिवार और चिकित्सा पेशा, दोनों ही जीवन के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। एक ओर वह डॉ. सृष्टि को मुंबई जाने से रोकना चाहते हैं, दूसरी ओर उन्हें उन लोगों का भरोसा हासिल करना है जिनकी सेवा के लिए वह प्रयास कर रहे हैं।
आगामी ट्रैक में यही दोहरी जिम्मेदारी उनके फैसलों को प्रभावित करेगी। निजी जीवन की परेशानी के बीच काम पर ध्यान बनाए रखना और पेशे की चुनौती के बावजूद रिश्तों को समय देना उनके लिए कठिन होगा। कहानी में यह देखना दिलचस्प रहेगा कि वह इन परिस्थितियों का सामना किस तरह करते हैं और दोनों जिम्मेदारियों के बीच अपना रास्ता कैसे तलाशते हैं।
इक़बाल खान ने बताया क्यों खास है यह ट्रैक
आगामी एपिसोड्स के बारे में बात करते हुए इक़बाल खान ने कहा कि डॉ. देव ऐसे दौर से गुजर रहे हैं, जहां जिंदगी उनके सामने लगातार चुनौतियां खड़ी कर रही है। परिवार को एकजुट रखने की कोशिश के दौरान ही उन्हें गांव वालों को आरोग्य केंद्र आने के लिए तैयार करना पड़ रहा है।
इक़बाल के मुताबिक, इस ट्रैक की खासियत यह है कि डॉ. देव किसी एक समस्या को पीछे नहीं छोड़ सकते। उनके लिए दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। उन्हें अपने पेशे और लोगों की मदद करने के उद्देश्य पर विश्वास है, लेकिन जिनकी सहायता करना चाहते हैं, उनका भरोसा हासिल करना भी संघर्ष का हिस्सा बन गया है।
किरदार के संवेदनशील पक्ष को निभाने का अनुभव
इक़बाल खान ने डॉ. देव की भावनात्मक स्थिति को अपने अभिनय अनुभव का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा, “एक अभिनेता के तौर पर, डॉ. देव के संवेदनशील पक्ष को निभाना मेरे लिए बेहद संतोषजनक अनुभव रहा है।”
उनके अनुसार, डॉ. देव हमेशा दूसरों के लिए खड़े रहते हैं, लेकिन इस बार उन्हें खुद किसी के सहारे की जरूरत है। यह बदलाव दर्शकों को किरदार की चिंताओं, रिश्तों और भावनाओं से परिचित कराएगा। उनकी जिम्मेदारियों के साथ उनकी असुरक्षा भी आगामी कहानी का हिस्सा बनेगी।
क्या डॉ. देव सृष्टि को जाने से रोक पाएंगे? क्या वह 15 दिनों में मरीजों के पंजीकरण का लक्ष्य पूरा करके गांव वालों का भरोसा जीत सकेंगे? इन सवालों के जवाब ‘यादें’ के आगामी एपिसोड्स में मिलेंगे। शो हर सोमवार से शनिवार रात 8 बजे सोनी सब पर प्रसारित होता है।
