भारत में आँखों का स्वास्थ्य — एक स्मार्ट आर्थिक निवेश: दुनिया को नया संदेश विश्व दृष्टि दिवस पर
प्रस्तावना
हर 9 अक्टूबर को मनाया जाने वाला विश्व दृष्टि दिवस (World Sight Day) इस वर्ष एक बेहद महत्वपूर्ण संदेश लेकर आया है: सिर्फ सरल और कम लागत वाले कदमों से भारत को हर साल 3.6 लाख करोड़ रुपए तक का आर्थिक लाभ हो सकता है। नई रिपोर्ट के अनुसार, यदि देशभर में स्कूलों में आँखों की जाँच करवाई जाए और मौके पर ही पढ़ने वाले चश्मे उपलब्ध कराए जाएँ, तो हर 1 रुपए के निवेश पर अनुमानित 16 रुपए का रिटर्न प्राप्त हो सकता है।
यह रिपोर्ट IAPB (विश्व दृष्टि संगठन), सेवा फाउंडेशन और फ्रेड हॉलोज फाउंडेशन द्वारा तैयार की गई है और इसे संयुक्त राष्ट्र के मंच पर लॉन्च किया गया।
आंकड़ों की गहराई — भारत में दृष्टि हानि, फायदा और निवेश
दृष्टि हानि की समस्या
-
भारत में लगभग 70 करोड़ लोग ऐसे हैं जो दृष्टि हानि (reversible vision impairment) से जूझ रहे हैं।
-
ये न सिर्फ एक स्वास्थ्य समस्या है, बल्कि शिक्षा, रोजगार, सामाजिक समावेश और आर्थिक विकास पर भी गहरा असर डालती है।
-
अधिकांश दृष्टि हानि सस्ते उपायों जैसे चश्मा या सरल सर्जरी (मोतियाबिंद) से सुधारी जा सकती है, लेकिन आज भी लाखों लोग इन उपायों से वंचित हैं।
लाभ का अनुमान
रिपोर्ट में यह दर्शाया गया है कि यदि भारत में लगभग 22,100 करोड़ रुपए का निवेश किया जाए — अर्थात् एक व्यवहारिक और लक्षित दृष्टि स्वास्थ्य कार्यक्रम — तो निम्नलिखित लाभ संभावित हैं:
| क्षेत्र | अनुमानित वार्षिक लाभ |
|---|---|
| उत्पादकता | 2,27,000 करोड़ रुपए |
| रोजगार वृद्धि | 78,700 करोड़ रुपए |
| देखभाल में कमी | 40,800 करोड़ रुपए |
| शिक्षा (अतिरिक्त स्कूलिंग वर्ष) | 9,60,000 वर्षों के बराबर लाभ |
| मानसिक स्वास्थ्य (अवसाद राहत) | 8,27,000 से अधिक व्यक्तियों को राहत |
| सड़क दुर्घटनाएं और मृत्यु में कमी | लगभग 65,000 कम घटनाएँ |
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि आंखों के स्वास्थ्य में किए जाने वाले निवेश न सिर्फ सामाजिक स्वास्थ्य की दृष्टि से, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने वाले कदम हैं।
कैसे करें यह कार्य — छह प्राथमिक कदम
रिपोर्ट ने छह मुख्य क्षेत्रों की पहचान की है, जिनमें निवेश और रणनीति केंद्रित हो सकती है:
-
समुदाय में दृष्टि स्क्रीनिंग (Vision Screening)
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में परिक्रामी स्वास्थ्य शिविरों, स्कूलों और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में नियमित आँखों की जाँच। -
पठन चश्मे (Reading Glasses) देना जहाँ जरूरत हो
जांच के दौरान ही लो कॉस्ट चश्मे (पढ़ने वाले चश्मे) देना ताकि तुरंत लाभ प्राप्त हो सके। -
आँख स्वास्थ्य कर्मियों की संख्या बढ़ाना
ऑप्टोमेट्रिस्ट, ऑप्टिशियन, दृष्टि तकनीशियनों की शक्ति बढ़ाना और उनका प्रशिक्षण सुनिश्चित करना। -
मोतियाबिंद सर्जरी क्षमता (Surgical Productivity) बढ़ाना
बेहतर उपकरणों, टीम संरचना, ऑपरेशन टूर्नअराउंड समय और पोस्ट-ऑप केयर को बेहतर बनाना। -
बाधाओं को दूर करना
— लागत: चश्मे एवं ऑपरेशन सब्सिडी या मुफ्त विकल्प
— दूरी: दूरदराज इलाकों तक पहुँचने वाले मोबाइल क्लिनिक
— सामाजिक धारणाएँ: जागरूकता अभियान, मिथकों का निराकरण -
नवीन प्रशिक्षण और टेक्नोलॉजी का उपयोग
टेलीमेडिसिन, स्मार्ट उपकरण, बायोमेट्रिक डेटा, एआई-आधारित दृष्टि परीक्षण तकनीक आदि।
ये कदम यदि चरणबद्ध और सही रूप से लागू हों, तो अनगिनत व्यक्तियों की दृष्टि लौट सकती है और राष्ट्रीय विकास को नई गति मिल सकती है।
तुला की कहानी — व्यक्तिगत जीवन में बदलाव
महाराष्ट्र के फंगुलगाँव की 19 वर्षीय तुला की कहानी इस परिवर्तन की प्रत्यक्ष गवाही है। कमजोर दृष्टि के कारण वह कॉलेज छोड़ने ही वाली थी, लेकिन जब उसे एक जोड़ी चश्मा मिला, तो उसकी पढ़ाई जारी हो गई और जीवन में आशा लौट आई।
तुला बताती है,
“जब मैं ब्लैकबोर्ड नहीं देख पाता था, तो लगा कि मेरा पढ़ाई का सपना खत्म हो गया। जिस दिन मुझे चश्मा मिला, उस दिन ऐसा लगा जैसे मुझे ज़िंदगी वापस मिल गई।”
इस एक चश्मे ने न केवल उसकी पढ़ाई को बचाया, बल्कि उसके आत्मविश्वास को भी पुनर्जीवित किया।
चेतावनी और दृष्टिकोण — निवेश क्यों ना करें टालें
-
स्वास्थ्य नीति की प्राथमिकता नहीं बनना
यदि दृष्टि स्वास्थ्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति और बजट प्राथमिकता में शामिल न हो, तो यह एक अवसर खोने जैसा होगा। -
इन्फ्रास्ट्रक्चर एवं मानव संसाधन की कमी
पर्याप्त ऑप्टोमेट्रिस्ट, ऑप्टिशियन और दूरस्थ क्षेत्र उपकरण नहीं हों, तो कार्यक्रम अधूरा रह सकता है। -
लागत पर सामाजिक आवाज़ उठाई जाए
सरकार, निजी क्षेत्र और एनजीओ को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि दृष्टि सुधार कार्यक्रम वित्तीय रूप से टिकाऊ हों। -
डेटा और निगरानी प्रणाली की ज़रूरत
निरंतर डेटा संग्रह, परिणाम मॉनिटरिंग और सुधारात्मक कदम लेने की प्रणाली आवश्यक है।
निष्कर्ष: भारत की दृष्टि, भारत की शक्ति
विश्व दृष्टि दिवस के इस वर्ष की रिपोर्ट बताती है कि आँखों का स्वास्थ्य न सिर्फ चिकित्सा दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि एक अर्थव्यवस्था-सक्रिय निवेश भी है। भारत यदि समय रहते छोटे, सस्ते और लक्ष्य-उन्मुख कदम उठाए — जैसे स्कूलों में आँखों की जाँच, चश्मे की आपूर्ति, सर्जरी क्षमता बढ़ाना — तो न केवल लाखों जीवन बदले जाएंगे, बल्कि देश को हर साल 3.6 लाख करोड़ रुपए तक का लाभ होगा।
अब सवाल यह नहीं है कि क्या हमें यह करना चाहिए, बल्कि कैसे और कितनी जल्दी करना चाहिए।
इस विश्व दृष्टि दिवस पर, हम सभी—सरकार, स्कूल, स्वास्थ्य संस्थाएं और सामाजिक संगठन—एकजुट होकर यह संदेश फैलाएँ: “अपनी आँखों को प्यार करें, उनकी जाँच कराएँ, और दूसरों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करें।”
