World Hepatitis Day 2026: हेपेटाइटिस का टेस्ट किन लोगों को जरूर कराना चाहिए? डॉक्टर ने बताई वजह
हेपेटाइटिस है साइलेंट बीमारी, समय पर जांच से बच सकता है लिवर
World Hepatitis Day 2026: हेपेटाइटिस एक ऐसी बीमारी है जो शुरुआत में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाती, लेकिन धीरे-धीरे लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। समय पर इसकी पहचान न होने पर यह लिवर सिरोसिस, लिवर फेलियर और लिवर कैंसर जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है।
विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को जागरूक करते हुए बताया कि कुछ ऐसे समूह हैं, जिन्हें बिना किसी देरी के हेपेटाइटिस की जांच जरूर करवानी चाहिए। डॉक्टरों के अनुसार, शुरुआती स्तर पर बीमारी का पता चलने से इसके गंभीर प्रभावों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
लिवर से जुड़ी समस्या वाले लोगों को करानी चाहिए जांच
विशेषज्ञों के अनुसार, जिन लोगों के लिवर टेस्ट में गड़बड़ी सामने आती है, उन्हें हेपेटाइटिस की जांच जरूर करवानी चाहिए। अगर किसी व्यक्ति को क्रोनिक लिवर बीमारी, फैटी लिवर या लिवर एंजाइम बढ़ने की समस्या है तो डॉक्टर की सलाह से हेपेटाइटिस टेस्ट कराना जरूरी हो जाता है।
कई बार हेपेटाइटिस संक्रमण लंबे समय तक शरीर में मौजूद रहता है और व्यक्ति को इसकी जानकारी नहीं होती। ऐसे में नियमित जांच से संक्रमण का समय रहते पता लगाया जा सकता है।
गर्भवती महिलाओं के लिए हेपेटाइटिस B टेस्ट जरूरी
मैक्स हॉस्पिटल, साकेत के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. विकास सिंगला के अनुसार, हेपेटाइटिस B वायरस मां से बच्चे में फैल सकता है। इसलिए सभी गर्भवती महिलाओं को हर गर्भावस्था के दौरान हेपेटाइटिस B की जांच करवानी चाहिए।
अगर गर्भावस्था के दौरान संक्रमण का पता चल जाता है तो डॉक्टर उचित कदम उठाकर नवजात बच्चे में संक्रमण के खतरे को कम कर सकते हैं।
इन लोगों को भी जरूर करानी चाहिए जांच
डॉक्टरों के अनुसार, कुछ विशेष परिस्थितियों में रहने वाले लोगों में हेपेटाइटिस संक्रमण का खतरा अधिक हो सकता है। इनमें शामिल हैं:
- इंजेक्शन के माध्यम से ड्रग्स लेने वाले लोग
- HIV संक्रमण के साथ जीवन जी रहे लोग
- लंबे समय से हीमोडायलिसिस करवाने वाले मरीज
- जिनके परिवार में किसी सदस्य को हेपेटाइटिस B या C है
- जिनके पति, पत्नी, माता-पिता, भाई-बहन या बच्चों में हेपेटाइटिस संक्रमण पाया गया है
- जिनकी बार-बार सर्जरी या इनवेसिव मेडिकल प्रक्रिया हुई है
इन लोगों को समय-समय पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार हेपेटाइटिस की जांच करवानी चाहिए।
परिवार में संक्रमण होने पर जांच जरूरी
अगर किसी व्यक्ति के परिवार में किसी सदस्य को हेपेटाइटिस B या C होने की पुष्टि होती है तो अन्य सदस्यों को भी जांच करवानी चाहिए। डॉक्टरों के मुताबिक, अगर जांच रिपोर्ट निगेटिव आती है तो हेपेटाइटिस B से बचाव के लिए समय पर टीकाकरण कराया जा सकता है।
परिवार में संक्रमण की जानकारी होने के बावजूद जांच न करवाना जोखिम बढ़ा सकता है, क्योंकि कई मामलों में बीमारी बिना किसी लक्षण के आगे बढ़ती रहती है।
शुरुआत में पहचान से बच सकती है गंभीर बीमारी
डॉ. विकास सिंगला के अनुसार, क्रोनिक हेपेटाइटिस से पीड़ित कई लोगों में लंबे समय तक कोई लक्षण दिखाई नहीं देते। जब तक बीमारी का पता चलता है, तब तक लिवर को काफी नुकसान हो चुका होता है।
एक सामान्य ब्लड टेस्ट के जरिए संक्रमण की पहचान शुरुआती स्तर पर की जा सकती है। समय पर जांच और इलाज से बीमारी को गंभीर रूप लेने से रोका जा सकता है।
Hepatitis B को किया जा सकता है नियंत्रित
डॉक्टरों का कहना है कि हेपेटाइटिस B का पूरी तरह इलाज संभव नहीं है, लेकिन आधुनिक एंटीवायरल दवाओं की मदद से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। वहीं हेपेटाइटिस C का इलाज अब ज्यादातर मरीजों में मुंह से ली जाने वाली दवाओं के माध्यम से संभव है।
इसलिए बीमारी की पहचान जितनी जल्दी होगी, इलाज उतना ही प्रभावी हो सकता है।
हेपेटाइटिस से बचाव के लिए सावधानी जरूरी
हेपेटाइटिस से बचने के लिए जागरूकता और समय पर जांच सबसे महत्वपूर्ण है। सुरक्षित चिकित्सा प्रक्रियाएं, संक्रमित रक्त से बचाव, व्यक्तिगत स्वच्छता और हेपेटाइटिस B का टीकाकरण संक्रमण के खतरे को कम करने में मदद कर सकते हैं।
निष्कर्ष
विश्व हेपेटाइटिस दिवस का उद्देश्य लोगों को इस गंभीर बीमारी के प्रति जागरूक करना है। हेपेटाइटिस भले ही एक साइलेंट बीमारी हो, लेकिन समय पर जांच और सही इलाज से इसके खतरनाक प्रभावों को रोका जा सकता है।
गर्भवती महिलाओं, लिवर की समस्या वाले मरीजों, डायलिसिस मरीजों और संक्रमण के जोखिम वाले लोगों को विशेष रूप से हेपेटाइटिस टेस्ट करवाना चाहिए। जागरूकता और समय पर कदम उठाना ही स्वस्थ लिवर की कुंजी है।
