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महिला सशक्तिकरण एवं मानव अधिकार: 7 प्रमुख विचारों पर राष्ट्रीय मंथन | मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग

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Published On: 10 December 2025
महिला सशक्तिकरण एवं मानव अधिकार कार्यक्रम भोपाल

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महिला सशक्तिकरण एवं मानव अधिकार विषय पर मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग, भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय मंथन में विधानसभा अध्यक्ष, मंत्रियों व विशेषज्ञों ने अधिकार-कर्तव्य, लिंग समानता, डिजिटल सुरक्षा और राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका पर महत्वपूर्ण विचार रखे।

महिला सशक्तिकरण एवं मानव अधिकार: राष्ट्रीय मंथन का सार

महिला सशक्तिकरण एवं मानव अधिकार आज के समय का सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक और संवैधानिक विषय है। इसी उद्देश्य को केंद्र में रखते हुए मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग, भोपाल ने आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के अवसर पर एक विशेष विचार-मंथन आयोजित किया।

इस कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष, राज्य सरकार के मंत्री, यूएन वूमेन, मानव अधिकार आयोग के सदस्य, उच्च अधिकारी, न्यायविद, शिक्षाविद और विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

1. विधानसभा अध्यक्ष श्री नरेन्द्र सिंह तोमर के विचार

विधानसभा अध्यक्ष ने महिला सशक्तिकरण एवं मानव अधिकार के संदर्भ में सबसे महत्वपूर्ण बात कही —
“अधिकार और कर्तव्य एक-दूसरे के पूरक हैं।”

उन्होंने समझाया कि:

  • अधिकार लिखित रूप में परिभाषित किए जा सकते हैं
  • लेकिन कर्तव्य समझाना और अपनाना पड़ता है
  • यदि समाज अधिकारों का उपभोग करना चाहता है, तो उसे कर्तव्यों के प्रति भी सजग होना होगा

उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण हमारी परंपरा का हिस्सा रहा है, और हमें
विकृत परंपराओं को सुधारना चाहिए
लेकिन अपनी सभ्यता पर गर्व भी करना चाहिए

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2. महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया का वक्तव्य

मंत्री ने बताया कि महिलाओं के मानवाधिकारों की सुरक्षा—

  • सरकार की संवैधानिक ज़िम्मेदारी,
  • समाज की नैतिक ज़िम्मेदारी,
    दोनों है।

उन्होंने गर्वपूर्वक बताया कि—
मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की पूरी भर्ती प्रक्रिया ऑनलाइन और पारदर्शी की है।
हाल ही में 19,000 से अधिक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाएँ इसी प्रक्रिया से चयनित की गईं।

यह राज्य की महिला सशक्तिकरण एवं मानव अधिकार के प्रति वास्तविक प्रतिबद्धता दर्शाता है।

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3. मानव अधिकार आयोग के सदस्य डॉ. ए.पी. सिंह यादव के विचार

डॉ. सिंह ने कहा कि—
महिला सशक्तिकरण राष्ट्र निर्माण का आधार है।

उन्होंने बताया कि भारत का संविधान मानव अधिकारों की रक्षा के लिए विश्व में अग्रणीय है।
महत्वपूर्ण बिंदु:

  • समाज और सरकार को मानवाधिकारों के संवर्धन हेतु निरंतर प्रयास करने होंगे
  • मीडिया, जनप्रतिनिधि और आयोग का समन्वय अत्यंत प्रभावी भूमिका निभाएगा
  • हमारी संस्कृति में महिला सम्मान प्राचीनकाल से मौजूद है
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4. यूएन वूमेन की स्टेट हेड सुश्री रे का वक्तव्य

उन्होंने आधुनिक डिजिटल स्पेस में महिलाओं की सुरक्षा को अत्यंत आवश्यक बताया।

मुख्य बिंदु:

  • घर, समाज और सोशल मीडिया—तीनों जगह महिलाओं की सुरक्षा महत्वपूर्ण
  • लिंग समानता की शुरुआत घर से होती है
  • मानसिकता परिवर्तन महिला सशक्तिकरण एवं मानव अधिकार का मूल आधार है

5. स्मारिका विमोचन व अन्य गतिविधियाँ

कार्यक्रम के दौरान

  • “महिला सशक्तिकरण एवं मानव अधिकार” विषय पर स्मारिका का विमोचन किया गया
  • अतिथियों को सम्मान स्वरूप स्मृति-चिन्ह भेंट किए गए
  • प्रमुख सचिव श्री मुकेश चंद गुप्ता ने स्वागत भाषण दिया
  • उप सचिव श्री डी.एस. परमार ने आभार व्यक्त किया

कार्यक्रम का संचालन सुश्री सुनीता सिंह (आकाशवाणी, भोपाल) ने किया।

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6. कार्यक्रम में शामिल प्रमुख प्रतिभागी

इस राष्ट्रीय मंथन में उपस्थित थे:

  • वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी
  • सेवानिवृत्त न्यायाधीश
  • पूर्व पदाधिकारी व आयोग सदस्य
  • विधि संकाय के प्राध्यापक एवं विद्यार्थी
  • रोटरी क्लब, ISTB संस्था और भोपाल क्लब के प्रतिनिधि

यह विविध भागीदारी कार्यक्रम के महत्त्व को दर्शाती है।

7. महिला सशक्तिकरण एवं मानव अधिकार क्यों महत्वपूर्ण?

महिला सशक्तिकरण एवं मानव अधिकार समाज को इन दिशाओं में मजबूती देता है:

  • महिलाओं की सुरक्षा
  • समान अवसर
  • आर्थिक स्वतंत्रता
  • डिजिटल और सामाजिक सुरक्षा
  • शिक्षा एवं नेतृत्व क्षमता में वृद्धि
  • राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की पूर्ण भागीदारी
  • संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार घोषणा: https://www.un.org

  • यूएन वूमेन आधिकारिक पोर्टल: https://www.unwomen.org

  • भारत का संविधान ऑनलाइन: https://legislative.gov.in

निष्कर्ष

महिला सशक्तिकरण एवं मानव अधिकार सिर्फ नीतियों का विषय नहीं, बल्कि समाज की प्रगति का आधार है।
मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग द्वारा आयोजित यह राष्ट्रीय मंथन—

  • जागरूकता
  • नीति संवाद
  • और सामाजिक भागीदारी
    तीनों को एक मंच पर लाता है और महिला सशक्तिकरण को नई दिशा देता है।
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