महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के दिग्गज नेता Ajit Pawar का बुधवार को एक विमान दुर्घटना में निधन हो गया। इस दुर्घटना में चार अन्य लोग भी मारे गए। अजित पवार के निधन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा शून्य उत्पन्न हो गया है, खासकर उनके अपने निर्वाचन क्षेत्र बारामती में, जहां उन्होंने पिछले तीन दशकों से राजनीतिक दबदबा कायम किया था। अब यह सवाल उठ रहा है कि उनकी विरासत को कौन संभालेगा और बारामती सीट पर उनकी जगह कौन लेगा?
बारामती विधानसभा सीट का ऐतिहासिक महत्व
बारामती विधानसभा सीट को पवार परिवार का गढ़ माना जाता है। यहां 1967 से पवार परिवार का राज चलता आ रहा है। शरद पवार ने 1967 में पहली बार बारामती से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की, जिससे यह सीट पवार परिवार के लिए महत्वपूर्ण बन गई। शरद पवार के बाद, 1991 में Ajit Pawar ने इस सीट पर कब्जा किया और तब से उन्होंने लगातार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। अजित पवार ने 1991 से लेकर 2024 तक हर चुनाव में बड़े अंतर से जीत हासिल की और बारामती में अपना दबदबा बनाए रखा।
पवार परिवार में भीतर की राजनीतिक प्रतिस्पर्धा
Ajit Pawar के निधन के बाद, उनके परिवार में बारामती सीट को लेकर कई नाम उभरकर सामने आए हैं। पवार परिवार में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का इतिहास भी रहा है। 2023 में राकांपा के विभाजन के बाद, 2024 विधानसभा चुनाव में अजित पवार के भतीजे युगेंद्र पवार ने उन्हें चुनौती दी थी, हालांकि वे एक लाख से ज्यादा मतों से हार गए थे। इस मुकाबले ने यह दिखा दिया कि पवार परिवार में अंदरूनी प्रतिस्पर्धा का कोई अंत नहीं है।
बारामती की विरासत के लिए प्रमुख दावेदार
- सुनेत्रा पवार (अजित पवार की पत्नी)
Ajit Pawar की पत्नी और राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार को बारामती की विरासत संभालने के सबसे बड़े दावेदार के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने पहले भी बारामती लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था और एक समय सुप्रिया सुले के खिलाफ मुकाबले में अच्छा प्रदर्शन किया था। वे बारामती टेक्सटाइल कंपनी की अध्यक्ष भी हैं और राज्यसभा सांसद के रूप में राजनीति में सक्रिय हैं। - पार्थ पवार (अजित पवार के बड़े बेटे)
अजित पवार के बड़े बेटे पार्थ पवार को भी उनकी राजनीतिक विरासत का उत्तराधिकारी माना जा रहा है। हालांकि, पार्थ ने अभी तक राजनीति में सक्रिय रूप से भाग नहीं लिया है। 2019 में उन्होंने मावल निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन हार का सामना करना पड़ा। वे भविष्य में पवार परिवार का एक युवा चेहरा बन सकते हैं, जिसे अजित पवार के समर्थक नए नेतृत्व के रूप में देख सकते हैं। - जय पवार (अजित पवार के छोटे बेटे)
अजित पवार के छोटे बेटे जय पवार अब तक राजनीति में सक्रिय नहीं हुए हैं, लेकिन हाल के समय में उन्होंने बारामती के ग्रामीण इलाकों का दौरा करना शुरू किया है। इसे उनकी राजनीति में कदम रखने की ओर पहला कदम माना जा रहा है। अजित पवार ने भी कभी संकेत दिया था कि अगर कार्यकर्ताओं और जनता की इच्छा हो, तो जय पवार उनकी पारंपरिक सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। - रोहित पवार (शरद पवार के पोते)
शरद पवार के पोते और अजित पवार के भतीजे रोहित पवार को पवार परिवार के उभरते हुए नेता के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने 2024 विधानसभा चुनाव में अहमदनगर जिले की कर्जत-जामखेड सीट से जीत हासिल की। हालांकि, उन्होंने कभी बारामती से चुनाव लड़े जाने की इच्छा नहीं जताई, लेकिन राकांपा (एसपी) इस सीट पर रोहित को उतारने का विचार कर सकती है, जिससे परिवार की इस मजबूत सीट को और मजबूत किया जा सके। - युगेंद्र पवार (शरद पवार गुट के मजबूत दावेदार)
युगेंद्र पवार, जो अजित पवार के भतीजे हैं, 2024 विधानसभा चुनाव में अजित पवार के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरे थे। हालांकि वे एक लाख से अधिक मतों से हार गए, लेकिन उन्होंने पवार परिवार के अन्य सदस्यों के मुकाबले सबसे ज्यादा वोट (29 फीसदी) प्राप्त किए थे। युगेंद्र पवार को नवा दादा (नए दादा) के रूप में देखा जाता है और उन्हें अजित पवार की विरासत का विकल्प माना जा रहा है। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा हो रही है कि शरद पवार उन्हें भविष्य में बारामती की सीट पर उतार सकते हैं।
भविष्य की संभावनाएं और चुनौतियां
Ajit Pawar की विरासत को लेकर चर्चा जारी है और इस बारे में अटकलें लगाई जा रही हैं कि कौन इस परिवार की राजनीतिक गद्दी संभालेगा। हालांकि, बारामती सीट पर राजनीति में किसी एक व्यक्ति का दावेदार होना आसान नहीं है, क्योंकि यह सीट पवार परिवार की जड़ों से जुड़ी हुई है। इसके अलावा, यहां का राजनीतिक माहौल भी परिवार के सदस्य को लेकर प्रतिस्पर्धा से भरा हुआ है। अजित पवार की नेतृत्व क्षमता को देखते हुए, उनके परिवार के सदस्य एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करते हुए इस विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश करेंगे।
बारामती में अजित पवार के बाद एक नए नेतृत्व का उदय तय है, लेकिन यह देखने वाली बात होगी कि कौन पवार परिवार के गढ़ को अपने नाम करता है और इस सीट पर स्थिरता ला पाता है।

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