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‘शिविर है किधर?’: सारणी नगर पालिका का जलकर वसूली अभियान अव्यवस्थाओं की भेंट, बारिश में भटकते रहे कर्मचारी और करदाता

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Published On: 7 August 2026
Municipal employees and residents at a Sarni Municipal Council water tax collection camp facing poor arrangements, with staff taking shelter from rain during the water tax and tap connection drive.
— Municipal employees and residents at a Sarni Municipal Council water tax collection camp facing poor arrangements, with staff taking shelter from rain during the water tax and tap connection drive.

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‘शिविर है किधर?’: सारणी नगर पालिका का जलकर वसूली अभियान अव्यवस्थाओं की भेंट, बारिश में भटकते रहे कर्मचारी और करदाता

रिपोर्ट: संदीप तायड़े, स्वराज वाणी सारनी/घोड़ाडोगरी

सारणी। नगर पालिका परिषद सारणी द्वारा जल कर संग्रहण एवं नए नल कनेक्शन से संबंधित औपचारिकताओं को पूरा कराने के उद्देश्य से शुरू किया गया विशेष शिविर इन दिनों अव्यवस्थाओं के कारण चर्चा का विषय बना हुआ है। कागजों पर यह अभियान राजस्व बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसकी तैयारियों और व्यवस्थाओं को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

बारिश के मौसम में बिना टेंट, बिना शेड और बिना किसी स्थायी व्यवस्था के लगाए गए इस शिविर में न केवल आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ा, बल्कि नगर पालिका के कर्मचारी भी पूरे दिन बारिश से बचने के लिए इधर-उधर शरण लेते दिखाई दिए। कई नागरिकों ने सवाल उठाया कि जब नगर पालिका स्वयं शिविर का उचित स्थान और व्यवस्था तय नहीं कर सकी, तो आम लोगों से समय पर कर जमा करने की अपेक्षा कैसे की जा सकती है।

27 जुलाई से शुरू हुआ जल कर एवं नल कनेक्शन अभियान

नगर पालिका परिषद सारणी ने 27 जुलाई 2026 से शहर के विभिन्न वार्डों में जल कर वसूली और नए नल कनेक्शन से संबंधित दस्तावेजों के सत्यापन एवं प्रक्रिया को पूरा करने के लिए विशेष शिविर शुरू किया।

इस अभियान के तहत नागरिकों को अपने बकाया जल कर का भुगतान करने तथा आवश्यक दस्तावेज जमा कराने की सुविधा उपलब्ध कराने का उद्देश्य रखा गया था। नगर पालिका का दावा था कि इस अभियान से राजस्व में वृद्धि होगी और अधिक से अधिक उपभोक्ताओं को नियमित जल कर व्यवस्था से जोड़ा जा सकेगा।

लेकिन अभियान शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद इसकी व्यवस्थाओं को लेकर लोगों की शिकायतें सामने आने लगीं।

बिना टेंट और मूलभूत सुविधाओं के शुरू हुआ शिविर

स्थानीय लोगों के अनुसार शिविर स्थल पर केवल एक बैनर लगाकर अभियान शुरू कर दिया गया, जबकि वहां न तो टेंट की व्यवस्था थी और न ही कर्मचारियों एवं नागरिकों के बैठने के लिए कोई उचित स्थान बनाया गया था।

मानसून के मौसम को देखते हुए भी बारिश से बचाव के लिए कोई अस्थायी शेड या वाटरप्रूफ व्यवस्था नहीं की गई।

इस कारण जैसे ही बारिश शुरू होती, पूरा शिविर अस्त-व्यस्त हो जाता।

बारिश ने बढ़ाई कर्मचारियों की मुश्किलें

शिविर में तैनात नगर पालिका कर्मचारियों को सबसे अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

बारिश के दौरान कर्मचारियों को अपनी ई-मशीन, रसीद बुक, दस्तावेज और अन्य सरकारी रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने के लिए इधर-उधर भागना पड़ा।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कई कर्मचारी कभी पेड़ों के नीचे खड़े दिखाई दिए तो कभी आसपास की दुकानों की छत के नीचे जाकर बारिश रुकने का इंतजार करते रहे।

इस दौरान कई बार कर वसूली का कार्य भी बाधित हुआ।

करदाता खोजते रहे कर्मचारी

अव्यवस्था का सबसे बड़ा असर उन नागरिकों पर पड़ा जो निर्धारित समय पर अपना जल कर जमा करने पहुंचे थे।

लोगों को शिविर स्थल पर केवल बैनर दिखाई दिए, लेकिन वहां कर्मचारी मौजूद नहीं मिले।

बारिश के कारण कर्मचारी अलग-अलग स्थानों पर चले जाने से लोगों को उन्हें खोजने में काफी समय लगा।

कई नागरिकों ने व्यंग्य करते हुए कहा—

“शिविर है किधर? यहां तो सिर्फ बैनर लगा है, कर्मचारी कहीं दिखाई नहीं दे रहे।”

इस स्थिति से लोगों में भ्रम और नाराजगी दोनों देखने को मिली।

वार्डों में चला अभियान

नगर पालिका द्वारा यह अभियान शहर के विभिन्न वार्डों में संचालित किया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार अभियान के अंतर्गत—

  • वार्ड क्रमांक 1
  • वार्ड क्रमांक 2
  • वार्ड क्रमांक 4 से 9
  • वार्ड क्रमांक 11
  • वार्ड क्रमांक 12
  • वार्ड क्रमांक 14

में विशेष शिविर आयोजित किए गए।

इन वार्डों में जल कर संग्रहण एवं नल कनेक्शन संबंधी प्रक्रिया पूरी की गई।

तीन लाख से अधिक का राजस्व हुआ संग्रहित

नगर पालिका के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अभियान के दौरान लगभग 315 नल कनेक्शन से संबंधित फाइलों का कार्य पूरा किया गया।

साथ ही करीब 3 लाख 17 हजार 600 रुपये का जल कर संग्रह भी किया गया।

नगर पालिका इसे अभियान की उपलब्धि मान रही है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि बेहतर व्यवस्थाएं होतीं तो यह आंकड़ा और अधिक हो सकता था।

बेहतर व्यवस्था होती तो बढ़ सकता था राजस्व

स्थानीय नागरिकों और क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यदि नगर पालिका ने पहले से योजना बनाकर स्थायी शिविर स्थल तय किया होता, वहां टेंट, कुर्सियां और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई होतीं, तो अधिक संख्या में लोग कर जमा करने पहुंचते।

उनका कहना है कि अव्यवस्था के कारण कई लोग बिना भुगतान किए ही वापस लौट गए।

विशेषज्ञों का मानना है कि कर संग्रहण अभियान केवल नोटिस जारी करने से सफल नहीं होता, बल्कि नागरिकों को सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराना भी उतना ही आवश्यक है।

डिजिटल उपकरण भी रहे खतरे में

बारिश के दौरान कर्मचारियों के पास मौजूद डिजिटल मशीनें और सरकारी रिकॉर्ड भी सुरक्षित नहीं रह सके।

ई-पॉस मशीन, रसीद प्रिंटर तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के भीगने का खतरा लगातार बना रहा।

यदि ऐसे उपकरण खराब हो जाते तो इससे नगर पालिका को अतिरिक्त आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता था।

नागरिकों ने उठाए कई सवाल

स्थानीय नागरिकों ने नगर पालिका की कार्यशैली पर कई सवाल उठाए।

उनका कहना है—

  • जब बारिश का मौसम पहले से ज्ञात था, तब टेंट की व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
  • शिविर का स्थायी स्थान पहले से सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया?
  • कर्मचारियों के बैठने और दस्तावेज सुरक्षित रखने की व्यवस्था क्यों नहीं थी?
  • नागरिकों के लिए प्रतीक्षा स्थल क्यों नहीं बनाया गया?

लोगों का कहना है कि यदि नगर पालिका स्वयं व्यवस्था नहीं कर सकती तो अभियान की सफलता प्रभावित होना स्वाभाविक है।

कर्मचारियों को भी हुई असुविधा

शिविर में ड्यूटी कर रहे कर्मचारियों को भी कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ा।

बारिश के दौरान लगातार स्थान बदलने के कारण उनका काम प्रभावित हुआ।

कई कर्मचारियों को खड़े-खड़े ही रसीद काटनी पड़ी, जबकि कई बार भुगतान प्रक्रिया बीच में रोकनी पड़ी।

इससे कार्य की गति भी धीमी हुई।

भविष्य के लिए बेहतर योजना बनाने की जरूरत

शहरी निकायों द्वारा समय-समय पर विशेष कर संग्रहण शिविर आयोजित किए जाते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे अभियानों के लिए पहले से विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जानी चाहिए।

इसमें—

  • मौसम के अनुसार टेंट एवं शेड
  • पर्याप्त बैठने की व्यवस्था
  • पेयजल
  • सूचना बोर्ड
  • हेल्प डेस्क
  • डिजिटल भुगतान काउंटर
  • दस्तावेज सुरक्षित रखने की व्यवस्था
  • स्पष्ट समय-सारणी

जैसी सुविधाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए।

नागरिकों की प्रमुख मांगें

स्थानीय लोगों ने नगर पालिका प्रशासन से मांग की है कि भविष्य में आयोजित होने वाले सभी शिविरों में—

  • टेंट एवं बारिश से बचाव की व्यवस्था की जाए।
  • शिविर स्थल पहले से सार्वजनिक किया जाए।
  • कर्मचारियों के बैठने की समुचित व्यवस्था हो।
  • नागरिकों के लिए प्रतीक्षा स्थल बनाया जाए।
  • डिजिटल भुगतान की सुविधा बेहतर बनाई जाए।
  • प्रत्येक वार्ड में निश्चित समय पर शिविर संचालित किए जाएं।
  • कर्मचारियों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।

नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

जल कर संग्रहण अभियान का उद्देश्य नगर पालिका की आय बढ़ाना और नागरिकों को सुविधाजनक सेवा देना था, लेकिन व्यवस्थाओं की कमी के कारण यह अभियान आलोचना का विषय बन गया।

हालांकि राजस्व संग्रहण के आंकड़े संतोषजनक बताए जा रहे हैं, लेकिन स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि व्यवस्थाएं बेहतर होतीं तो अधिक राजस्व प्राप्त किया जा सकता था और नागरिकों को भी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।

निष्कर्ष

सारणी नगर पालिका का जल कर एवं नल कनेक्शन शिविर यह बताता है कि केवल अभियान शुरू करना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उसके लिए मजबूत प्रबंधन और जमीनी स्तर पर बेहतर व्यवस्थाएं भी उतनी ही आवश्यक हैं।

बारिश के मौसम में बिना टेंट और मूलभूत सुविधाओं के शिविर लगाने से कर्मचारियों और करदाताओं दोनों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। यदि भविष्य में नगर पालिका इन कमियों को दूर कर योजनाबद्ध तरीके से शिविर आयोजित करती है, तो न केवल राजस्व संग्रह में वृद्धि होगी बल्कि नागरिकों का विश्वास भी मजबूत होगा और प्रशासन की कार्यप्रणाली अधिक प्रभावी दिखाई देगी।

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