बिहार चुनावों के बाद कर्नाटक में बदल सकता है मुख्यमंत्री? भाजपा नेता बी.वाई. विजयेंद्र का बड़ा दावा
नई दिल्ली।
कर्नाटक की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र (BY Vijayendra) ने बड़ा बयान देते हुए संकेत दिया है कि बिहार विधानसभा चुनावों के बाद कर्नाटक में राजनीतिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव संभव है। विजयेंद्र के अनुसार, कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर गहराता अंतर्विरोध आने वाले महीनों में सत्ता परिवर्तन की दिशा में बढ़ सकता है।
🔹 कांग्रेस में भ्रम की स्थिति — विजयेंद्र का आरोप
पत्रकारों से बातचीत में विजयेंद्र ने कांग्रेस सरकार पर नेतृत्व संकट का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी के भीतर “भ्रम और असमंजस” की स्थिति बनी हुई है।
उन्होंने कहा,
“कांग्रेस पार्टी में कोई स्पष्ट दिशा नहीं दिखती। विधायक सार्वजनिक मंचों पर नेतृत्व परिवर्तन की बातें कर रहे हैं। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया खुद जल्दबाजी में नज़र आ रहे हैं।”
विजयेंद्र ने यह भी याद दिलाया कि दो महीने पहले मैसूर में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शक्ति प्रदर्शन कर अपनी ताकत का इज़हार किया था, जिससे पार्टी के भीतर गुटबाज़ी के संकेत मिले।
उन्होंने कहा कि कई कांग्रेस नेता और मंत्री अक्टूबर-नवंबर में “राजनीतिक क्रांति” की बात कर रहे हैं, जबकि भाजपा ऐसी बयानबाजी से दूर रहकर जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका निभा रही है।
🔹 “कांग्रेस में सत्ता संघर्ष अपने चरम पर”
भाजपा नेता ने आगे कहा कि कांग्रेस के महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने अपने नेताओं को नेतृत्व परिवर्तन पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से रोका है, लेकिन यह भी कहा कि इस विषय पर निर्णय पार्टी हाईकमान ही करेगा।
विजयेंद्र ने दावा किया —
“कांग्रेस का कोई भी वरिष्ठ नेता यह नहीं कह रहा कि मुख्यमंत्री नहीं बदलेंगे। इसका मतलब साफ है कि बिहार चुनावों के बाद कर्नाटक में बड़े राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।”
उन्होंने कहा कि इस स्थिति से राज्य में राजनीतिक अस्थिरता और अराजकता उत्पन्न हो सकती है।
🔹 “शिवकुमार नवंबर में बन सकते हैं मुख्यमंत्री” — विधायकों का दावा
हाल ही में कांग्रेस विधायक एच.डी. रंगनाथ और पूर्व सांसद एल.आर. शिवरामे गौड़ा ने दावा किया था कि डी.के. शिवकुमार नवंबर 2025 में मुख्यमंत्री पद संभाल सकते हैं।
इन अटकलों पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने दोहराया कि वह अपना पूरा पाँच वर्ष का कार्यकाल पूरा करेंगे। उन्होंने कहा,
“पहले कार्यकाल में मैं ढाई साल तक मुख्यमंत्री रहा हूँ, और अब अगले ढाई साल तक भी इस पद पर रहूँगा।”
🔹 भाजपा का रुख — “जब समय आएगा, तब देखेंगे”
सत्ता परिवर्तन की संभावनाओं पर भाजपा की भूमिका को लेकर पूछे गए सवाल पर विजयेंद्र ने कहा कि पार्टी परिस्थिति के अनुसार निर्णय लेगी।
“जब स्थिति बनेगी, तब देखा जाएगा। भाजपा फिलहाल एक जिम्मेदार विपक्षी दल के रूप में कार्य कर रही है और करती रहेगी।”
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि विधानसभा में भाजपा की सीटें 66 से घटकर 63 रह गई हैं, लेकिन पार्टी जनता के मुद्दों, किसानों और विकास पर लगातार सक्रिय है।
विजयेंद्र ने कांग्रेस सरकार पर गरीब विरोधी, किसान विरोधी और विकास-विरोधी नीतियों का आरोप लगाया।
🔹 मुख्यमंत्री पद के ‘रोटेशन फॉर्मूले’ पर फिर चर्चा
राज्य के राजनीतिक हलकों में फिर चर्चा गर्म है कि मई 2023 में हुए विधानसभा चुनावों के बाद सिद्धारमैया और डी.के. शिवकुमार के बीच सत्ता-साझेदारी (Power-Sharing Formula) का समझौता हुआ था।
उस समय कांग्रेस हाईकमान ने सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री और शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री बनाया था।
सूत्रों के अनुसार, एक ‘रोटेशनल मुख्यमंत्री फॉर्मूले’ पर सहमति बनी थी, जिसके तहत ढाई साल बाद सत्ता हस्तांतरण होना था। हालांकि, कांग्रेस ने अब तक इस समझौते की औपचारिक पुष्टि नहीं की है।
📰 निष्कर्ष
कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र के ताज़ा बयान ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
जहाँ एक ओर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया अपनी कुर्सी पर मजबूती से डटे रहने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के समर्थक नेतृत्व परिवर्तन की मांग को हवा दे रहे हैं।
अब सबकी निगाहें बिहार चुनावों के बाद कर्नाटक की सियासत पर टिकी हैं —
क्या कांग्रेस में वास्तव में सत्ता परिवर्तन होगा या हाईकमान एक बार फिर स्थिति संभाल लेगा?

