उपाध्याय श्री विशेष सागर जी की पथरिया विरागोदय में ऐतिहासिक आगवानी के दौरान हजारों श्रद्धालुओं ने भव्य स्वागत किया। महाराष्ट्र से 1121 किमी पदविहार कर पथरिया पहुंचे उपाध्याय श्री ने धर्मसभा में भावपूर्ण संदेश दिया।
उपाध्याय श्री विशेष सागर जी की पथरिया विरागोदय में ऐतिहासिक आगवानी
घुवारा/पथरिया | संवाददाता: भरत सेठ घुवारा
उपाध्याय श्री विशेष सागर जी की पथरिया विरागोदय में ऐतिहासिक आगवानी
विश्व प्रसिद्ध जैन तीर्थ विरागोदय, पथरिया में गुरुवार को सर्वोच्च समाधि साधक, भारत गौरव, राष्ट्र संत गणाचार्य श्री 108 विराग सागर जी महामुनिराज के पट्टाचार्य तथा आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज के सुयोग्य शिष्य उपाध्याय श्री 108 विशेष सागर जी मुनिराज का भव्य एवं ऐतिहासिक स्वागत किया गया।
महाराष्ट्र प्रांत से लगभग 12 वर्षों के बाद बुंदेलखंड आगमन पर हजारों की संख्या में जैन एवं जैनेतर श्रद्धालुओं ने गाजे-बाजे, नृत्य, भक्ति गीतों और “जय विराग” के उद्घोषों के साथ उनकी भव्य आगवानी की।
महाराष्ट्र से 1121 किलोमीटर का पदविहार
उपाध्याय श्री विशेष सागर जी मुनिराज अपने संघ के साथ महाराष्ट्र प्रांत से पदविहार करते हुए लगभग 55 दिनों में 1121 किलोमीटर की कठिन यात्रा पूरी कर पथरिया पहुंचे।उनके आगमन मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने घरों के बाहर पाद प्रक्षालन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और स्वयं को सौभाग्यशाली माना।शाम 5:30 बजे उपाध्याय संघ का मंगल विहार विरागोदय तीर्थ क्षेत्र की ओर हुआ, जहां श्रद्धालुओं ने भक्ति और श्रद्धा के साथ उनका स्वागत किया।
धर्मसभा में उपाध्याय श्री के प्रेरक विचार
बड़ा मंदिर जी में आयोजित विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए उपाध्याय श्री विशेष सागर जी ने भावुक कर देने वाले मार्मिक प्रवचन दिए।
उन्होंने कहा—“हम यहां उपदेश देने, प्रवचन सुनाने या किसी को सिखाने नहीं आए हैं, बल्कि इस पावन भूमि की वंदना करने आए हैं। महापुरुषों के जन्म से भूमि भी पवित्र हो जाती है।”उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र को संतों की भूमि कहा जाता है, जबकि बुंदेलखंड को रत्नों की खान माना जाता है।
बुंदेलखंड रत्नों की खान : विशेष सागर जी
उपाध्याय श्री ने कहा कि पथरिया के लोग अत्यंत सौभाग्यशाली हैं क्योंकि इस क्षेत्र ने 14-15 संतों तथा त्यागी-व्रती आत्माओं को जन्म दिया है।उन्होंने पूज्य आचार्य श्री विराग सागर जी गुरुदेव का स्मरण करते हुए कहा—
“हमारी पहचान माता-पिता या नगर-ग्राम से नहीं होनी चाहिए, बल्कि हमारे कारण माता-पिता और नगर की पहचान बननी चाहिए।”उन्होंने कहा कि आचार्य श्री विराग सागर जी गुरुदेव एवं विरागोदय तीर्थ क्षेत्र के कारण पथरिया का नाम देशभर में प्रसिद्ध हुआ है।
विरागोदय तीर्थ की महिमा का वर्णन
उपाध्याय श्री ने कहा कि वे पथरिया स्थित आचार्य श्री विराग सागर जी की जन्मभूमि, सात जिनालयों तथा विरागोदय तीर्थ क्षेत्र की वंदना करने आए हैं।उन्होंने बताया कि विरागोदय तीर्थ की प्रतिष्ठा के समय वे महाराष्ट्र में होने के कारण उपस्थित नहीं हो सके थे।उन्होंने भावुक होकर कहा कि पूज्य आचार्य श्री विराग सागर जी की भावना थी कि वे एक बार पथरिया अवश्य आएं। आज उनकी वह भावना पूर्ण हो रही है।
धर्मनाथ भगवान मोक्ष कल्याणक पर होंगे विशेष आयोजन
दिनांक 18 जून 2026 को धर्मनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक महोत्सव के अवसर पर विरागोदय तीर्थ क्षेत्र में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
प्रमुख कार्यक्रम
- प्रातः 6:30 बजे अभिषेक
- विशेष पूजन
- निर्वाण लाडू विधान
- शाम 6:30 बजे आचार्य वंदना
- महाआरती
- भजन संध्या
श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्म लाभ लेने का आग्रह किया गया है।
निष्कर्ष
उपाध्याय श्री 108 विशेष सागर जी मुनिराज का पथरिया आगमन जैन समाज के लिए ऐतिहासिक और अविस्मरणीय क्षण बन गया। हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति, भव्य स्वागत और आध्यात्मिक संदेशों ने इस आयोजन को धार्मिक इतिहास में विशेष स्थान दिलाया।

