खेड़ावदा दंगल में Vijay Kher पहलवान का जलवा, नीमच के पहलवान को हराकर जीता मुकाबला
ग्रामीण अंचल में कुश्ती परंपरा का उत्साह
मालवा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में कुश्ती केवल एक खेल नहीं, बल्कि परंपरा, अनुशासन और सम्मान का प्रतीक मानी जाती है। गांवों में आयोजित होने वाले दंगल आज भी युवाओं के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए बुधवार, 20 मई 2026 को ग्राम खेड़ावदा नरसिंहगढ़ में विराट कुश्ती काटा दंगल का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें दूर-दूर से पहुंचे पहलवानों ने अपने दांव-पेंच का प्रदर्शन किया।
इस दंगल में सबसे ज्यादा चर्चा कंचनखेड़ी के युवा पहलवान Vijay Kher की रही, जिन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए नीमच के पहलवान को हराकर जीत अपने नाम की। विजय की इस उपलब्धि ने न केवल उनके गांव बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है।
दंगल देखने उमड़ी भारी भीड़
खेड़ावदा में आयोजित इस दंगल को देखने के लिए आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। सुबह से ही दंगल स्थल पर उत्साह का माहौल देखने को मिला। ग्रामीणों, युवाओं और खेल प्रेमियों में मुकाबलों को लेकर खासा उत्साह दिखाई दिया।
पारंपरिक अंदाज में आयोजित इस दंगल में स्थानीय संस्कृति की झलक भी दिखाई दी। मंच पर पहलवानों का परिचय कराया गया और मुकाबलों की शुरुआत के साथ दर्शकों ने तालियों और जयकारों से खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया।
ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी दंगल सामाजिक मेलजोल और खेल संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। ऐसे आयोजनों से युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है।

Vijay Kher ने दिखाया दमखम
दंगल के प्रमुख मुकाबलों में कंचनखेड़ी निवासी विजय खेर पहलवान का मुकाबला नीमच के एक मजबूत और अनुभवी पहलवान से हुआ। मुकाबले के दौरान दोनों पहलवानों ने शानदार खेल का प्रदर्शन किया, लेकिन विजय खेर ने अपने शानदार दांव-पेंच, संतुलन और ताकत के दम पर मुकाबला जीत लिया।
जैसे ही विजय ने प्रतिद्वंद्वी पहलवान को पटखनी दी, पूरे मैदान में तालियों और जयकारों की गूंज सुनाई देने लगी। दर्शकों ने उनकी जीत का जोरदार स्वागत किया।
विशेषज्ञों का कहना है कि विजय ने मुकाबले में जिस संयम और तकनीक का प्रदर्शन किया, वह उनकी लगातार मेहनत और अभ्यास का परिणाम है।
पवन पुत्र व्यायामशाला से मिली पहचान
विजय खेर वर्तमान में पवन पुत्र व्यायामशाला खाचरौद से जुड़े हुए हैं। यहां उन्हें अनुभवी उस्ताद डॉ. श्यामसिंह पहलवान द्वारा प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
व्यायामशाला में नियमित अभ्यास, अनुशासन और पारंपरिक कुश्ती तकनीकों पर विशेष ध्यान दिया जाता है। यही कारण है कि यहां से निकलने वाले कई पहलवान विभिन्न दंगलों में सफलता हासिल कर चुके हैं।
डॉ. श्यामसिंह पहलवान ने बताया कि विजय शुरू से ही मेहनती खिलाड़ी रहे हैं और लगातार अभ्यास के कारण उनके खेल में काफी सुधार आया है।
कठोर मेहनत का मिला परिणाम
कुश्ती ऐसा खेल है जिसमें केवल ताकत ही नहीं, बल्कि धैर्य, संतुलन, मानसिक मजबूती और रणनीति की भी आवश्यकता होती है। विजय खेर पिछले कई वर्षों से नियमित रूप से अभ्यास कर रहे हैं।
सुबह और शाम घंटों तक अखाड़े में पसीना बहाना, खान-पान का विशेष ध्यान रखना और अनुशासित जीवनशैली अपनाना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है। यही वजह है कि वे लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि विजय की सफलता क्षेत्र के अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
उस्ताद डॉ. श्यामसिंह की अहम भूमिका
हर सफल खिलाड़ी के पीछे एक अच्छे गुरु का महत्वपूर्ण योगदान होता है। विजय खेर की सफलता में भी उस्ताद डॉ. श्यामसिंह पहलवान की अहम भूमिका मानी जा रही है।
डॉ. श्यामसिंह वर्षों से युवाओं को कुश्ती का प्रशिक्षण दे रहे हैं और उन्होंने कई प्रतिभाशाली पहलवान तैयार किए हैं। वे केवल खेल प्रशिक्षण ही नहीं, बल्कि खिलाड़ियों को अनुशासन, संयम और खेल भावना का भी पाठ पढ़ाते हैं।
दंगल में विजय की जीत के बाद उन्होंने कहा कि यदि युवा पूरी लगन और मेहनत से अभ्यास करें, तो वे राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकते हैं।
नगरवासियों ने दी शुभकामनाएं
विजय खेर की जीत के बाद क्षेत्र में खुशी का माहौल देखने को मिला। बजरंग व्यायामशाला के उस्ताद कैलाश पोपंडिया, सचिन पोपंडिया, ओमवीर सिंह भदौरिया, राकेश राठौर, प्रकाश राठौर और नगर पालिका अध्यक्ष गोविंद भरावा सहित कई गणमान्य नागरिकों ने विजय को बधाई दी।
सभी ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि क्षेत्र के युवाओं को खेलों में आगे बढ़ाने के लिए ऐसे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को प्रोत्साहन मिलना चाहिए।
ग्रामीण खेलों को मिल रहा नया मंच
हाल के वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने की दिशा में कई प्रयास किए जा रहे हैं। दंगल जैसे आयोजन न केवल खिलाड़ियों को मंच देते हैं, बल्कि ग्रामीण संस्कृति और परंपराओं को भी जीवित रखते हैं।
खेड़ावदा में आयोजित यह प्रतियोगिता भी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आयोजकों का कहना है कि आने वाले समय में और बड़े स्तर पर दंगल प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।
युवाओं में बढ़ रहा खेलों के प्रति रुझान
ग्रामीण क्षेत्रों में अब युवाओं का रुझान खेलों की ओर तेजी से बढ़ रहा है। कुश्ती, कबड्डी और एथलेटिक्स जैसे पारंपरिक खेलों में नई प्रतिभाएं सामने आ रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ग्रामीण खिलाड़ियों को सही प्रशिक्षण, संसाधन और अवसर मिलें, तो वे राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भी बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
विजय खेर जैसे खिलाड़ी इसी बदलाव की तस्वीर पेश कर रहे हैं।
पारंपरिक अखाड़ों की अहमियत
आज भले ही आधुनिक खेल सुविधाएं बढ़ रही हों, लेकिन गांवों के अखाड़ों की अपनी अलग पहचान है। अखाड़े केवल अभ्यास का स्थान नहीं होते, बल्कि यहां अनुशासन, सम्मान और भाईचारे की सीख भी दी जाती है।
पवन पुत्र व्यायामशाला खाचरौद जैसे अखाड़े आज भी पारंपरिक खेल संस्कृति को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
खेल से मिलती है नई दिशा
विशेषज्ञों का कहना है कि खेल युवाओं को सकारात्मक दिशा देने का सबसे प्रभावी माध्यम है। खेलों से न केवल शारीरिक विकास होता है, बल्कि आत्मविश्वास और मानसिक मजबूती भी बढ़ती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित दंगल और खेल प्रतियोगिताएं युवाओं को नशे और गलत गतिविधियों से दूर रखने में भी मदद करती हैं।
क्षेत्र के लिए गौरव का क्षण
विजय खेर की जीत को क्षेत्र के लोगों ने गौरव का क्षण बताया है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ग्रामीण प्रतिभाओं को यदि इसी तरह मंच मिलता रहा, तो आने वाले समय में क्षेत्र से और भी कई खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।
आयोजन ने छोड़ी सकारात्मक छाप
खेड़ावदा में आयोजित विराट कुश्ती काटा दंगल ने पूरे क्षेत्र में सकारात्मक माहौल बनाया। आयोजन के दौरान खेल भावना, अनुशासन और पारंपरिक संस्कृति का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
दर्शकों ने मुकाबलों का भरपूर आनंद लिया और खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया।
निष्कर्ष
खेड़ावदा में आयोजित विराट कुश्ती दंगल केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि ग्रामीण खेल संस्कृति और युवाओं की प्रतिभा का उत्सव बनकर सामने आया। कंचनखेड़ी के विजय खेर पहलवान ने अपनी मेहनत, लगन और शानदार प्रदर्शन से यह साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी बड़े शहर की मोहताज नहीं होती।
उनकी जीत ने न केवल उनके गुरु और परिवार को गर्व महसूस कराया, बल्कि पूरे क्षेत्र के युवाओं को प्रेरणा भी दी है। आने वाले समय में विजय खेर जैसे खिलाड़ी ग्रामीण खेल परंपराओं को नई पहचान देने का काम करेंगे।
