भारतीय ज्ञान परम्परा को क्रमबद्ध करना समय की आवश्यकता – कुलगुरु प्रो. राकेश सिंघई
इंदौर (Madhya Pradesh News): देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर स्थित प्राचीन भारतीय गणित केन्द्र द्वारा 15-16 सितम्बर 2025 को आयोजित कार्यशाला में भारतीय ज्ञान परम्परा और गणित शिक्षा को समकालीन शिक्षा पद्धति से जोड़ने पर मंथन हुआ।
गणित है मानव जाति का सबसे बड़ा टूल – कुलगुरु प्रो. राकेश सिंघई
कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में कुलगुरु प्रो. राकेश सिंघई ने कहा –
“मानव जाति का सबसे बड़ा टूल गणित ही है। छंद शास्त्र से लेकर यज्ञवेदियों तक, संस्कृत साहित्य और पूजा पद्धति में गणित की गहराई समाहित है। हमें अपने पुराने ग्रंथों और परम्पराओं से गणितीय ज्ञान को व्यवस्थित रूप से खोजकर संयोजित करना होगा।”
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 से जुड़े भारतीय चिंतन – प्रो. रमेशचन्द्र भारद्वाज
मुख्य अतिथि एवं महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र के पूर्व कुलगुरु प्रो. रमेशचन्द्र भारद्वाज ने कहा –
“भारत के हृदय प्रदेश म.प्र. ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को आत्मसात किया है। विद्वानों के परिश्रम से प्रस्तावित पाठ्यक्रम आने वाले 2-3 महीनों में सामने आएगा। यह कार्य भारत माता की सबसे बड़ी सेवा है क्योंकि गणित ही मानव ज्ञान का आधार है।”
प्राचीन भारतीय गणित केन्द्र की भूमिका
नोडल अधिकारी प्रो. अनुपम जैन ने जानकारी दी कि:
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अगस्त 2021 में देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर में प्राचीन भारतीय गणित केन्द्र की स्थापना हुई।
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बसंत पंचमी 2022 से केंद्र ने औपचारिक कार्य शुरू किया।
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जुलाई 2024 में स्नातक प्रथम वर्ष का पाठ्यक्रम तैयार किया गया और म.प्र. सरकार ने उसे लागू भी किया।
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अब द्वितीय एवं तृतीय वर्ष तथा स्नातकोत्तर स्तर पर पाठ्यक्रम संशोधन हेतु यह कार्यशाला आयोजित हुई है।
उन्होंने कहा कि “प्राचीन गणितज्ञों के ज्ञान के आधार पर आधुनिक समस्याओं का समाधान खोजा जाएगा।”
कार्यशाला के प्रमुख सत्र
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प्रथम सत्र में डॉ. मीनाक्षी (दिल्ली) और प्रो. रमेशचन्द्र भारद्वाज (कुरुक्षेत्र) ने बीज वक्तव्य दिया।
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स्नातक स्तर के पाठ्यक्रम पर चर्चा प्रो. एस. के. बंडी (अध्यक्ष) और प्रो. वी. के. गुप्ता (मुख्य अतिथि) की उपस्थिति में हुई।
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16 सितम्बर को स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों पर विस्तृत चर्चा हुई जिसकी अध्यक्षता प्रो. संदीप तिवारी (विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन) ने की।
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इस दौरान डॉ. अनिल राजपूत (विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी, उच्च शिक्षा विभाग, भोपाल) और डॉ. एस. एस. श्रीवास्तव भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
समापन सत्र और संकल्प
समापन सत्र में डॉ. संजीव टोकेकर की अध्यक्षता में कार्यशाला की आख्या प्रस्तुत की गई और प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। अंत में सभी विद्वानों ने संकल्प लिया कि भारतीय ज्ञान परम्परा और गणित को नई पीढ़ी तक सक्षम रूप से हस्तांतरित किया जाएगा।

