न्यायालय के आदेश का पालन कराने की मांग, पशु चिकित्सकों ने राज्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन
दैनिक स्वराज वाणी | सारंगपुर
सारंगपुर। समयमान वेतनमान से जुड़ी मांग को लेकर पशुपालन विभाग के पशु चिकित्सकों ने शनिवार को राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार डॉ. गौतम टेटवाल को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। पशु चिकित्सकों ने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के निर्णय का शीघ्र पालन करने और लंबे समय से लंबित वेतन संबंधी विसंगति दूर करने की मांग की।
ज्ञापन सौंपने वालों में सारंगपुर के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अमित शाक्या, राजगढ़ के डॉ. विनोद यादव और खुजनेर के डॉ. रामवरण शामिल थे। उन्होंने कहा कि पशु चिकित्सकों को भी अन्य चिकित्सा संवर्गों की तरह सेवा अवधि के आधार पर समयमान वेतनमान का लाभ मिलना चाहिए।
5, 10, 15 और 30 वर्ष की सेवा पर लाभ की मांग
पशु चिकित्सकों ने ज्ञापन में कहा कि मेडिकल और डेंटल अधिकारियों को 5, 10, 15 तथा 30 वर्ष की सेवा पूर्ण होने पर समयमान वेतनमान का लाभ मिलता है। उन्होंने पशु चिकित्सा अधिकारियों के लिए भी इसी आधार पर लाभ लागू करने की मांग की।
इस विषय पर मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में चले मामले में भी पशु चिकित्सा अधिकारियों और अन्य चिकित्सा संवर्गों के समयमान वेतनमान का अंतर उठाया गया था। न्यायालय के जनवरी 2026 के आदेश में दर्ज है कि याचिकाकर्ताओं ने मेडिकल और डेंटल अधिकारियों को निर्धारित सेवा अवधि पर मिलने वाले लाभ के मुकाबले पशु चिकित्सकों को अलग व्यवस्था के तहत लाभ दिए जाने का मुद्दा रखा था।
आदेश लागू करने का अनुरोध
प्रतिनिधियों ने राज्यमंत्री से आग्रह किया कि मुख्यमंत्री तक उनकी मांग पहुंचाई जाए और न्यायालयीन निर्णय के पालन के लिए आवश्यक विभागीय कार्रवाई की जाए। उनका कहना था कि निर्णय के बाद भी लाभ मिलने की प्रक्रिया स्पष्ट और समयबद्ध होनी चाहिए, ताकि पात्र अधिकारियों को अपनी सेवा अवधि के अनुसार वेतन संबंधी लाभ मिल सकें।
ज्ञापन में पशु चिकित्सकों ने वेतन विसंगति को लंबे समय से लंबित विषय बताया। उन्होंने मांग की कि शासन संबंधित आदेश की समीक्षा कर उसका पालन सुनिश्चित करे। साथ ही विभागीय स्तर पर ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे पात्र अधिकारियों के प्रकरणों का निराकरण किया जा सके।
ग्रामीण क्षेत्रों में पशु चिकित्सकों की भूमिका बताई
ज्ञापन देने वाले अधिकारियों ने कहा कि पशु चिकित्सक ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं के उपचार के साथ पशुपालन और दुग्ध उत्पादन से जुड़ी गतिविधियों में काम करते हैं। निराश्रित पशुओं के इलाज तथा पशुपालन से संबंधित शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन में भी उनकी जिम्मेदारी रहती है।
प्रतिनिधियों के अनुसार, इन कार्यों के लिए पशु चिकित्सकों को दूरस्थ क्षेत्रों में भी सेवाएं देनी पड़ती हैं। उन्होंने कहा कि उनकी सेवाओं और जिम्मेदारियों को देखते हुए वेतनमान संबंधी मांग का शीघ्र समाधान किया जाना चाहिए। उन्होंने इसे केवल व्यक्तिगत वेतन का विषय न बताते हुए पूरे पशु चिकित्सा संवर्ग से जुड़ा मुद्दा बताया।
मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
डॉ. अमित शाक्या, डॉ. विनोद यादव और डॉ. रामवरण ने डॉ. गौतम टेटवाल को सौंपे ज्ञापन के माध्यम से मुख्यमंत्री से कार्रवाई का अनुरोध किया। पशु चिकित्सकों की मुख्य मांग न्यायालयीन आदेश के अनुरूप समयमान वेतनमान का लाभ और लंबित वेतन विसंगति का निराकरण है।
ज्ञापन सौंपे जाने के बाद अब पशु चिकित्सक शासन की कार्रवाई की प्रतीक्षा कर रहे हैं। ज्ञापन पर राज्यमंत्री या राज्य सरकार की ओर से दिए गए किसी जवाब अथवा पालन की समयसीमा की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
