वरदा कला संस्थान, Indore का भव्य भरतनाट्यम अरंगेत्रम – 15 फरवरी 2026
Indore की सांस्कृतिक धरोहर वरदा कला संस्थान 15 फरवरी 2026 को अपनी दो प्रतिभाशाली शिष्याओं विश्वांगी वडनेरे और डॉ. भूमि बिसेन का भव्य भरतनाट्यम अरंगेत्रम प्रस्तुत करने जा रहा है। यह अरंगेत्रम न केवल विद्यार्थियों की वर्षों की साधना का प्रतीक है, बल्कि संस्थान की 25 वर्षीय सांस्कृतिक यात्रा का भी उत्सव है।
वरदा कला संस्थान: 25 वर्षों की सांस्कृतिक साधना
1999 में स्थापित वरदा कला संस्थान आर्किटेक्ट और वरिष्ठ नृत्यांगना श्रीमती श्रुति राजीव शर्मा के नेतृत्व में संचालित होता है। अब तक इस संस्थान ने 1000 से अधिक विद्यार्थियों को प्रशिक्षित किया है और 187+ सामाजिक सरोकारों (जैसे बेटी बचाओ, अंगदान, कैंसर जागरूकता) पर आधारित नृत्य प्रस्तुतियों के माध्यम से सिंहस्थ 2016, मालवा उत्सव, राजवाड़ा इंदौर जैसे प्रमुख मंचों पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है।
श्रीमती श्रुति राजीव शर्मा बी. आर्क (मराठवाड़ा विश्वविद्यालय) और भरतनाट्यम स्नातकोत्तर (राजा मान सिंह तोमर विश्वविद्यालय) प्राप्त वरिष्ठ नृत्यांगना हैं। उन्होंने 1994 में अपने अरंगेत्रम के बाद संगीत प्रभाकर और कुचिपुडी नाट्य में महारत हासिल की और 2500+ विद्यार्थियों को प्रशिक्षित किया। उनके निर्देशन में प्रस्तुत नृत्य-नाटिकाएँ जैसे निर्मल अहिल्या स्मरण खजुराहो महोत्सव सहित कई प्रमुख मंचों पर प्रदर्शित हो चुकी हैं। उन्हें सांस्कृतिक मंत्रालय सम्मान, इंदौर गौरव अवॉर्ड, मालवा रत्न जैसी कई प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हैं।

भरतनाट्यम अरंगेत्रम: गुरु से शिष्य तक का पावन समारोह
भरतनाट्यम, तमिलनाडु की प्राचीन शास्त्रीय नृत्यशैली, भाव-राग-ताल का अद्वितीय संगम है। अरंगेत्रम वह अवसर है जब शिष्य अपनी पहली औपचारिक एकल प्रस्तुति प्रस्तुत करता है और गुरु उसे स्वतंत्र कलाकार घोषित करता है।
इस अरंगेत्रम में पारंपरिक मार्गम की रचनाएँ जैसे कवश्वम, मल्लारी, जातिस्वरम, शब्दम, वर्णम, वृंदावनी वेणु वाझे अभंग, अर्धनारी नटेश्वर, परमेश्वरी, बिल्हारी थिल्लाना, वन्दे मातरम् आदि जीवंत कर्नाटक संगीत के साथ प्रस्तुत की जाएँगी।
प्रतिभाशाली शिष्याएँ
विश्वांगी वडनेरे
विश्वांगी ने चार वर्ष की आयु से गुरु श्रुति राजीव शर्मा के मार्गदर्शन में भरतनाट्यम की साधना आरंभ की। उन्होंने क्राइस्ट विश्वविद्यालय, बेंगलुरु से Psychology, English Literature और Performing Arts में स्नातक की डिग्री प्राप्त की है और भरतनाट्यम में प्रभाकर भी हासिल किया है।
विश्वांगी ने 40+ प्रस्तुतियों में अपनी कला का प्रदर्शन किया है, जिनमें दूरदर्शन रिकॉर्डिंग, श्रावण महोत्सव उज्जैन, मिशिगन (USA) सांस्कृतिक विनिमय शामिल हैं। Teach For India फेलो रह चुकीं विश्वांगी वर्तमान में The Education Alliance में प्रोग्राम मैनेजर के रूप में सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान के लिए कार्य कर रही हैं। उनके लिए भरतनाट्यम आत्म-अभिव्यक्ति और आंतरिक शांति का साधन है।
डॉ. भूमि बिसेन
भूमि बिसेन ने छह वर्ष की आयु से भरतनाट्यम की साधना शुरू की। उन्होंने प्रभाकर (भरतनाट्यम) प्राप्त किया और राजा मान सिंह तोमर संगीत विश्वविद्यालय से गायन में प्रविशिका एवं प्रथमा उत्तीर्ण की।
सेंट राफेल्स स्कूल की खेल-संस्कृति विजेता भूमि, योग और प्राणायाम की साधिका भी हैं। BAMS (Bachelor of Ayurvedic Medicine and Surgery) धारक भूमि ने 75+ प्रस्तुतियों में भाग लिया, जिनमें विश्व रिकॉर्ड तिरंगा, सिंहस्थ उज्जैन 2016, मालवा उत्सव, Global Bamboo Summit 2016, भोज महोत्सव धार, भारत पर्व उज्जैन शामिल हैं। उनके लिए भरतनाट्यम शरीर, मन और आत्मा को एकसूत्र करने वाली पवित्र साधना है।

आयोध्या में भव्य मंगल मिलन
वरदा कला संस्थान की यह प्रस्तुति आयोध्या नगरी में आयोजित की जा रही है। इस अवसर पर संस्थान की स्थानीय कमेटी और समाज जन ने आर्यिका संघ की भव्य मंगल अगवानी की। उपस्थित सभी ने ज्योेष्ठ श्रैष्ठ गणनी आर्यिका ज्ञानमति माताजी सहित संघस्थों का स्वागत किया।
अरंगेत्रम का यह आयोजन न केवल दो शिष्याओं की विद्यार्थी से कलाकार तक की यात्रा को दर्शाता है, बल्कि मालवा क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपरा को जीवंत रखने वाली वरदा कला संस्थान की 25 वर्षीय साधना का उत्सव भी है।
निष्कर्ष
वरदा कला संस्थान द्वारा प्रस्तुत यह अरंगेत्रम सांस्कृतिक धरोहर, गुरु-शिष्य परंपरा, और सामाजिक जागरूकता का अनूठा मिश्रण है। विश्वांगी वडनेरे और डॉ. भूमि बिसेन की प्रस्तुतियाँ दर्शकों को भरतनाट्यम की शुद्धता, भाव और काव्यात्मकता का अनुभव कराएँगी। यह अवसर सभी कला प्रेमियों और सामाजिक-सांस्कृतिक समुदाय के लिए अविस्मरणीय साबित होगा।
