Uttarakhand News: 97 दिन बाद रूस से घर लौटे दो भाई, नौकरी का झांसा देकर भेजे गए थे विदेश; ₹8 लाख लेने का आरोप
Uttarakhand News: उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के दो भाइयों के लिए करीब 97 दिनों का लंबा इंतजार आखिरकार खत्म हो गया। रोजगार के बेहतर अवसर का सपना लेकर रूस पहुंचे आनंद सिंह कार्की और भूपेंद्र सिंह कार्की अब सकुशल अपने घर लौट आए हैं। दोनों भाइयों को कथित तौर पर नौकरी दिलाने का भरोसा देकर ट्रैवल एजेंसी के माध्यम से रूस भेजा गया था। परिवार का आरोप है कि विदेश भेजने के नाम पर उनसे करीब 8 लाख रुपये लिए गए।
रूस पहुंचने के बाद दोनों भाइयों को कथित तौर पर उस तरह का रोजगार नहीं मिला, जिसका वादा भारत में किया गया था। परिवार के अनुसार, उनसे उनकी इच्छा के विपरीत दूसरे काम कराए गए और वेतन को लेकर भी परेशानी का सामना करना पड़ा। लंबे समय तक संपर्क नहीं होने और जिस स्थान पर उन्हें रखा गया था, उसके आसपास ड्रोन या मिसाइल हमलों की जानकारी मिलने के बाद परिजनों की चिंता और बढ़ गई थी।
CM Dhami के हस्तक्षेप से हुई सुरक्षित वापसी
दोनों युवकों की स्थिति की जानकारी सामने आने के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले को गंभीरता से लिया। मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य सरकार के अधिकारियों ने संबंधित केंद्रीय अधिकारियों, विदेश मंत्रालय और रूस स्थित भारतीय दूतावास के साथ लगातार संपर्क स्थापित किया।
लगातार किए गए प्रयासों के बाद दोनों भाइयों की भारत वापसी संभव हो सकी। घर लौटने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दोनों युवकों से फोन पर बातचीत कर उनका हालचाल जाना और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली।
करीब तीन महीने से अधिक समय बाद बेटों को सुरक्षित अपने सामने देखकर परिवार ने राहत की सांस ली। परिजनों ने मुख्यमंत्री, राज्य सरकार, विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास समेत उन सभी लोगों का आभार जताया, जिन्होंने दोनों भाइयों की वापसी के प्रयासों में सहयोग किया।
रोजगार का भरोसा देकर रूस भेजने का आरोप
परिवार से मिली जानकारी के अनुसार, आनंद सिंह कार्की और भूपेंद्र सिंह कार्की को बेहतर रोजगार दिलाने का भरोसा दिया गया था। इसके लिए दोनों भाइयों ने सितारगंज स्थित एक ट्रैवल एजेंसी के माध्यम से विदेश जाने की प्रक्रिया शुरू की।
परिवार का आरोप है कि रोजगार के नाम पर उनसे करीब 8 लाख रुपये लिए गए। इसके बाद दोनों को रूस भेज दिया गया। उन्हें उम्मीद थी कि वहां उन्हें बेहतर नौकरी मिलेगी और वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकेंगे।
हालांकि, रूस पहुंचने के बाद परिस्थितियां उनके अनुमान के विपरीत हो गईं।
5 मई को भारत से हुए थे रवाना
दोनों भाई 5 मई 2026 को भारत से रूस के लिए रवाना हुए थे। अगले दिन यानी 6 मई को वे मॉस्को पहुंचे। परिजनों के मुताबिक, रूस पहुंचने के बाद उन्हें उस काम में नहीं लगाया गया, जिसके लिए उन्हें विदेश भेजा गया था।
परिवार का दावा है कि दोनों युवकों से उनकी इच्छा के खिलाफ दूसरे प्रकार के काम कराए जाने लगे। उन्हें कथित तौर पर काम के अनुरूप वेतन भी नहीं दिया गया। इसके अलावा स्वतंत्र रूप से आने-जाने को लेकर भी पाबंदियां होने की बात परिवार ने कही।
काम करने से इनकार करने पर धमकाए जाने का भी आरोप लगाया गया। इन परिस्थितियों के कारण दोनों भाई मुश्किल स्थिति में फंस गए और परिवार लगातार उनकी सुरक्षित वापसी के लिए प्रयास करता रहा।
संपर्क टूटने से परिवार की बढ़ी चिंता
रूस पहुंचने के बाद कुछ समय तक परिवार का दोनों भाइयों से संपर्क बना रहा, लेकिन बाद में नियमित बातचीत नहीं हो सकी। संपर्क नहीं होने के कारण परिजनों की चिंता लगातार बढ़ती गई।
परिजनों के अनुसार, आखिरी बातचीत के दौरान दोनों युवकों ने जिस परिसर में उन्हें रखा गया था, उसके आसपास ड्रोन अथवा मिसाइल हमलों की जानकारी दी थी। यह सुनकर परिवार की चिंता और ज्यादा बढ़ गई।
परिजनों को आशंका थी कि संघर्ष प्रभावित क्षेत्र में दोनों भाइयों की सुरक्षा खतरे में हो सकती है। इसके बाद मामले को संबंधित अधिकारियों के सामने उठाया गया और दोनों की सुरक्षित वापसी के लिए प्रयास तेज किए गए।
राज्य सरकार ने विदेश मंत्रालय से किया समन्वय
मामला मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के संज्ञान में आने के बाद राज्य सरकार ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। अधिकारियों ने विदेश मंत्रालय और रूस स्थित भारतीय दूतावास के साथ समन्वय स्थापित किया।
दोनों भाइयों की लोकेशन, उनकी स्थिति और सुरक्षित वापसी से जुड़ी प्रक्रिया को लेकर लगातार जानकारी जुटाई गई। लंबे समय तक चले प्रयासों के बाद आखिरकार दोनों युवकों को भारत वापस लाया गया।
करीब 97 दिनों बाद जब दोनों भाई अपने घर पहुंचे तो परिवार में खुशी का माहौल बन गया। लंबे समय से उनकी वापसी का इंतजार कर रहे परिजनों ने राहत की सांस ली।
CM Dhami ने परिवार से की बात
घर वापसी के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दोनों भाइयों से फोन पर बातचीत की। उन्होंने युवकों का हालचाल जाना और उनके परिवार से भी पूरे घटनाक्रम के बारे में जानकारी ली।
परिवार ने मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप और सरकार की ओर से किए गए प्रयासों के लिए आभार व्यक्त किया। परिजनों ने कहा कि इतने लंबे समय के बाद दोनों युवकों को सुरक्षित घर लौटते देखना उनके लिए बेहद राहत की बात है।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि उत्तराखंड का कोई भी नागरिक दुनिया के किसी भी हिस्से में संकट में होगा तो राज्य सरकार उसकी मदद के लिए हरसंभव प्रयास करेगी। उन्होंने प्रदेशवासियों की सुरक्षा, सम्मान और हितों को सरकार की प्राथमिकता बताया।
विदेश में फंसे भारतीयों की सुरक्षा पर जोर
यह मामला विदेश में रोजगार की तलाश में जाने वाले युवाओं की सुरक्षा और सावधानी से जुड़ा एक महत्वपूर्ण उदाहरण भी सामने लाता है। बेहतर रोजगार और अधिक आय की उम्मीद में बड़ी संख्या में युवा विदेश जाते हैं। ऐसे में नौकरी, वीजा, नियोक्ता और एजेंसी की विश्वसनीयता की जांच करना बेहद जरूरी हो जाता है।
दोनों भाइयों के मामले में परिवार की ओर से ट्रैवल एजेंसी पर रोजगार का झांसा देने और बड़ी रकम लेने के आरोप लगाए गए हैं। पूरे मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
Kashi Singh Airy और Ramdev Verma ने भी की मदद
दोनों भाइयों की सुरक्षित वापसी के प्रयासों में यूकेडी के वरिष्ठ नेता काशी सिंह ऐरी और समाजसेवी रामदेव वर्मा की भूमिका का भी उल्लेख किया गया है। बताया गया कि दोनों ने परिवार के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा और संबंधित अधिकारियों के स्तर पर समन्वय में सहयोग किया।
परिवार ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावास, राज्य सरकार के अधिकारियों और वापसी के प्रयासों में शामिल सभी लोगों के प्रति आभार जताया।
97 दिन बाद परिवार में लौटी खुशी
करीब तीन महीने से अधिक समय तक रूस में फंसे रहने के बाद आनंद सिंह कार्की और भूपेंद्र सिंह कार्की की सुरक्षित घर वापसी ने परिवार को बड़ी राहत दी है। नौकरी की तलाश में विदेश गए दोनों भाई जिस परिस्थितियों में फंसे, उसने परिवार को लंबे समय तक चिंता में रखा।
अब दोनों के सकुशल लौटने के बाद परिजनों ने राहत की सांस ली है। यह मामला एक बार फिर इस बात की ओर ध्यान दिलाता है कि विदेश में रोजगार के लिए जाने से पहले एजेंसी और नौकरी से जुड़ी सभी जानकारियों की अच्छी तरह जांच करना जरूरी है। वहीं, संकट की स्थिति में सरकारी एजेंसियों और भारतीय मिशनों के साथ समय पर संपर्क करना भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
