US ड्रोन हमलों ने बिगाड़ा अफगानिस्तान-पाकिस्तान शांति प्रयास, पाकिस्तान ने भारत को बेवजह बनाया विलन
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच शांति स्थापित करने की कोशिशें लगातार असफल हो रही हैं, और अब इसके पीछे का असली कारण सामने आया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह विफलता भारत की वजह से नहीं बल्कि अमेरिका के ड्रोन हमलों और पाकिस्तान की भूमि के इस्तेमाल से जुड़ी है। अमेरिका ने पाकिस्तान की जमीन का इस्तेमाल कर अफगानिस्तान में हवाई हमले (US drones from Pakistani soil) किए हैं, जिसके कारण दोनों देशों के बीच विवाद और बढ़ गया है। इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान ने अपनी भूमिका छुपाने के लिए भारत पर आरोप मढ़ना शुरू कर दिया है।
अफगानिस्तान-पाकिस्तान के बीच शांति प्रयासों में विफलता
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच शांति वार्ता (Afghanistan-Pakistan peace talks) कई बार शुरू हुई लेकिन हर बार बेनतीजा रही। हाल ही में तुर्किए में आयोजित बातचीत भी इसी श्रृंखला का हिस्सा थी। इस वार्ता में पाकिस्तान ने अपनी मांगों के साथ कुछ शर्तें रखीं, लेकिन अफगान पक्ष ने इन पर सहमति देने से इनकार कर दिया। अफगान अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान ने अमेरिकी ड्रोन हमलों को रोकने का कोई प्रयास नहीं किया और यही मुख्य वजह थी कि वार्ता सफल नहीं हो सकी।
TOLO न्यूज के अनुसार, अफगानिस्तान ने पाकिस्तान से अमेरिकी ड्रोन उड़ानों को रोकने और अपने एयरस्पेस का उल्लंघन न करने की मांग की। अफगान अधिकारियों का मानना है कि पाकिस्तान की भूमि का इस्तेमाल कर अमेरिका अफगानिस्तान में हमले कर रहा है। इस्लामाबाद ने इन हमलों को रोकने में पूरी तरह असमर्थता जताई और इसी असमर्थता के कारण अफगान पक्ष शांति वार्ता में आगे नहीं बढ़ सका।
अमेरिका के ड्रोन हमलों का पाकिस्तान पर प्रभाव
अमेरिकी ड्रोन (US drones striking Afghanistan) पाकिस्तान की सीमाओं का इस्तेमाल कर अफगानिस्तान में हमले करते हैं। इसके चलते पाकिस्तान अपने नियंत्रण से बाहर की स्थिति में फंसा हुआ है। अफगानिस्तान ने स्पष्ट किया कि वह तभी शांति वार्ता में आगे बढ़ेगा, जब पाकिस्तान अमेरिकी ड्रोन उड़ानों और एयरस्पेस उल्लंघन को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएगा।
पाकिस्तानी मीडिया और TOLO न्यूज रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान ने अमेरिका के साथ गुप्त समझौते के तहत अफगानिस्तान पर ड्रोन हमलों के लिए अपने क्षेत्र का इस्तेमाल करने की अनुमति दी है। यह समझौता पाकिस्तान की सैन्य और राजनीतिक स्थिति की कमजोरियों को दर्शाता है। पाकिस्तान अपनी खराब अर्थव्यवस्था और सैन्य सीमाओं के कारण अमेरिका को अपने क्षेत्र का उपयोग करने की छूट दे रहा है।
पाकिस्तान का भारत पर आरोप
शांति वार्ता विफल होने के बाद पाकिस्तान ने भारत को दोषी ठहराया। पाकिस्तानी विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अफगान तालिबान को धमकाते हुए कहा कि अगर वे पाकिस्तान के खिलाफ कदम उठाते हैं, तो उन्हें पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा। इस बयान के साथ उन्होंने भारत पर भी वार्ता विफल होने का आरोप लगाया।हालांकि, अफगान और तुर्की मीडिएटरों का मानना है कि असली वजह अमेरिकी ड्रोन हैं। पाकिस्तान का रवैया और अमेरिकी ड्रोन हमलों की अनुमति ही वार्ता विफल होने का मुख्य कारण थे।
सीमा पर झड़पें और हवाई हमले
सितंबर 2025 की शुरुआत में अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच झड़पें शुरू हुईं। यह संघर्ष तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के हमलों के जवाब में हुआ। पाकिस्तान ने काबुल और कंधार में एयरस्ट्राइक्स (Airstrikes in Afghanistan) की, जबकि अफगानिस्तान ने भी सीमाओं पर जवाबी कार्रवाई की। दोनों तरफ 200 से अधिक लोगों की मौत हुई।
विशेष रूप से अमेरिकी ड्रोन हमलों ने इस स्थिति को और जटिल बना दिया। पाकिस्तान ने अनजाने में स्वीकार किया कि वह अमेरिका को अपनी जमीन का उपयोग कर अफगानिस्तान में हमले करने की अनुमति दे रहा है। यह खुलासा तुर्किए में हुई वार्ता में सामने आया।
शांति वार्ता में पाकिस्तान का रवैया
तुर्किए में हुई बातचीत में पाकिस्तान ने शुरुआत में कुछ शर्तें मान ली थीं। लेकिन बाद में एक फोन कॉल के बाद उन्होंने अपनी स्थिति बदल दी। इस कॉल में पाकिस्तान के उच्च कमांड को बताया गया कि उनका अमेरिकी ड्रोन पर कोई नियंत्रण नहीं है। यही कारण था कि पाकिस्तान ने वार्ता में रुख बदल दिया और सार्वजनिक रूप से अमेरिका के ड्रोन हमलों के मुद्दे को स्वीकार नहीं किया।
पाकिस्तानी डेलिगेशन की इस असहयोगी और गैर-कूटनीतिक नीति ने अफगान पक्ष और मीडिएटरों को हैरान कर दिया। अफगानिस्तान ने बार-बार पाकिस्तान से अमेरिकी ड्रोन उड़ानों को रोकने की मांग की, लेकिन पाकिस्तान ने इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
पाकिस्तान की रणनीति और असली कारण
विश्लेषकों के अनुसार, पाकिस्तान की रणनीति स्पष्ट नहीं है। क्या वह वास्तव में शांति चाहता था, या सिर्फ दिखावा कर रहा था कि वह वार्ता में सक्रिय है? अफगान अधिकारियों का मानना है कि पाकिस्तान का असली लक्ष्य अमेरिकी ड्रोन हमलों के माध्यम से अपनी स्थिति मजबूत करना और किसी भी असफल वार्ता का दोष भारत पर डालना था।
इसके अलावा, पाकिस्तान ने अफगानिस्तान से तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को आधिकारिक आतंकवादी संगठन घोषित करने की भी मांग की, जो अफगान पक्ष के लिए अस्वीकार्य थी।
निष्कर्ष
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच शांति प्रक्रिया में विफलता का असली कारण अमेरिकी ड्रोन हमले और पाकिस्तान की भूमि का उनका उपयोग है। पाकिस्तान ने अपनी कमजोरी और अमेरिकी दबाव के कारण शांति वार्ता में सहयोग नहीं किया और इसके लिए भारत को दोषी ठहराया।
इस पूरे घटनाक्रम से स्पष्ट है कि US drones from Pakistani soil और airstrikes in Afghanistan ही अफगानिस्तान-पाकिस्तान संघर्ष की जड़ हैं। यदि पाकिस्तान वास्तव में शांति चाहता है, तो उसे अमेरिकी ड्रोन उड़ानों और अपने एयरस्पेस उल्लंघन को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
अभी के लिए, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच शांति वार्ता केवल एक अधूरा प्रयास बनकर रह गई है, जबकि अमेरिका और पाकिस्तान की भूमिकाओं ने क्षेत्रीय स्थिरता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।


