—Advertisement—

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा: कहा- देश में चल रहे घटनाक्रम से दुखी हूं, युवाओं की आकांक्षाओं का सम्मान करते हुए लिया फैसला

Author Picture
Published On: 25 July 2026
Union Education Minister Dharmendra Pradhan announces his resignation amid the NEET-UG 2026 controversy
— Union Education Minister Dharmendra Pradhan announces his resignation amid the NEET-UG 2026 controversy

—Advertisement—

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा: कहा- देश में चल रहे घटनाक्रम से दुखी हूं, युवाओं की आकांक्षाओं का सम्मान करते हुए लिया फैसला

NEET-UG 2026 विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री का बड़ा फैसला, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपा इस्तीफा

नई दिल्ली। देशभर में NEET-UG 2026 परीक्षा को लेकर जारी विवाद और छात्रों के लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपते हुए कहा कि देश में चल रहे घटनाक्रम से वे बेहद दुखी हैं और युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं तथा लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करते हुए यह निर्णय लिया है।

धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत संदेश जारी कर अपने इस्तीफे की पुष्टि की। उन्होंने लिखा कि शिक्षा केवल एक मंत्रालय नहीं, बल्कि देश के भविष्य का आधार है और उन्होंने हमेशा विद्यार्थियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।

उनके इस्तीफे के बाद देश की राजनीति, शिक्षा जगत और छात्र संगठनों में नई चर्चा शुरू हो गई है। वहीं जंतर-मंतर पर आंदोलन कर रहे छात्रों ने इस फैसले को अपने संघर्ष की पहली बड़ी सफलता बताया।

NEET-UG 2026 विवाद के बीच आया इस्तीफा

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब देशभर में NEET-UG 2026 परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों को लेकर लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं।

दिल्ली के जंतर-मंतर सहित कई राज्यों में छात्र संगठन परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं।

इसी बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने अपने पद से हटने का फैसला लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर बड़ा संदेश दिया है।

सोशल मीडिया पर साझा किया भावुक संदेश

अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया पर लिखा कि पिछले चार दशकों से अधिक समय से उनका पूरा जीवन शिक्षा, छात्रों और शिक्षकों की सेवा के लिए समर्पित रहा है।

उन्होंने कहा कि उनका हमेशा यह विश्वास रहा है कि किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत उसकी शिक्षा व्यवस्था होती है। यदि शिक्षा मजबूत होगी तो देश का भविष्य भी सुरक्षित और उज्ज्वल होगा।

उन्होंने लिखा कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान नई शिक्षा नीति, डिजिटल शिक्षा, कौशल विकास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अनेक प्रयास किए।

‘देश में चल रहे घटनाक्रम से दुखी हूं’

अपने संदेश में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि हाल के दिनों में देश में जो घटनाक्रम सामने आए हैं, उनसे उन्हें व्यक्तिगत रूप से गहरा दुख पहुंचा है।

उन्होंने कहा कि लाखों छात्रों की उम्मीदें और उनके परिवारों का विश्वास किसी भी सरकार के लिए सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है। यदि किसी परीक्षा को लेकर छात्रों में असंतोष पैदा होता है तो उसे गंभीरता से लेना आवश्यक है।

उन्होंने लिखा कि युवाओं का विश्वास बनाए रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है और उसी भावना के साथ उन्होंने अपना इस्तीफा सौंपा है।

NEET परीक्षा में अनियमितताओं पर सरकार की कार्रवाई का किया जिक्र

धर्मेंद्र प्रधान ने अपने बयान में कहा कि 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा में अनियमितताओं की जानकारी मिलते ही केंद्र सरकार ने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी थी।

उन्होंने बताया कि मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके।

उन्होंने कहा कि सरकार ने परीक्षा को रद्द करने और दोबारा आयोजित करने का निर्णय छात्रों के हित में लिया, जिससे किसी भी अभ्यर्थी के भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े।

CBT मोड में होगी भविष्य की NEET परीक्षा

धर्मेंद्र प्रधान ने अपने संदेश में यह भी जानकारी दी कि भविष्य में परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए महत्वपूर्ण बदलाव किए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि अगले वर्ष से NEET परीक्षा पूरी तरह कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।

उनके अनुसार इससे पेपर लीक जैसी घटनाओं की संभावना कम होगी और परीक्षा प्रक्रिया अधिक पारदर्शी तथा तकनीकी रूप से सुरक्षित बन सकेगी।

उन्होंने कहा कि सरकार आधुनिक तकनीक का उपयोग कर परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार लाने के लिए प्रतिबद्ध है।

‘जिम्मेदारी से कभी पीछे नहीं हटा’

अपने संदेश में धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट किया कि उन्होंने पूरे विवाद के दौरान अपनी जिम्मेदारी से कभी मुंह नहीं मोड़ा।

उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री होने के नाते उन्होंने हमेशा यह प्रयास किया कि किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य प्रभावित न हो।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने समयबद्ध तरीके से दोबारा परीक्षा आयोजित कर यह सुनिश्चित किया कि लाखों विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रक्रिया बाधित न हो।

उनका कहना था कि किसी भी छात्र के साथ अन्याय न हो, यही उनकी प्राथमिकता रही है।

चार दशक का सार्वजनिक जीवन और शिक्षा के प्रति समर्पण

धर्मेंद्र प्रधान ने अपने सार्वजनिक जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले चार दशकों से वे शिक्षा और युवाओं से जुड़े विषयों पर लगातार कार्य करते रहे हैं।

उन्होंने कहा कि उनके लिए शिक्षा केवल सरकारी नीति नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है।

उन्होंने अपने कार्यकाल में लागू की गई नई शिक्षा नीति, डिजिटल लर्निंग, कौशल विकास, शोध को बढ़ावा देने और उच्च शिक्षा के विस्तार जैसे प्रयासों का भी उल्लेख किया।

देशभर में जारी हैं छात्र प्रदर्शन

इस्तीफे से पहले देश के कई हिस्सों में छात्र संगठन लगातार प्रदर्शन कर रहे थे।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हजारों छात्र कई दिनों से धरने पर बैठे हुए थे। उनकी प्रमुख मांगें थीं—

  • NEET परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच।
  • दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई।
  • परीक्षा प्रणाली में सुधार।
  • छात्रों के हितों की सुरक्षा।
  • भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए ठोस व्यवस्था।

आंदोलनकारी छात्रों का कहना था कि यह लड़ाई केवल एक परीक्षा की नहीं बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र में पारदर्शिता लाने की है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं।

विपक्षी दलों ने इसे छात्रों के संघर्ष का परिणाम बताया, जबकि सत्तारूढ़ पक्ष के नेताओं का कहना है कि सरकार ने युवाओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए जिम्मेदार निर्णय लिया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम आने वाले समय में शिक्षा सुधार और परीक्षा प्रणाली को लेकर व्यापक बहस को जन्म दे सकता है।

क्या होगा आगे?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाएगी और सरकार परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए कौन-कौन से नए कदम उठाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह तकनीक आधारित और अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में सरकार तेजी से काम कर सकती है।

CBI जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली में संरचनात्मक सुधार की दिशा में भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं।

युवाओं का विश्वास बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती

शिक्षा किसी भी देश की प्रगति का आधार होती है और प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी होती है।

ऐसे में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती युवाओं का विश्वास दोबारा मजबूत करना है।

धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया है कि लोकतंत्र में जवाबदेही सर्वोपरि है और छात्रों की भावनाओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

आने वाले दिनों में सरकार की अगली रणनीति, CBI जांच की प्रगति और परीक्षा सुधारों पर लिए जाने वाले फैसलों पर पूरे देश की नजर रहेगी।

 

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp