Ujjain में बढ़ा डॉग बाइट का खतरा: चार महीनों में 3300 से अधिक मामले, महाकाल मंदिर क्षेत्र भी प्रभावित
मध्यप्रदेश के Ujjain शहर में आवारा कुत्तों की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। शहर के अलग-अलग इलाकों में डॉग बाइट की घटनाओं में तेजी से वृद्धि दर्ज की गई है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि बीते चार महीनों में 3300 से अधिक लोग कुत्तों के हमलों का शिकार हो चुके हैं। इनमें बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं सबसे अधिक प्रभावित हैं।
शहर के भीड़भाड़ वाले क्षेत्र जैसे रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, कॉलोनियां, प्रमुख बाजार और धार्मिक स्थल तक आवारा कुत्तों की मौजूदगी लोगों के लिए खतरा बनती जा रही है। विशेष रूप से महाकालेश्वर मंदिर परिसर और उसके आसपास के क्षेत्रों में कुत्तों के झुंड देखे जा रहे हैं, जिससे श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में भय का माहौल है।
महाकाल मंदिर परिसर में भी घटना
हाल ही में महाकाल मंदिर क्षेत्र में एक सफाई मित्र महिला पर कुत्ते द्वारा हमला किए जाने की घटना सामने आई थी, जिसके बाद यह मुद्दा और गंभीर हो गया। मंदिर जैसे अत्यंत संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले धार्मिक स्थल में इस तरह की घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई बार यह कुत्ते अचानक भीड़ में घुसकर लोगों को दौड़ा लेते हैं, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति भी बन जाती है।
शहरभर में डॉग बाइट के बढ़ते मामले
Ujjain नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, उज्जैन में पिछले चार महीनों में 3300 से ज्यादा डॉग बाइट के केस दर्ज किए गए हैं। इनमें से अधिकतर मामले अचानक हमलों के हैं, जहां लोग सड़कों पर चलते हुए या वाहन चलाते समय कुत्तों का शिकार बने।
सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र खाराकुआं, फ्रीगंज, नानाखेड़ा, ऋषिनगर, देवास रोड, नमकमंडी और महाकाल मंदिर क्षेत्र बताए जा रहे हैं। इन इलाकों में आवारा कुत्तों के झुंड लगातार देखे जा रहे हैं।
दोपहिया वाहन चालकों पर भी बढ़ा खतरा
कुत्तों के हमलों का असर केवल पैदल यात्रियों तक सीमित नहीं है। दोपहिया वाहन चालकों पर भी हमले के मामले तेजी से बढ़े हैं। कई घटनाओं में बाइक सवार कुत्तों से बचने के प्रयास में सड़क पर गिरकर घायल हो चुके हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शाम और रात के समय स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जब कुत्तों के झुंड सड़कों पर अधिक सक्रिय हो जाते हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सख्ती
19 मई को सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए आदेश जारी किया है। अदालत ने स्पष्ट कहा है कि भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाया जाए और उन्हें दोबारा उसी स्थान पर न छोड़ा जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिए हैं कि अस्पताल, स्कूल, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और धार्मिक स्थलों जैसे क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके लिए राज्य सरकारों और नगर निकायों को प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
अदालत ने यह भी कहा कि एबीसी (Animal Birth Control) सेंटरों की संख्या बढ़ाई जाए, नियमित टीकाकरण अभियान चलाया जाए और शेल्टर होम की व्यवस्था को मजबूत किया जाए, ताकि आवारा कुत्तों की संख्या पर नियंत्रण किया जा सके।
नगर निगम की योजना और कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद उज्जैन नगर निगम ने भी शहर में आवारा कुत्तों पर नियंत्रण के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। निगम ने करीब 35 लाख रुपये की नई योजना तैयार की है, जिसके तहत कुत्तों की नसबंदी और एंटी रेबीज टीकाकरण अभियान को तेज किया जाएगा।
सदावल स्थित एबीसी सेंटर में नसबंदी प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। नगर निगम ने लक्ष्य रखा है कि हर महीने लगभग 300 कुत्तों की नसबंदी की जाए।
इसके साथ ही शहर के 54 वार्डों में डिजिटल डॉग सर्वे कराने की योजना भी बनाई गई है, ताकि उन क्षेत्रों की पहचान की जा सके जहां कुत्तों की संख्या अधिक है और जहां हमले की घटनाएं ज्यादा हो रही हैं।
नगर निगम का बयान
Ujjain नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार शहर में आवारा कुत्तों पर नियंत्रण के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि सार्वजनिक स्थानों, धार्मिक स्थलों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों पर विशेष फोकस रहेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि पहले से चल रहे एबीसी और एंटी रेबीज टीकाकरण कार्यक्रम को और मजबूत किया जाएगा ताकि शहर में स्थिति को नियंत्रण में लाया जा सके।
स्थानीय लोगों की चिंता
शहर के लोगों का कहना है कि पिछले कई महीनों से आवारा कुत्तों की समस्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन अब तक इसका कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। लोगों का आरोप है कि कई योजनाएं तो बनाई गईं, लेकिन उनका असर जमीन पर दिखाई नहीं दिया।
विशेष रूप से माता-पिता अपने बच्चों को अकेले बाहर भेजने से डर रहे हैं, वहीं बुजुर्गों के लिए सुबह-शाम की सैर भी जोखिम भरी हो गई है।
निष्कर्ष
Ujjain में आवारा कुत्तों की समस्या अब गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा मुद्दा बन चुकी है। चार महीनों में 3300 से अधिक डॉग बाइट केस इस स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं। सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद अब नगर निगम और प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है।
लोगों को उम्मीद है कि इस बार केवल योजनाओं तक सीमित न रहकर जमीनी स्तर पर ठोस कदम उठाए जाएंगे, जिससे शहर के नागरिक सुरक्षित वातावरण में रह सकें और धार्मिक व सार्वजनिक स्थलों पर भयमुक्त आवागमन सुनिश्चित हो सके।
