Ujjain महाकाल: भस्म आरती में बाबा महाकाल के मस्तक पर दिखा अद्भुत शिवलिंग, दर्शन कर भावविभोर हुए श्रद्धालु
Ujjain स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार, 31 जनवरी 2026 को माघ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर आयोजित भस्म आरती के दौरान श्रद्धा, भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। तड़के सुबह चार बजे जैसे ही बाबा महाकाल के कपाट खुले, पूरा मंदिर परिसर “जय श्री महाकाल” के जयघोष से गूंज उठा। हजारों श्रद्धालु देर रात से ही दर्शन की पंक्ति में खड़े होकर अपने आराध्य देव महाकाल के अलौकिक दर्शन की प्रतीक्षा कर रहे थे।
इस विशेष अवसर पर बाबा महाकाल का ऐसा दिव्य और आकर्षक शृंगार किया गया, जिसने उपस्थित हर श्रद्धालु को भावविभोर कर दिया। भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल के शिवलिंग पर एक और शिवलिंग का स्वरूप स्पष्ट रूप से दिखाई दिया, जिसे देखकर भक्तों में आश्चर्य और भक्ति की भावना और अधिक गहराई से भर गई।
तड़के चार बजे जागे बाबा महाकाल, भस्म रमाकर किया गया भव्य शृंगार
भस्म आरती से पूर्व परंपरा अनुसार वीरभद्र जी से आज्ञा ली गई। इसके बाद जैसे ही मंदिर के कपाट खोले गए, पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में विराजित सभी देवी-देवताओं का विधिवत पूजन-अर्चन किया। इसके पश्चात भगवान महाकाल का पंचामृत से अभिषेक किया गया, जिसमें दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत और विभिन्न फलों के रस का उपयोग किया गया।
पूजन के दौरान प्रथम घंटाल बजाकर हरि ओम मंत्र के साथ जल अर्पण किया गया। मंदिर में मौजूद श्रद्धालु इस अद्भुत दृश्य को देखकर मंत्रमुग्ध हो गए। अभिषेक के पश्चात भगवान महाकाल को आकर्षक वस्त्र, आभूषण और नवीन मुकुट धारण कराया गया, जिससे उनका स्वरूप अत्यंत दिव्य और अलौकिक दिखाई दे रहा था।
भस्म आरती में दिखा अद्भुत चमत्कार, शिवलिंग पर नजर आया एक और शिवलिंग
श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि भस्म आरती के दौरान महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल के शिवलिंग पर भस्म अर्पित की गई। जैसे ही भस्म अर्पण किया गया, भगवान महाकाल का स्वरूप निराकार से साकार रूप में दर्शन देने लगा।
आज के शृंगार की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि बाबा महाकाल के शिवलिंग पर भस्म के माध्यम से एक और शिवलिंग का स्वरूप स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा। इस दिव्य दृश्य को देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और पूरे गर्भगृह में “हर हर महादेव” और “जय श्री महाकाल” के जयकारे गूंजने लगे।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भस्म अर्पण के बाद भगवान शिव अपने भक्तों को विशेष दर्शन देते हैं और यह दर्शन अत्यंत दुर्लभ और पुण्यदायी माने जाते हैं।

ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के साथ सम्पन्न हुई भव्य भस्म आरती
Ujjain भस्म आरती के दौरान झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में डूब गया। कपूर आरती के पश्चात भगवान महाकाल को नवीन मुकुट धारण कराया गया, जिसके बाद भस्म आरती विधिवत रूप से सम्पन्न हुई।
हजारों श्रद्धालुओं ने इस दिव्य आरती में भाग लिया और बाबा महाकाल के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया। कई भक्तों की आंखों में आंसू और चेहरे पर अद्भुत शांति का भाव साफ नजर आ रहा था।
महाशिवरात्रि और शिवनवरात्रि पर्व की तैयारियां शुरू
श्री महाकालेश्वर मंदिर में आगामी शिवनवरात्रि और महाशिवरात्रि महापर्व 2026 की तैयारियां भी प्रारंभ कर दी गई हैं। मंदिर प्रशासन द्वारा यह पर्व 6 फरवरी 2026 से 15 फरवरी 2026 तक श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया जाएगा, जिसमें 15 फरवरी को महाशिवरात्रि महापर्व मनाया जाएगा।
मंदिर प्रशासन ने इस महापर्व को भव्य, सुव्यवस्थित और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आयोजित करने के लिए व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं।
मंदिर परिसर का सौंदर्यीकरण और सफाई कार्य तेज
पर्व की तैयारियों के अंतर्गत श्री महाकालेश्वर मंदिर के मुख्य शिखर की धुलाई की जा रही है। इसके साथ ही मंदिर परिसर की रंग-रोगन (पुताई), कोटितीर्थ कुंड की सफाई तथा मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में व्यापक स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है।
श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था, दर्शन व्यवस्था और यातायात प्रबंधन को लेकर भी विशेष योजना बनाई जा रही है, ताकि महाशिवरात्रि के दौरान आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
आस्था और विश्वास का केंद्र है महाकालेश्वर धाम
Ujjain स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यहां होने वाली भस्म आरती को विश्वभर में अद्वितीय माना जाता है। प्रतिदिन तड़के सुबह होने वाली इस आरती में भगवान शिव को भस्म अर्पित की जाती है, जो जीवन और मृत्यु के सत्य का प्रतीक मानी जाती है।
शनिवार को हुई भस्म आरती और उसमें दिखाई दिया दिव्य स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव बन गया, जिसे वे जीवनभर नहीं भूल पाएंगे।
निष्कर्ष
31 जनवरी 2026 को उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में हुई भस्म आरती ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि बाबा महाकाल अपने भक्तों पर विशेष कृपा बनाए रखते हैं। शिवलिंग पर दिखाई दिया अद्भुत शिवलिंग का स्वरूप आस्था, विश्वास और भक्ति का प्रतीक बन गया। आने वाले महाशिवरात्रि पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में अभी से ही उत्साह और उमंग का माहौल बना हुआ है।
